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फिल्म 'पंचनामा' का ये हीरो निभाएगा अजीत डोभाल का किरदार
अमित कर्ण। अमर उजाला मुंबई।
Updated Thu, 13 Oct 2016 07:46 AM IST
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इन दिनों हिंदुस्तान की अवाम की आंखों का तारा बने हुए हैं। वजह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक है। अजीत उस हमले के मास्टरमाइंड हैं। उनकी बहादुरी पर बॉलीवुड भी फिदा हो गया है। खबरें हैं कि उन पर एक बायोपिक बनने वाली है। इस बाबत निर्माताओं ने दिव्येंदु शर्मा से संपर्क साधा है।
दिव्येंदु शर्मा ने प्यार का पंचनामा में लिक्विड की यादगार भूमिका निभाई थी। डेविड धवन की चश्मेबद्दूर में तुकबंदी करने वाले शायर के रोल में उन्होंने लोगों को हंसी से लोट-पोट कर दिया था। अब उनकी '2016 द इंड' आ रही है।
दिव्येंदु कहते हैं,' वे भारत के ऐसे एकमात्र नागरिक हैं जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। मुझे इस रोल के लिए संपर्क किया गया है। मैं भी अजीत डोभाल का बहुत बड़ा फैन हूं। मेरी ख्वाहिश थी कि अगर कभी किसी की बायोपिक करने का मौका मिले तो इस शख्स की जीवनी से शुरू करूं। वे कमाल के शख्स हैं।
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दिव्येंदु शर्मा ने प्यार का पंचनामा में लिक्विड की यादगार भूमिका निभाई थी। डेविड धवन की चश्मेबद्दूर में तुकबंदी करने वाले शायर के रोल में उन्होंने लोगों को हंसी से लोट-पोट कर दिया था। अब उनकी '2016 द इंड' आ रही है।
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दिव्येंदु कहते हैं,' वे भारत के ऐसे एकमात्र नागरिक हैं जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। मुझे इस रोल के लिए संपर्क किया गया है। मैं भी अजीत डोभाल का बहुत बड़ा फैन हूं। मेरी ख्वाहिश थी कि अगर कभी किसी की बायोपिक करने का मौका मिले तो इस शख्स की जीवनी से शुरू करूं। वे कमाल के शख्स हैं।
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फिल्म 'पंचनामा' का ये हीरो निभाएगा अजीत डोभाल का किरदार
सर्जिकल स्ट्राइक से पहले भी उन्होंने काफी झंडे गाड़े हैं। स्वर्ण मंदिर में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में उन्होंने सेना को खूफिया जानकारियां मुहैया करवाई थीं। इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी मुहैया करवाई थी।
मैं जानना चाहता हूं कि उनके दिमाग में क्या कुछ चलता होगा? उनकी जर्नी कमाल की है। एक ऐसा जासूस जो पाकिस्तान के लाहौर में 7 साल मुसलमान बनकर अपने देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा। अस्सी के दशक में वे उत्तर पूर्व में भी सक्रिय रहे। उस समय ललडेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसा और अशांति फैला रखी थी, लेकिन तब डोवाल ने ललडेंगा के सात में छह कमांडरों का विश्वास जीत लिया।
इसका नतीजा यह हुआ कि ललडेंगा को मजबूरी में भारत सरकार के साथ शांतिविराम का विकल्प अपनाना पड़ा था। उनके बारे में ऐसे कई और किस्से हैं, जिनके आगे जेम्स बांड की कपोलकप्लित रोमांचक कहानियां भी फीकी लगती हैं। बहरहाल फिल्म के बारे में बहुत जल्द आधिकारिक घोषणा की जाएगी।'
मैं जानना चाहता हूं कि उनके दिमाग में क्या कुछ चलता होगा? उनकी जर्नी कमाल की है। एक ऐसा जासूस जो पाकिस्तान के लाहौर में 7 साल मुसलमान बनकर अपने देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा। अस्सी के दशक में वे उत्तर पूर्व में भी सक्रिय रहे। उस समय ललडेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसा और अशांति फैला रखी थी, लेकिन तब डोवाल ने ललडेंगा के सात में छह कमांडरों का विश्वास जीत लिया।
इसका नतीजा यह हुआ कि ललडेंगा को मजबूरी में भारत सरकार के साथ शांतिविराम का विकल्प अपनाना पड़ा था। उनके बारे में ऐसे कई और किस्से हैं, जिनके आगे जेम्स बांड की कपोलकप्लित रोमांचक कहानियां भी फीकी लगती हैं। बहरहाल फिल्म के बारे में बहुत जल्द आधिकारिक घोषणा की जाएगी।'