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Anek Review: राजनीति में हिंसा की ‘जरूरत’ का पर्दाफाश करती ‘अनेक’, उत्तर पूर्व के बहाने दिल्ली पर चोट

Fri, 27 May 2022 05:54 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 27 May 2022 05:54 PM IST
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Anek Movie Review and Rating in Hindi Ayushmann Khurrana Anubhav Sinha Andra Kevichusa Manoj Pahwa
अनेक - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
अनेक
कलाकार
आयुष्मान खुराना , एंड्रिया केविचुसा , मनोज पाहवा , जे डी चक्रवर्ती , कुमुद मिश्रा , मेघना मलिक और आदि
लेखक
अनुभव सिन्हा , सीमा अग्रवाल और यश केसवानी
निर्देशक
अनुभव सिन्हा
निर्माता
भूषण कुमार और अनुभव सिन्हा
रेटिंग
4/5

फिल्म ‘अनेक’ मौजूदा समय पर निर्देशक अनुभव सिन्हा की एक और टिप्पणी है। फिल्म ‘मुल्क’ से जागे अनुभव सिन्हा इसके पहले देश की अलसाती मेधा को ‘आर्टिकल 15’ पढ़वा चुके हैं और ‘थप्पड़’ भी लगा चुके हैं। फिल्म ‘अनेक’ में अनुभव समाज से आगे निकलकर देश की बात कर रहे हैं। वह इस बार देश के उन हिस्सों में पहुंचे हैं, जिनकी शक्ल सूरत देखकर उन्हें अपना मानने की कोशिश देश के मुख्य क्षेत्र में कम ही हो पाई है। फिल्म जरूरी बात करती है। सिनेमाई दायरे में रहकर करती है। और, धारा से विपरीत जाकर कहानियों को कहने का जोखिम भी उठाती है। आयुष्मान खुराना कहते हैं कि फिल्म ‘अनेक’ को बॉक्स ऑफिस की कसौटी पर उस तरह नहीं कसा जाना चाहिए जैसे बाकी कमर्शियल फिल्मों के साथ होता है। लेकिन, फिल्म ‘अनेक’ का ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना जरूरी है। 'द कश्मीर फाइल्स’ के सुपरहिट होने और ‘द केरला स्टोरी’ के रिलीज होने के बीच फिल्म ‘अनेक’ देश की तस्वीर का एक ऐसा पहलू है जिसके बारे में बात होनी जरूरी है।

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Anek Movie Review and Rating in Hindi Ayushmann Khurrana Anubhav Sinha Andra Kevichusa Manoj Pahwa
अनेक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अशांति के बूते राजनीति फिल्म ‘अनेक’ देखते हुए मुझे अपनी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की डेढ़ दशक पहले की वह यात्रा बार बार याद आती रही जिसमें गलती से मैं अपने पूरे परिवार को साथ लेकर चला गया था। दंतेवाड़ा, बस्तर के अंदरूनी इलाकों में घूमते हुए जान हथेली पर थी लेकिन भरोसा इस बात का था कि इलाके के लोग जुबान के पक्के होते हैं। गाड़ी का नंबर उनकी सारी टीमों को इलाके के एक रिपोर्टर की मार्फत भिजवाया गया था और भरोसा मिला था कि हम सुरक्षित हैं। लेकिन डर ये भी बना रहा कि कहीं अगर किसी विरोधी गुट ने सुर्खियां बनाने की ठान ली तो? तीन दिन तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के भीतर तक घूमने के बाद ये समझ आया कि कोई तो है जो चाहता है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अशांति ही बनी रहे। फिल्म ‘अनेक’ इसी सवाल को उत्तर पूर्व में लेकर जाती है। सिर्फ 24 किमी चौड़े गलियारे से बाकी देश से जुड़े उत्तर पूर्व के राज्यों के किसानों की पूरी फसल हाईवे पर खड़े ट्रकों में सड़ जाती है क्योंकि उन्हें दूसरी तरफ से आती फौज की गाड़ियों के लिए जगह बनानी होती है।

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Anek Movie Review and Rating in Hindi Ayushmann Khurrana Anubhav Sinha Andra Kevichusa Manoj Pahwa
अनेक - फोटो : अमर उजाला , मुंबई

कहानी उत्तर पूर्व के संघर्ष की फिल्म ‘अनेक’ देश के सबसे मशहूर नारे ‘जय जवान जय किसान’ को दो हिस्सों में बांटकर एक दूसरे के आमने सामने ले आती है। सरकार उत्तर पूर्व में शांति चाहती है। शांति वार्ता हो चुकी है। शांति समझौते पर हस्ताक्षर अब नाक का सवाल है। टेबल पर बैठे उग्रवादियों के नेता की नाक में दम करने के लिए एक अंडरकवर एजेंट जिस गुट को पालता रहा है, वही अब शांति समझौते के खिलाफ है। सरकार शांति चाहती है। और, फिल्म एक जगह कहती है,  ‘हिंसा को बनाए रखना शांति बनाए रखने से ज्यादा आसान है।’ सच भी है युद्ध एक कारोबार है जिसमें मुनाफे की गारंटी शर्तिया होती है। शांति में क्या रखा है, सब कुछ सही चलता रहे तो न सरकारों के पास काम होगा और न ही हथियार बेचने वालों के पास कारोबार।

