सीट का समीकरण: मोहम्मदाबाद में 1985 से मुख्तार परिवार का दबदबा, कृष्णानंद राय और पत्नी ने 3 बार तोड़ा तिलिस्म
गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट 1957 में अस्तिव में आई। तब यहां से दो विधायक चुने गए थे। 1962 से यहां से एक विधायक चुने जा रहे हैं। 1985 में इस सीट से मुख्तार अंसारी के भाई और सांसद अफजाल अंसारी पहली बार भाकपा के टिकट पर जीते। तब से इस सीट पर अंसारी परिवार का दबदबा है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
पहले जानते हैं मोहम्मदाबाद सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला गाजीपुर है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें- जखनियां, सैदपुर, गाजीपुर सदर, जंगीपुर, जहूराबाद, मोहम्मदाबाद और जमानिया शामिल हैं। सीट के समीकरण की कड़ी में आज हम गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट की बात करेंगे। गाजीपुर जनपद की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। उस समय मोहम्मदाबाद सीट एक द्विसदस्यीय विधानसभा क्षेत्र हुआ करती थी। इसका मतलब था कि इस एक ही क्षेत्र से दो विधायकों का चुनाव किया जाता था। 1957 के चुनाव में मोहम्मदाबाद सीट से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने क्लीन स्वीप करते हुए दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। यहां से चुनाव जीतकर सरजू पांडे और रघुबीर विधानसभा पहुंचे थे।
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें, तो यहां कुल मतदाताओं में भूमिहार और दलित आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी भूमिहार मतदाताओं की है, जो लगभग 31% हैं। इसके बाद दलित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 24% है। इसके अलावा, यादव मतदाता लगभग 14%, कुशवाहा मतदाता करीब 7% और मुस्लिम मतदाता लगभग 7% हैं। वहीं, ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 4% है, जबकि बाकी बचे अन्य मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से दो विधायक चुने गए थे। क्योंकि ये एक द्विसदस्यीय विधानसभा सीट थी। सामान्य सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सरजू पांडे विजयी हुए। चुनाव में उन्हें 27,653 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के विजय शंकर सिंह को 26,274 वोट मिले। वहीं, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रघुबीर ने जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 26,274 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के चिंतामन को 23,066 वोट मिले।
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट के 1962, 1967 और 1969 के चुनावों की बात करें, तो इन तीनों चुनावों में कांग्रेस के विजय शंकर सिंह लगातार तीन बार विजयी हुए। इस दौरान उन्होंने 1962 में सीपीआई के विजय नारायण पांडे, 1967 में सीपीआई के जगदीश और 1969 में फिर से सीपीआई के विजय नारायण को हराकर जीत दर्ज की।
1974 में पहली बार जीता भारतीय क्रांति दल, 1977 में जनता पार्टी ने मारी बाजी
इसके बाद 1974 और 1977 के विधानसभा चुनावों में राम जनम राय विजयी हुए। 1974 में उन्होंने भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की, जबकि 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। इस दौरान 1974 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के विजय शंकर सिंह को 6,786 वोटों के अंतर से हराया, वहीं 1977 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के कृष्णानंद राय को 1,993 वोटों से शिकस्त दी।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980 का चुनाव
1980 के यूपी विधानसभा चुनाव में गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के विजय शंकर सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के राम जनम राय को 13,798 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विजय शंकर सिंह को 28,002 वोट मिले, जबकि राम जनम राय को 14,204 वोट प्राप्त हुए। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के झिंगुरी 8,939 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1980 के बाद यूपी में 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 के विधानसभा चुनाव हुए। इन पांचों चुनावों में गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से अफजाल अंसारी लगातार विजयी हुए। इस दौरान उन्होंने 1985, 1989, 1991 और 1993 के चुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के टिकट पर जीत दर्ज की, जबकि 1996 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर यह सपा की पहली जीत थी।
2002: पहली बार जीती भाजपा
यूपी विधानसभा चुनाव में गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से साल 2002 में भाजपा के कृष्णानंद राय विजयी हुए। उन्होंने सपा के अफजाल अंसारी को 7,772 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कृष्णानंद राय को 61,049 वोट मिले, जबकि अफजाल अंसारी को 53,277 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बसपा के संजय 18,843 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2006 का उपचुनाव
गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर नवंबर 2005 को तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई थी। विधायक के निधन से खाली हुई इस सीट पर निर्वाचन आयोग द्वारा 2006 में उपचुनाव सी कराया गया। इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय को चुनावी मैदान में उतारा, जिन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी श्री कृष्ण उर्फ गामा राम को हराकर जीत दर्ज की थी।
2007 के चुनाव में गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से मुख्तार और अफजाल अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह अंसारी विजयी हुए। समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतरे सिबगतुल्लाह ने भारतीय जनता पार्टी की अलका राय को 3,386 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सिबगतुल्लाह अंसारी को 56,361 वोट मिले, जबकि अलका राय को 52,975 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के विजय शंकर 21,247 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2012: पहली बार जीती कौमी एकता दल
इसके बाद राज्य में साल 2012 के चुनाव हुए। इस चुनाव में मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से कौमी एकता दल के सिबगतुल्लाह अंसारी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राजेश राय को 7,333 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सिबगतुल्लाह अंसारी को 66,922 वोट मिले, जबकि राजेश राय को 59,589 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के विनोद कुमार राय 50,246 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। इस लहर का असर मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर भी दिखा, जहां भाजपा की अलका राय ने जीत दर्ज की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सिबगतुल्लाह अंसारी को 32,727 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में अलका राय को 1,22,156 वोट मिले, जबकि सिबगतुल्लाह अंसारी को 89,429 वोट प्राप्त हुए। वहीं, कांग्रेस के जनक कुमार 9,910 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सिबगतुल्लाह के बेटे को मिली जीत
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से सिबगतुल्लाह के बेटे सुहैब अंसारी विजयी हुए। समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतरे सुहैब ने भारतीय जनता पार्टी की अलका राय को 18,759 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुहैब अंसारी को 1,11,443 वोट मिले, जबकि अलका राय को 92,684 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के मन्वेंद्र राय 32,440 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।