बेबाक: आयुष्मान खुराना ने की बच्चों की खुशहाली की दुआ, बोले- बाल मजदूरी छीन लेती है बच्चों का बचपन
- बाल मजदूरी के खिलाफ आयुष्मान खुराना ने खुलकर अपनी बात रखी है।
- उनका कहना है कि बच्चों को इन हालात से बाहर निकाला जाए क्योंकि बाल मजदूरी प्रथा बच्चों के अधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन है।
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फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ के बाद अब अपनी अगली फिल्म ‘अनेक’ की रिलीज की प्रतीक्षा कर रहे अभिनेता आयुष्मान खुराना को हर वह बात कचोटती है जो प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है। आयुष्मान खुराना हाल ही में यूनिसेफ के वैश्विक अभियान ईवीएसी (बच्चों के खिलाफ हिंसा खत्म करना) के सेलिब्रिटी समर्थक भी बने और विश्व बाल मजदूरी निषेध दिवस पर वह इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों को इन हालात से बाहर निकाला जाए क्योंकि बाल मजदूरी प्रथा बच्चों के अधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन है।
आयुष्मान कहते हैं, “बाल मजदूरी बच्चों से उनका बचपन छीन लेती है और यह उनके अधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन है। कोविड-19 ने बच्चों को, विशेष रुप से बच्चियों और प्रवासी मजदूरों के बच्चों को बड़े खतरों के संपर्क में लाते हुए ज़्यादा असुरक्षित बना दिया है। स्कूलों का बंद होना, घर में बढ़ी हुई हिंसा, माता-पिता की मौत, परिवार के भीतर नौकरी जाने के कारण बच्चों को बाल मजदूरी की ओर धकेला जा रहा है।”
गौरतलब है कि देश की पिछली जनगणना के अनुसार 5 से 14 वर्ष के आयु वर्ग में एक करोड़ से ज्यादा बच्चे किसी न किसी तरह के काम में संलग्न हैं और इन कामों का उद्देश्य है घर खर्च के लिए पैसे कमाना। ये तो वह संख्या है जो सामने दिखती है। इनके अलावा घरेलू कार्यों व दूसरे असंगठित क्षेत्रों में बच्चे बड़े पैमाने पर काम करते हैं लेकिन उनकी गिनती कम ही हो पाती है। लोग जानबूझकर बच्चों को नौकरी पर रखते हैं क्योंकि उन्हें काम पर रखना सस्ता होता है और अधिकारों के बारे में उनमें जागरुकता नहीं होती।
हाल की रिपोर्टों से ये भी पता चलता है कि कोविड-19 स्वास्थ्य महामारी और इसके कारण आर्थिक और श्रम बाज़ार में लगे झटकों का बहुत बड़ा असर लोगों के जीवनों और आजीविका पर पड़ रहा है। दुर्भाग्य से, इससे सबसे पहले पीड़ित होने वाले बच्चे ही होते हैं। बाल मजदूरी की शुरूआत भले गरीबी की चलते हुई हो लेकिन अब ये एक मानवीय संकट के साथ साथ सामाजिक और आर्थिक संकट में बदल चुकी है।
इस प्रथा के चलते होने वाले बाल शोषण को रोकने के लिए आयुष्मान खुराना और यूनिसेफ एक साथ आए हैं और लोगों से ऐसी समस्याओं के प्रति जागरुक रहने का आग्रह कर रहे हैं। आयुष्मान का कहना है, “इस समस्या को रोकने के लिए आपस में मिल कर काम करना जरूरी है। गरीब परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का समर्थन करने के साथ साथ हमें इस बात को प्रमुखता से ध्यान रखना है कि स्कूल जब फिर से शुरू हों तो हम अपने आसपास के बच्चों को सुरक्षित रुप से स्कूलों में ले जाए जाने की बात तय करें।