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बॉलीवुड का अकेला ऐसा विलेन, जो जंगल में हथियार लेकर पैदल निकल पड़ता है, शौक बेहद अजीब

Wed, 23 May 2018 04:01 PM IST
BBC हिंदी
BBC हिंदी Updated Wed, 23 May 2018 04:01 PM IST
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Bollywood actor Danny Denzongpa lives Simple in his personal life
KHUDA GAWAH MOVIE
हाथ में धारदार हथियार लिए डैनी डैनजोंग्पा एक घने जंगल में कांटेदार झाड़ झंखाड़ साफ करते हुए, पसीने में तरबतर आगे बढ़ते जा रहे हैं। अगर आपसे पूछा जाए कि इस दृश्य के बाद क्या हुआ होगा तो शायद आप कहेंगे कि हिंदी फिल्मों के खूंखार विलेन डैनी अगले ही पल अपने धारदार दाव से अपने दुश्मन के चार टुकड़े कर देते हैं और फिर बड़े पर्दे पर दांत भींचते हुए उनकी खूंखार हंसी गूंजती है।
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यहीं गलती कर गए आप!

ये डैनी की किसी फिल्म का दृश्य नहीं है बल्कि वो अपनी असल जिंदगी में भी सिक्किम के जंगलों में मिशैटी या दाव लिए झाड़ काटते हुए पैदल ही निकल पड़ते हैं, घुड़सवारी करते हैं और सत्तर बरस की उम्र में भी पेड़ों पर चढ़ जाते हैं। डैनी कहते हैं उनकी सेहत का राज भी यही है। 
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Bollywood actor Danny Denzongpa lives Simple in his personal life
डैनी डैनजोंग्पा
वो कहते हैं,"हम लोग शिकारी हुआ करते थे। ये हमारे जींस में है। हम जानवरों के पीछे भागा करते थे। लेकिन अब जबसे गाड़ियां आ गई हैं, एसी आ गया है, लोग टीवी के सामने बैठ जाते हैं या फिर एसी गाड़ी से सफर करते हैं। मैंने पैदल चलना नहीं छोड़ा है"। 

इस शुक्रवार को डैनी की फिल्म 'बाइस्कोपवाला' रिलीज होने वाली है लेकिन उसके प्रीमियर में शामिल होने की बजाए वो पंद्रह दिन तक गंगतोक से आगे पहाड़ों पर ट्रैकिंग के लिए जाने की तैयारी कर रहे हैं।

"सब सामान तैयार है, घोड़े तैयार हैं, इसलिए मैं 'बाइस्कोपवाला' के प्रीमियर में शामिल नहीं हो पाऊंगा", डैनी ने अपने गांव युकसम से मोबाइल फोन पर बताया। वो मुंबई की भीड़भाड़ और कोलाहल छोड़कर अक्सर सिक्किम के अपने गांव पहुंच जाते हैं। 

Bollywood actor Danny Denzongpa lives Simple in his personal life
डैनी डैनजोंग्पा
चार दशक के ज्यादा समय से फिल्म इंडस्ट्री में गुजारने के बाद भी डैनी सबके बारे में सिर्फ अच्छी बातें ही कहते हैं। वो कहते हैं, "मैं जब पढ़ने के लिए स्कूल जाता था तो मेरे गांव से बस पकड़ने के लिए मुझे तीन दिन पैदल चल कर आना पड़ता था। मैं बंबई पहुंचा तो मेरे पास सिर्फ 1500 रुपए थे।

आज अगर सबकुछ लुट भी गया तो जो जूता मैं पहनता हूं वो उससे सौ गुना ज्यादा कीमत का होगा" उन्हें इस बात पर भी अफसोस नहीं है कि अब उन्हें उनके मन का काम कम मिलता है। 

उनकी नई फिल्म 'बाइस्कोपवाला' रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला पर आधारित है जिसपर इसी नाम से पहले भी फिल्म बन चुकी है। पर इस बार टैगोर की कहानी को पुराने जमाने में नहीं बल्कि 1980 के दशक में दिखाया गया है। डैनी डैनजोंग्पा ने इस में काबुलीवाला का किरदार निभाया है।

आप इस फिल्म में डैनी को अफगान बाइस्कोपवाले के तौर पर देखेंगे। वो कहते हैं कि काबुलीवाला का चरित्र निभाने के लिए उन्हें कोई ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।

वो याद करते हैं कि पूना के फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट में उनका एक सहपाठी अफगानिस्तान का रहने वाला था, जिससे उन्होंने पठानों का लहजा सीखा, और यही लहजा इस फिल्म में काम आया।
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Bollywood actor Danny Denzongpa lives Simple in his personal life
जिस फिल्मी दुनिया में लंबे चौड़े पंजाबी चेहरे-मोहरे वाले चाकलेटी हीरो को ही एक्टर माना जाता हो वहां सत्तर के दशक की शुरुआत में उत्तर-पूर्व के मंगोल चेहरे वाले डैनी को पैर जमाने में कितनी मुश्किल आई होगी इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। 

डैनी कहते हैं उन दिनों नाटकीय फिल्में बनती थीं जिनमें सास बहू के बीच तनाव, भाइयों का मिलना-बिछुड़ना, हीरो-विलेन की कहानियां होती थीं। डैनी कहते हैं उन्हें कुछ शुभचिंतकों ने सलाह दी कि जिस तरह की फिल्में बनती हैं उसमें तुम्हारे जैसे चेहरे-मोहरे वाले चरित्र नहीं खपेंगे इसलिए अब भी कहीं नौकरी कर लो।

