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देव आनंद: स्टैंप बेचकर किया गुजारा, होर्डिंग देखकर किसे बनाया सुपरस्टार? जानें क्यों अमिताभ संग नहीं किया काम
Sat, 26 Sep 2026 05:59 AM IST
संदेश मेहरा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: संदेश मेहरा
Updated Sat, 26 Sep 2026 05:59 AM IST
सार
Dev Anand Interesting Facts: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता देव आनंद की आज 103वीं जयंती है। अपनी शानदार अदाकारी, खास अंदाज और सदाबहार फिल्मों से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। आइए, उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में जानते हैं।
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देव आनंद की 103वीं जयंती पर विशेष
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अभिनेता होने के साथ-साथ देव आनंद निर्देशक, लेखक, निर्माता और राजनीतिक कार्यकर्ता भी रहे। उन्होंने अपने लंबे करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले देव आनंद एक क्लर्क की नौकरी करते थे?
क्लर्क की नौकरी से शुरू किया था सफर
देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को धर्मदेव पिशोरिमल आनंद के रूप में हुआ था। फिल्मों में आने से पहले कभी अंग्रेजों का खत पढ़ा करते थे। उन्होंने एक अकाउंटेंसी फर्म में क्लर्क की नौकरी की थी। यहां उन्हें 85 रुपये महीने की सैलरी मिलती थी।
इसके बाद उन्होंने मिलिट्री सेंसर ऑफिस में काम किया, जहां उनकी सैलरी 160 रुपये थी। फिर एक दिन नौकरी छोड़ दी और फिल्मों में करियर बनाने का सोचा। कुछ साल गरीबी झेली, तो अपना स्टैंप कलेक्शन बेचकर गुजारा किया। फिर कुछ समय बाद उन्हें फिल्म 'हम एक हैं' में काम करने का मौका मिला और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई।
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क्लर्क की नौकरी से शुरू किया था सफर
देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को धर्मदेव पिशोरिमल आनंद के रूप में हुआ था। फिल्मों में आने से पहले कभी अंग्रेजों का खत पढ़ा करते थे। उन्होंने एक अकाउंटेंसी फर्म में क्लर्क की नौकरी की थी। यहां उन्हें 85 रुपये महीने की सैलरी मिलती थी।
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इसके बाद उन्होंने मिलिट्री सेंसर ऑफिस में काम किया, जहां उनकी सैलरी 160 रुपये थी। फिर एक दिन नौकरी छोड़ दी और फिल्मों में करियर बनाने का सोचा। कुछ साल गरीबी झेली, तो अपना स्टैंप कलेक्शन बेचकर गुजारा किया। फिर कुछ समय बाद उन्हें फिल्म 'हम एक हैं' में काम करने का मौका मिला और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई।
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करियर में की यादगार फिल्में
देव आनंद भारतीय सिनेमा के सदाबहार एक्टर थे, जिनकी यूनिक स्टाइल और बेहतरीन एक्टिंग ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। ग्राफिक्स की मदद से नजर डालिए उनकी यादगार फिल्मों और किरदारों पर।
देव आनंद भारतीय सिनेमा के सदाबहार एक्टर थे, जिनकी यूनिक स्टाइल और बेहतरीन एक्टिंग ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। ग्राफिक्स की मदद से नजर डालिए उनकी यादगार फिल्मों और किरदारों पर।
'काला पानी' के बाद काले कपड़े पहनने पर लगी थी रोक
फिल्मों में अपने अभिनय के अलावा देव साहब अपने खास फैशन और स्टाइल के लिए भी काफी मशहूर थे। बताया जाता है कि फिल्म 'काला पानी' की रिलीज के दौरान एक घटना के बाद उन्हें काले कपड़े पहनने से मना किया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक आउटफिट में उनकी एक झलक पाने के लिए महिलाएं इमारतों तक से कूद जाती थीं। इसी वजह से एक महिला की जान चली गई थी।
चार्ली चैपलिन के बड़े फैन थे
देव आनंद मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता चार्ली चैपलिन के बहुत बड़े फैन थे। साल 1954 में स्विट्जरलैंड के मॉन्ट्रो में उनकी मुलाकात चार्ली चैपलिन से हुई। देव आनंद ने उन्हें देखते ही एक्साइटमेंट में जोर से 'हेल चैपलिन' चिल्लाने लगे। इस पर चैपलिन हंस पड़े और उन्होंने मजाकिया अंदाज में देव आनंद का स्वागत किया। देव आनंद के लिए यह मुलाकात बेहद खास थी।
