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Alok Pandey: 'सीन से 10 मिनट पहले मिली पिता के निधन की खबर', अभिनेता ने बताया जिंदगी का सबसे मुश्किल पल
सार
Alok Pandey Interview: अभिनेता आलोक पांडे ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ अनुभवों को साझा किया है।
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आलोक पांडे
- फोटो : एक्स
विस्तार
'10 मिनट पहले मुझे फोन आया कि मेरे पापा का निधन हो गया है। मेरी वाइफ घर पर अकेली थी और उसी पल मुझसे कहा गया, आलोक, शॉट रेडी है, आइए।' यह कहना है सीरीज 'बिंदिया के बाहुबली' में बब्बल का किरदान निभाने वाले अभिनेता आलोक पांडे का, जिन्होंने अमर उजाला से बात करते हुए अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ अनुभवों को साझा किया।
इस दौरान उन्होंने विजय वर्मा, जॉन अब्राहम, रणवीर शौरी, सौरभ शुक्ला, जिमी शेरगिल जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव, इंडस्ट्री में स्ट्रगल, अनिश्चितताएं और पर्सनल स्ट्रगल के बारे में भी खुलकर बात की। पढ़िए बातचीत के दौरान उन्होंने क्या कुछ कहा।
किन कलाकारों के साथ काम का अनुभव यादगार रहा?
'एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' में सुशांत भाई के साथ डेढ़ महीना रांची में गुजारा। हम 3-4 दोस्त थे और सचमुच लगा कि वहीं के हैं। खेलते कूदते हुए पूरा शूट हो गया। सुशांत भाई का नेचर इतना प्यारा था कि सेट पर एकदम घर जैसा माहौल रहता था। जिमी शेरगिल सर के साथ भी अनुभव शानदार रहा। मैंने उनके साथ 'आजम' फिल्म की। सेट पर भी और ऑफ-सेट बातचीत में वे बहुत सपोर्टिव थे। ऐसा लगता था कि सिर्फ सीनियर नहीं, एक दोस्त भी हैं। मेरे लिए ये बहुत मायने रखता है कि सीनियर एक्टर्स नए लोगों को कंफर्टेबल बनाते हैं। अगर वो थोड़ा-सा भी स्पेस दे दें तो जूनियर्स खुलकर काम कर पाते हैं। ये जिम्मेदारी हम सबकी है, आज अगर हमें सीनियर बनने का मौका मिलता है, तो हमें भी नए लोगों को वही सपोर्ट देना चाहिए।
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इस दौरान उन्होंने विजय वर्मा, जॉन अब्राहम, रणवीर शौरी, सौरभ शुक्ला, जिमी शेरगिल जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव, इंडस्ट्री में स्ट्रगल, अनिश्चितताएं और पर्सनल स्ट्रगल के बारे में भी खुलकर बात की। पढ़िए बातचीत के दौरान उन्होंने क्या कुछ कहा।
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किन कलाकारों के साथ काम का अनुभव यादगार रहा?
'एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' में सुशांत भाई के साथ डेढ़ महीना रांची में गुजारा। हम 3-4 दोस्त थे और सचमुच लगा कि वहीं के हैं। खेलते कूदते हुए पूरा शूट हो गया। सुशांत भाई का नेचर इतना प्यारा था कि सेट पर एकदम घर जैसा माहौल रहता था। जिमी शेरगिल सर के साथ भी अनुभव शानदार रहा। मैंने उनके साथ 'आजम' फिल्म की। सेट पर भी और ऑफ-सेट बातचीत में वे बहुत सपोर्टिव थे। ऐसा लगता था कि सिर्फ सीनियर नहीं, एक दोस्त भी हैं। मेरे लिए ये बहुत मायने रखता है कि सीनियर एक्टर्स नए लोगों को कंफर्टेबल बनाते हैं। अगर वो थोड़ा-सा भी स्पेस दे दें तो जूनियर्स खुलकर काम कर पाते हैं। ये जिम्मेदारी हम सबकी है, आज अगर हमें सीनियर बनने का मौका मिलता है, तो हमें भी नए लोगों को वही सपोर्ट देना चाहिए।
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एम एस धोनी फिल्म
- फोटो : एक्स
कोई ऐसा मौका जब हंसता चेहरा दिखाया लेकिन अंदर से टूट गए थे?