लेकिन डैनी को जिद थी कि एक्टर के तौर पर वो अपने कदम जमा के ही मानेंगे। उन्होंने पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का डिप्लोमा किया था, बाकायदा प्रोफेशनल गायक थे और घर लौटने को तैयार नहीं थे।

ऐसे में गुलजार ने डैनी को 'मेरे अपने' फिल्म में एक छात्र का छोटा सा रोल दिया। फिल्म चली और डैनी के काम की तारीफ भी हुई।

Bollywood actor Danny Denzongpa lives Simple in his personal life
इसके बाद उन्हें 1971 में निर्देशक बीआर इशारा ने अपनी फिल्म 'जरूरत' में लिया। फिर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने डैनी के लिए अपने दरवाजे खोल दिए।

बीआर चोपड़ा की फिल्म 'धुंध' में एक गुस्सैल, सनकी और अपाहिज पति के किरदार को डैनी ने जिस तरह डूबकर निभाया उससे उनकी एक्टिंग की धाक जम गई और उन्हें 'खोटे सिक्के', 'चोर मचाए शोर', 'फकीरा', 'कालीचरन' जैसी फिल्में एक के बाद एक मिलने लगीं।

पर डैनी बताते हैं कि वो फिर भी भीतर से इस बात से सहज नहीं थे कि उनके जैसे मंगोल चेहरे वाले एक्टर को उत्तर भारतीय किरदार निभाने को कहा जाए।

जब एनएन सिप्पी ने 'फकीरा' फिल्म में डैनी को शशि कपूर के भाई का रोल ऑफर किया तो उन्होंने कहा मैं किसी भी कोण से शशि कपूर के भाई जैसा तो नहीं दिखता हूं। लेकिन सिप्पी ने उनसे कहा कि दर्शकों ने आपको स्वीकार कर लिया है और अब वो किसी भी रोल में आपको स्वीकार करेंगे। 

Bollywood actor Danny Denzongpa lives Simple in his personal life
Danny Denzongpa
डैनी हंसते हुए कहते हैं, "उसके बाद हमने विनोद खन्ना के भाई, शत्रुघ्न सिन्हा के भाई, मिथुन चक्रवर्ती के भाई, बाप, दोस्त और दुश्मन सबका रोल किया। विडंबना ये थी कि फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यू से एक्टिंग की जैसी ट्रेनिंग डैनी को मिली, फिल्मी दुनिया में उससे बिलकुल उलटा काम करने को कहा गया"

"फिल्म इंस्टीट्यूट में हमें बताया गया था कि आपको एक्टिंग नहीं करनी है बल्कि सिचुएशन के मुताबिक व्यवहार करना है। हमें वहां कोंस्तांतीन स्तानिस्लाव्स्की की एक्टिंग थ्येरी बताई गई थी। न्यूयॉर्क से मैथड एक्टिंग सिखाने के लिए एक टीचर आते थे। लेकिन फिल्मों में जब हम यथार्थ एक्टिंग करते थे तो डाइरेक्टर शॉट ओके करता ही नहीं था"

डैनी कहते हैं वो डायलॉगबाजी का जमाना था। लाउड एक्सप्रेशन और लाउड मेकअप उस दौर की खासियत थे। जो लोग आर्ट फिल्मों में रियलिस्टिक एक्टिंग करते थे उन एक्टरों को काम ही नहीं मिलता था लेकिन जो बाजार की मांग को ध्यान में रखकर एक्टिंग करते थे उनके पास काम ही काम था। 

Bollywood actor Danny Denzongpa lives Simple in his personal life
Danny Denzongpa
डैनी कहते हैं, "मैंने सोचा कि चलो पहले स्टार बन जाते हैं और जब अपनी जगह बन जाएगी तो फिर अपनी मनपसंद फिल्मों में काम करेंगे। लेकिन दुर्भाग्य वैसी फिल्मों में काम करते करते आपकी एक खास लार्जर दैन लाइफ इमेज बन जाती है और आप फिर दूसरी तरह की फिल्मों में फिट नहीं हो पाते"

पर अब उन्हें इस बात का संतोष है कि आहिस्ता आहिस्ता दर्शक भी समझने लगे हैं कि सहज एक्टिंग ही दरअसल एक्टिंग है। अब उनके पास बाहर की फिल्में देखने के मौके होते हैं और वो आसानी से तुलना कर सकते हैं।

डैनी एक्टर होने के साथ साथ एक बहुत अच्छे गायक भी हैं और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े गायकों जैसे लता मंगेशकर, आशा भोंसले, मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ गाने गाए हैं और उनके गाने बाकायदा हिट भी हुए हैं। उनका एक गाना जॉनी वॉकर और जयश्री टी के साथ फिल्माया गया था- मेरे पाश आवो, मेरा नाम रावो।

उस दौर को याद करते हुए डैनी खुलकर हंसते हैं और कहते हैं कि आप मुझे पौराणिक समय की बात याद दिला रहे हैं। जो किरदार जॉनी वॉकर ने किया वो पहले डैनी को मिला था पर आखिरी वक्त में उनका रोल कट गया। लेकिन सचिन देब बर्मन ने जिद करके कहा कि गाना तो डैनी की आवाज में ही जाएगा और आखिरकार गया भी।

पर गंगतोक के आगे की पहाड़ियों के अपने घर में सुकून से बैठे डैनी ने टेलीफोन पर गाना तो दूर गुनगुनाने से भी इनकार कर दिया। बिना रियाज के गाना उन्हें गवारा नहीं।
 
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