फिल्मों में अपने अभिनय के अलावा देव साहब अपने खास फैशन और स्टाइल के लिए भी काफी मशहूर थे। बताया जाता है कि फिल्म 'काला पानी' की रिलीज के दौरान एक घटना के बाद उन्हें काले कपड़े पहनने से मना किया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक आउटफिट में उनकी एक झलक पाने के लिए महिलाएं इमारतों तक से कूद जाती थीं। इसी वजह से एक महिला की जान चली गई थी।
चार्ली चैपलिन के बड़े फैन थे
देव आनंद मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता चार्ली चैपलिन के बहुत बड़े फैन थे। साल 1954 में स्विट्जरलैंड के मॉन्ट्रो में उनकी मुलाकात चार्ली चैपलिन से हुई। देव आनंद ने उन्हें देखते ही एक्साइटमेंट में जोर से 'हेल चैपलिन' चिल्लाने लगे। इस पर चैपलिन हंस पड़े और उन्होंने मजाकिया अंदाज में देव आनंद का स्वागत किया। देव आनंद के लिए यह मुलाकात बेहद खास थी।
दिलीप कुमार, देव आनंद और राज कपूर (बाएं से दाएं)
- फोटो : X
अधूरी रह गई दिलीप कुमार से मिलने की इच्छा
वहीं, 50 और 60 के दशक में देव आनंद, दिलीप कुमार और राज कपूर हिंदी सिनेमा के तीन बड़े सितारे माने जाते थे। मीडिया में उस दौर में इन तीनों सितारों के बीच प्रोफेशनल प्रतिद्वंद्विता की बातें खूब होती थीं। हालांकि, निजी जिंदगी में तीनों के बीच अच्छे रिश्ते थे। देव आनंद और दिलीप कुमार के बीच भी खास बॉन्डिंग थी।
देव आनंद की दिलीप कुमार से मुलाकात की इच्छा का एक किस्सा भी काफी भावुक है। अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में देव आनंद बीमार थे, लेकिन वह दिलीप कुमार से उनके जन्मदिन पर मिलना चाहते थे। उन्होंने इस तारीख को अपनी डायरी में भी लिख रखा था, ताकि वह इसे भूल न जाएं।
हालांकि, उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। 4 दिसंबर 2011 को देव आनंद का निधन हो गया, जबकि दिलीप कुमार का जन्मदिन इसके ठीक एक हफ्ते बाद 11 दिसंबर को था।
वहीं, 50 और 60 के दशक में देव आनंद, दिलीप कुमार और राज कपूर हिंदी सिनेमा के तीन बड़े सितारे माने जाते थे। मीडिया में उस दौर में इन तीनों सितारों के बीच प्रोफेशनल प्रतिद्वंद्विता की बातें खूब होती थीं। हालांकि, निजी जिंदगी में तीनों के बीच अच्छे रिश्ते थे। देव आनंद और दिलीप कुमार के बीच भी खास बॉन्डिंग थी।
देव आनंद की दिलीप कुमार से मुलाकात की इच्छा का एक किस्सा भी काफी भावुक है। अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में देव आनंद बीमार थे, लेकिन वह दिलीप कुमार से उनके जन्मदिन पर मिलना चाहते थे। उन्होंने इस तारीख को अपनी डायरी में भी लिख रखा था, ताकि वह इसे भूल न जाएं।
हालांकि, उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। 4 दिसंबर 2011 को देव आनंद का निधन हो गया, जबकि दिलीप कुमार का जन्मदिन इसके ठीक एक हफ्ते बाद 11 दिसंबर को था।
देव आनंद और सुरैया
- फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
सुरैया से हुआ था प्यार
देव आनंद और अभिनेत्री सुरैया की प्रेम कहानी भी हिंदी सिनेमा की चर्चित कहानियों में शामिल है। दोनों की नजदीकियां फिल्म 'विद्या' के गाने 'किनारे किनारे' की शूटिंग के दौरान बढ़ीं।
बाद में फिल्म 'जीत' के सेट पर देव आनंद ने सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया और उन्हें 3 हजार रुपये की हीरे की अंगूठी भी दी। हालांकि, सुरैया की मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं और दोनों की शादी नहीं हो सकी। इसके बाद आनंद की शादी कल्पना कार्तिक से हुई। वहीं सुरैया ने जिंदगी भर शादी नहीं की।
देव आनंद और अभिनेत्री सुरैया की प्रेम कहानी भी हिंदी सिनेमा की चर्चित कहानियों में शामिल है। दोनों की नजदीकियां फिल्म 'विद्या' के गाने 'किनारे किनारे' की शूटिंग के दौरान बढ़ीं।
बाद में फिल्म 'जीत' के सेट पर देव आनंद ने सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया और उन्हें 3 हजार रुपये की हीरे की अंगूठी भी दी। हालांकि, सुरैया की मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं और दोनों की शादी नहीं हो सकी। इसके बाद आनंद की शादी कल्पना कार्तिक से हुई। वहीं सुरैया ने जिंदगी भर शादी नहीं की।
कई सदाबहार गानों से किया सभी के दिलों में राज
देव आनंद की पॉपुलैरिटी केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने करियर में कई सदाबहार और पॉपुलर गाने दिए हैं, जो आज भी लोगों के दिलों में राज करते हैं। देखिए उनके सदाबहार गानों की लिस्ट-
देव आनंद की पॉपुलैरिटी केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने करियर में कई सदाबहार और पॉपुलर गाने दिए हैं, जो आज भी लोगों के दिलों में राज करते हैं। देखिए उनके सदाबहार गानों की लिस्ट-
