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AR Rahman: कान में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन से खुश हैं एआर रहमान, बोले- आज के युवा की नई सोच शानदार
Thu, 13 Jun 2024 11:39 PM IST
अनुपमा कुमारी
एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अनुपमा कुमारी
Updated Thu, 13 Jun 2024 11:39 PM IST
सार
संगीतकार ए आर रहमान पायल कपाड़िया की जीत से काफी खुश हैं। साथ ही साथ उन्होंने कान फिल्म फेस्टिवल में भारत की मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर किया है। संगीतकार कहते हैं, 'हम किसी की प्रतिभा को एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते हैं। पायल कपाड़िया जैसे युवा भारतीय कलाकार जानते हैं कि दुनिया के सामने हमें कौन सी और कैसी कहानियां लानी है। वे बदलते समय के साथ तालमेल रखना जानते हैं।
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ए आर रहमान
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के पूर्व छात्र पायल कपाड़िया की फिल्म 'ऑल वी इमेजिन एज लाइट' को कान फिल्म फेस्टिवल में ग्रांड प्रिक्स पुरस्कार मिला। पायल इस पुरस्कार को जीतने वाली पहली भारतीय हैं। उनकी इस जीत से पूरा देश गदगद है। चलिए जानते हैं दुनिया भर में मशहूर संगीतकार ए आर रहमान ने पायल की जीत के बारे में क्या कुछ कहा है।
आज के युवा बुद्धिमान हैं
संगीतकार ए आर रहमान पायल कपाड़िया की जीत से काफी खुश हैं। साथ ही साथ उन्होंने कान फिल्म फेस्टिवल में भारत की मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर किया है। संगीतकार कहते हैं, 'हम किसी की प्रतिभा को एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते हैं। पायल कपाड़िया जैसे युवा भारतीय कलाकार जानते हैं कि दुनिया के सामने हमें कौन सी और कैसी कहानियां लानी है। वे बदलते समय के साथ तालमेल रखना जानते हैं। वे अब ऐसी फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं जिन्हें दुनिया देखेगी और सराहेगी'।
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भारत की सुंदर कहानियां दुनिया के सामने लाएं
गोल्डन ग्लोब के अलावा ऑस्कर और ग्रैमी जैसे पुरस्कार से सम्मानित रहमान आगे कहते हैं, 'भारत की खूबसूरत कहानियां अंतरराष्ट्रीय मान्यता की हकदार हैं। पहले लोगों को लगता था कि आर्ट फिल्में भारतीय दर्शकों के लिए नहीं है। आर्ट फिल्में सिर्फ अंतरराष्ट्रीय दर्शक और फिल्म फेस्टिवल में दिखाने के लिए बनाई जाती है, लेकिन अब वक्त बदल रहा है। पायल कपाड़िया जैसे लोग इन फिल्म फेस्टिवल में इसलिए जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अंतरराष्ट्रीय दर्शक उनकी फिल्मों को समझेंगे। अब इस सोच में भी बदलाव लाने की जरुरत है'।
बॉक्स ऑफिस पर 'मिस्टर एंड मिसेज माही' का संघर्ष जारी
लोगों के मन है 'लगान' के लिए मलाल
पिछले महीने ए आर रहमान ने कान फिल्म फेस्टिवल में रोहित गुप्ता द्वारा निर्देशित 'हेडहंटिंग टू बीट बॉक्सिंग' का अनावरण किया था। एफटीआईआई के छात्र चिदानंद एस नाइक द्वारा लिखित 'सनफ्लॉवर्स आर द फर्स्ट वन वन्स' और 'द शेमलेस' फेम अनसूया सेनगुप्ता ने कान में प्रमुख पुरस्कार जीते। अनसूया सेनगुप्ता अन सर्टेन रिगार्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। संगीतकार बीते दिनों को याद करते हुए कहते हैं, 'साल 2009 में जब ब्रिटिश फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए मुझे दो अकादमी पुरस्कारम मिले थे तब लोगों को लगा था कि मुझे 'लगान' और 'रोजा' के लिए पुरस्कार मिलना चाहिए था। जब लोगों ने ये कहा था तब मैं उनलोगों को यही समझाने की कोशिश कर रहा था कि ऐसे ही ग्रैमी और ऑस्कर नहीं मिल जाता है। एक सिस्टम होता है जिसके तहत नामांकन होता है और फिर आगे की प्रक्रिया होती है, जिससे आधे से अधिक लोग अनजान रहते हैं'।
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आज के युवा बुद्धिमान हैं
संगीतकार ए आर रहमान पायल कपाड़िया की जीत से काफी खुश हैं। साथ ही साथ उन्होंने कान फिल्म फेस्टिवल में भारत की मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर किया है। संगीतकार कहते हैं, 'हम किसी की प्रतिभा को एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते हैं। पायल कपाड़िया जैसे युवा भारतीय कलाकार जानते हैं कि दुनिया के सामने हमें कौन सी और कैसी कहानियां लानी है। वे बदलते समय के साथ तालमेल रखना जानते हैं। वे अब ऐसी फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं जिन्हें दुनिया देखेगी और सराहेगी'।
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लोगों के मन है 'लगान' के लिए मलाल
पिछले महीने ए आर रहमान ने कान फिल्म फेस्टिवल में रोहित गुप्ता द्वारा निर्देशित 'हेडहंटिंग टू बीट बॉक्सिंग' का अनावरण किया था। एफटीआईआई के छात्र चिदानंद एस नाइक द्वारा लिखित 'सनफ्लॉवर्स आर द फर्स्ट वन वन्स' और 'द शेमलेस' फेम अनसूया सेनगुप्ता ने कान में प्रमुख पुरस्कार जीते। अनसूया सेनगुप्ता अन सर्टेन रिगार्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। संगीतकार बीते दिनों को याद करते हुए कहते हैं, 'साल 2009 में जब ब्रिटिश फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए मुझे दो अकादमी पुरस्कारम मिले थे तब लोगों को लगा था कि मुझे 'लगान' और 'रोजा' के लिए पुरस्कार मिलना चाहिए था। जब लोगों ने ये कहा था तब मैं उनलोगों को यही समझाने की कोशिश कर रहा था कि ऐसे ही ग्रैमी और ऑस्कर नहीं मिल जाता है। एक सिस्टम होता है जिसके तहत नामांकन होता है और फिर आगे की प्रक्रिया होती है, जिससे आधे से अधिक लोग अनजान रहते हैं'।