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Anek Movie Review and Rating in Hindi Ayushmann Khurrana Anubhav Sinha Andra Kevichusa Manoj Pahwa
अनेक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ऑस्कर में जाने का दम आयुष्मान खुराना की फिल्में सामाजिक और पारिवारिक वर्जनाओं को तोड़ती रही हैं। इस बार उनकी नई फिल्म ‘अनेक’ राजनीतिक वर्जनाओं को तोड़ रही है। अनुभव सिन्हा ने फिल्म ‘मुल्क’ के बाद जो अपना विचार परिवर्तन किया है, उसने उन्हें एक बेहतर फिल्ममेकर बनाने में बहुत मदद की। फिल्म ‘अनेक’ इस बदले हुए अनुभव सिन्हा का अब तक का बेहतरीन काम है। उत्तर पूर्व पर बनी फिल्मों की लंबी लिस्ट है लेकिन इस क्षेत्र में जो होता रहा है उस पर हिंदी की मुख्यधारा की फिल्म बनाकर अनुभव ने जोखिम भी बहुत बड़ा लिया है। फिल्म ‘अनेक’ विश्व सिनेमा का नया अनुभव है। जिस तरह की ये फिल्म बनी है और जो इसका असर जाग्रत दर्शकों पर होता है, उस लिहाज से इसे अगले ऑस्कर पुरस्कार समारोह में भारत की तरफ से आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में जाना ही चाहिए। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की ज्यूरी की अपनी काबिलियत पर भी इस फैसले की धुरी टिकी रहेगी।

Anek Movie Review and Rating in Hindi Ayushmann Khurrana Anubhav Sinha Andra Kevichusa Manoj Pahwa
अनेक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

मौजूदा समय की जरूरी फिल्म फिल्म ‘अनेक’ उसी कंपनी टी सीरीज की फिल्म है जिसकी पिछली फिल्म ‘भूल भुलैया 2’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस की फेवरेट फिल्म है। दोनों फिल्मों के प्रचार के धरातल का अंतर भी फिल्म की रिलीज के पहले बने माहौल से समझ आता है। आयुष्मान खुराना खुद भी कहते हैं कि ‘अनेक’ जैसी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस आंकड़े ज्यादा मायने नहीं रखते। मायने रखता है इस बात का लोगों तक पहुंचना। लेकिन मेरा मानना है कि ‘अनेक’ जैसी फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर चलना बहुत जरूरी है। ये ‘द नॉर्थ ईस्ट फाइल्स’ है। इस फिल्म के लिए किसी राजनीतिक दल या उससे जुड़े संगठन ग्रुप बुकिंग नहीं करेंगे लेकिन नई पीढ़ी के दर्शकों के लिए ये एक जरूरी फिल्म है। इस देश को जानने के लिए। इस देश का दर्द पहचानने के लिए।

Anek Movie Review and Rating in Hindi Ayushmann Khurrana Anubhav Sinha Andra Kevichusa Manoj Pahwa
अनेक - फोटो : सोशल मीडिया

आइडो और जोशुआ की प्रेम कहानी उत्तर पूर्व के इस दर्द को परदे पर बहुत ही सादगी और सच्चे मन से पेश करती है फिल्म ‘अनेक’। आइडो और जोशुआ के अनकहे प्रेम की कहानी इस सच का छलावा है। ये वैसा ही छलावा है जैसा उत्तर पूर्व के राज्यों के साथ लगातार होता रहा है। दिल्ली की बनिस्बत चीन और म्यांमार के ज्यादा करीब इन राज्यों के लोग खुद को ‘भारतीय’ क्यों और कैसे कहें, इस पर सवाल उठाते आयुष्मान खुराना के चेहरे की झुंझलाहट ही वहां के सामान्य नागरिक का दर्द है। एंड्रिया को भारत की तरफ से खेलना है लेकिन लोग उसे भारतीय मानें तब ना। फिल्म के क्लाइमेक्स में आइडो और अमन का संघर्ष समानांतर घटता है। और, यहीं आकर फिल्म उस दायरे से बाहर निकल जाती है जिसे बॉक्स ऑफिस की कसौटी कहा जाता है।



 

Anek Movie Review and Rating in Hindi Ayushmann Khurrana Anubhav Sinha Andra Kevichusa Manoj Pahwa
अनेक फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

देखें कि न देखें फिल्म ‘अनेक’ इस समय का सच है। हिंदी सिनेमा इन दिनों भ्रांतियों, पूर्वाग्रहों और अनुमानों के बीच झूल रहा है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ के सुपरहिट होने और ‘द केरला स्टोरी’ के रिलीज होने के बीच फिल्म ‘अनेक’ देश की तस्वीर का एक ऐसा पहलू है जिसके बारे में बात होना जरूरी है। अभिनेता आयुष्मान खुराना और निर्देशक अनुभव सिन्हा ने फिल्म ‘आर्टिकल 15’ के बाद ये एक और फिल्म बनाकर अपने लिए तो एक नई लकीर खींची ही है, ये लकीर हिंदी सिनेमा की तकदीर की भी नई लकीर बन सकती है। फिल्म जरूर देखें।

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