हां, ये मेरी जिंदगी का सबसे कठिन लम्हा था। 'साहिब बीवी और गैंगस्टर' के क्लाइमेक्स की शूटिंग चल रही थी। मेरा कैरेक्टर कॉमेडी वाला था। सीन से ठीक 10 मिनट पहले मुझे फोन आया कि मेरे पापा का निधन हो गया है। मेरी वाइफ घर पर अकेली थी और मैं सेट पर था। उसी पल मुझसे कहा गया, 'आलोक, शॉट रेडी है, आइए।' मैं अंदर से टूट चुका था, लेकिन बाहर से जोर-जोर से हंसना था। मैंने पूरा कॉमेडी सीन किया। शूट खत्म होने के बाद मैंने बताया कि मुझे निकलना होगा। सुबह मैं घर पहुंचा, बहुत रोया। लेकिन उस सीन की वजह से मैं उस रात अपनी तकलीफ किसी को बता भी नहीं पाया। उसके बाद कोविड हो गया और मैं और दिनों तक अटका रहा। उस पल मुझे लगा, एक्टर की ज़िंदगी यही है। बाहर हंसना पड़ता है, अंदर चाहे कितना भी रो रहे हों।
हां, ये मेरी जिंदगी का सबसे कठिन लम्हा था। 'साहिब बीवी और गैंगस्टर' के क्लाइमेक्स की शूटिंग चल रही थी। मेरा कैरेक्टर कॉमेडी वाला था। सीन से ठीक 10 मिनट पहले मुझे फोन आया कि मेरे पापा का निधन हो गया है। मेरी वाइफ घर पर अकेली थी और मैं सेट पर था। उसी पल मुझसे कहा गया, 'आलोक, शॉट रेडी है, आइए।' मैं अंदर से टूट चुका था, लेकिन बाहर से जोर-जोर से हंसना था। मैंने पूरा कॉमेडी सीन किया। शूट खत्म होने के बाद मैंने बताया कि मुझे निकलना होगा। सुबह मैं घर पहुंचा, बहुत रोया। लेकिन उस सीन की वजह से मैं उस रात अपनी तकलीफ किसी को बता भी नहीं पाया। उसके बाद कोविड हो गया और मैं और दिनों तक अटका रहा। उस पल मुझे लगा, एक्टर की ज़िंदगी यही है। बाहर हंसना पड़ता है, अंदर चाहे कितना भी रो रहे हों।
एम एस धोनी फिल्म
- फोटो : एक्स
बुरे वक्त में आपके साथ कौन खड़ा रहा?
मेरे लिए सबसे बड़ी मिसाल विजय वर्मा हैं। हुड़दंग फिल्म में हम साथ थे। जब मेरे पापा बीमार थे, तो वही एक स्टार थे जिन्होंने मुझसे बात की, मुझे वित्तीय मदद दी। आज तक उन्होंने उस बारे में कभी बात नहीं की। मैं कहता हूं, भाई, आपने मदद की थी। तो हंसकर टाल देते हैं। वो समय बहुत कठिन था। मैं गांव में था, कोविड का माहौल था, पापा कैंसर से जूझ रहे थे। मैंने कभी उनसे मदद मांगी भी नहीं। लेकिन उन्होंने खुद आगे बढ़कर कहा, पापा का ध्यान रखना, अपनी चिंता मत करना।' उनका वो साथ मैं कभी नहीं भूल सकता। इसके अलावा जॉन सर भी थे। उन्होंने पापा की रिपोर्ट्स मंगवाईं, इलाज कराने की कोशिश की। लेकिन जब तक बात पहुंची, देर हो चुकी थी। उस वक्त उनका कहना था, 'मुंबई ले आओ, मैं दिखवा देता हूं।' लेकिन पापा ने खुद कहा कि अब हिम्मत नहीं है जाने की। ऐसे में ये लोग सिर्फ को-स्टार नहीं रहे, बल्कि परिवार जैसे लगे।
मेरे लिए सबसे बड़ी मिसाल विजय वर्मा हैं। हुड़दंग फिल्म में हम साथ थे। जब मेरे पापा बीमार थे, तो वही एक स्टार थे जिन्होंने मुझसे बात की, मुझे वित्तीय मदद दी। आज तक उन्होंने उस बारे में कभी बात नहीं की। मैं कहता हूं, भाई, आपने मदद की थी। तो हंसकर टाल देते हैं। वो समय बहुत कठिन था। मैं गांव में था, कोविड का माहौल था, पापा कैंसर से जूझ रहे थे। मैंने कभी उनसे मदद मांगी भी नहीं। लेकिन उन्होंने खुद आगे बढ़कर कहा, पापा का ध्यान रखना, अपनी चिंता मत करना।' उनका वो साथ मैं कभी नहीं भूल सकता। इसके अलावा जॉन सर भी थे। उन्होंने पापा की रिपोर्ट्स मंगवाईं, इलाज कराने की कोशिश की। लेकिन जब तक बात पहुंची, देर हो चुकी थी। उस वक्त उनका कहना था, 'मुंबई ले आओ, मैं दिखवा देता हूं।' लेकिन पापा ने खुद कहा कि अब हिम्मत नहीं है जाने की। ऐसे में ये लोग सिर्फ को-स्टार नहीं रहे, बल्कि परिवार जैसे लगे।