इमरजेंसी के दौरान राजनीति में भी रहे एक्टिव
देव आनंद सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। इमरजेंसी के दौरान भी उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की थी। 1977 के चुनावों के दौरान उन्होंने कुछ फिल्मी हस्तियों के साथ मिलकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ अभियान चलाया। बाद में उन्होंने नेशनल पार्टी ऑफ इंडिया नाम से एक राजनीतिक दल भी बनाया, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल सका।
देव आनंद सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। इमरजेंसी के दौरान भी उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की थी। 1977 के चुनावों के दौरान उन्होंने कुछ फिल्मी हस्तियों के साथ मिलकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ अभियान चलाया। बाद में उन्होंने नेशनल पार्टी ऑफ इंडिया नाम से एक राजनीतिक दल भी बनाया, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल सका।
जैकी श्रॉफ-देव आनंद
- फोटो : सोशल मीडिया
होर्डिंग में तस्वीर देख जैकी श्रॉफ को दिया था मौका
जैकी श्रॉफ ने एक विज्ञापन एजेंसी के लिए फोटोशूट किया था। जब एक होर्डिंग पर देव आनंद ने जैकी श्रॉफ की तस्वीर देखी तो उन्होंने जैकी को फिल्म में रोल देने के बारे में सोचा। फिल्मों में जैकी श्रॉफ का पहला कदम देव आनंद की फिल्म ‘स्वामी दादा’ (1982) से हुआ, जिसमें उन्होंने छोटा सा किरदार निभाया था।
इसके बाद निर्देशक सुभाष घई की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने जैकी को ‘हीरो’ (1983) में मीनाक्षी शेषाद्रि के साथ कास्ट किया। फिल्म बड़ी हिट रही और जैकी श्रॉफ रातोंरात स्टार बन गए। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना ली।
जैकी श्रॉफ ने एक विज्ञापन एजेंसी के लिए फोटोशूट किया था। जब एक होर्डिंग पर देव आनंद ने जैकी श्रॉफ की तस्वीर देखी तो उन्होंने जैकी को फिल्म में रोल देने के बारे में सोचा। फिल्मों में जैकी श्रॉफ का पहला कदम देव आनंद की फिल्म ‘स्वामी दादा’ (1982) से हुआ, जिसमें उन्होंने छोटा सा किरदार निभाया था।
इसके बाद निर्देशक सुभाष घई की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने जैकी को ‘हीरो’ (1983) में मीनाक्षी शेषाद्रि के साथ कास्ट किया। फिल्म बड़ी हिट रही और जैकी श्रॉफ रातोंरात स्टार बन गए। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना ली।
देव आनंद और अमिताभ बच्चन
- फोटो : सोशल मीडिया
अमिताभ बच्चन के साथ क्यों नहीं की फिल्म?
देव आनंद ने अपने करियर में दिलीप कुमार, अशोक कुमार से लेकर मिथुन चक्रवर्ती और आमिर खान तक कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। लेकिन उन्होंने कभी अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर नहीं की।
दरअसल, प्रकाश मेहरा की फिल्म 'जंजीर' में इंस्पेक्टर विजय खन्ना का किरदार पहले देव आनंद को ऑफर किया गया था। यह वही किरदार था, जिसे बाद में अमिताभ बच्चन ने निभाया और उनके करियर के लिए यह फिल्म बेहद अहम साबित हुई। देव आनंद ने इस फिल्म का ऑफर ठुकरा दिया था। इसके बाद उन्होंने कभी अमिताभ बच्चन के साथ काम नहीं किया।
देव आनंद ने अपने करियर में दिलीप कुमार, अशोक कुमार से लेकर मिथुन चक्रवर्ती और आमिर खान तक कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। लेकिन उन्होंने कभी अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर नहीं की।
दरअसल, प्रकाश मेहरा की फिल्म 'जंजीर' में इंस्पेक्टर विजय खन्ना का किरदार पहले देव आनंद को ऑफर किया गया था। यह वही किरदार था, जिसे बाद में अमिताभ बच्चन ने निभाया और उनके करियर के लिए यह फिल्म बेहद अहम साबित हुई। देव आनंद ने इस फिल्म का ऑफर ठुकरा दिया था। इसके बाद उन्होंने कभी अमिताभ बच्चन के साथ काम नहीं किया।
करियर में जीते कई अवॉर्ड्स
भारतीय सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद को अपने लंबे और शानदार करियर में कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। एक नजर उनके अवॉर्ड्स पर भी डालिए।
भारतीय सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद को अपने लंबे और शानदार करियर में कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। एक नजर उनके अवॉर्ड्स पर भी डालिए।