{"_id":"6aae45768862ab9c3706e1f7","slug":"uttar-pradesh-election-2027-ghazipur-zamania-assembly-seat-history-bjp-sp-bsp-congress-political-equation-2026-09-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सीट का समीकरण: 2017 में 26 साल बाद जीती थी भाजपा, 2022 में सपा ने फिर की वापसी; ऐसा है जमानिया का चुनावी गणित","category":{"title":"Election","title_hn":"चुनाव","slug":"election"}}
सीट का समीकरण: 2017 में 26 साल बाद जीती थी भाजपा, 2022 में सपा ने फिर की वापसी; ऐसा है जमानिया का चुनावी गणित
Thu, 24 Sep 2026 07:48 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 24 Sep 2026 07:48 PM IST
सार
गाजीपुर की जमानिया विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। पहले दो चुनाव में यहां से कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा विजयी हुए। पिछले चार चुनाव में तीन अलग-अलग दलों सपा, भाजपा और बसपा को यहां से जीत मिली है। आइये जानते हैं इस सीट का चुनावी इतिहास और गणित...
विज्ञापन
जमानिया सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अब जमीन पर दिखाई देने लगी हैं। राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने से लेकर संभावित उम्मीदवारों और वोटरों के समीकरण तक पर मंथन कर रहे हैं। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
विज्ञापन
पहले जानते हैं जमानिया सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला गाजीपुर है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें- जखनियां, सैदपुर, गाजीपुर सदर, जंगीपुर, जहूराबाद, मोहम्मदाबाद और जमानिया शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट की बात करेंगे। गाजीपुर जनपद की जमानिया विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। यहां के पहले विधायक वशिष्ठ नारायण शर्मा बने थे, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
विज्ञापन
जमानिया विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
जमानिया विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें, तो यहां कुल मतदाताओं में मुस्लिम, यादव, कुशवाहा और दलित आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मुस्लिम और दलित मतदाताओं की है, जो लगभग 13-13% हैं। इसके बाद यादव और कुशवाहा मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 10-10% है। वहीं, क्षत्रिय मतदाता करीब 8% और ब्राह्मण मतदाता लगभग 6% हैं, जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
जमानिया विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
जमानिया विधानसभा सीट पर 1957 में हुए पहले चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा विजयी हुए थे। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) के विश्वनाथ सिंह गहमरी को 11,319 वोटों के अंतर से हराया था।
कांग्रेस ने दोहराई जीत
इसके बाद 1962 के चुनाव में जमानिया सीट से कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा एक बार फिर विधायक चुने गए। इस बार उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी महेंद्र प्रसाद राय को 6,916 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में वशिष्ठ नारायण शर्मा को 18,936 वोट मिले, जबकि महेंद्र प्रसाद राय को 12,020 वोट मिले।
जमानिया विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें, तो यहां कुल मतदाताओं में मुस्लिम, यादव, कुशवाहा और दलित आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मुस्लिम और दलित मतदाताओं की है, जो लगभग 13-13% हैं। इसके बाद यादव और कुशवाहा मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 10-10% है। वहीं, क्षत्रिय मतदाता करीब 8% और ब्राह्मण मतदाता लगभग 6% हैं, जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
जमानिया विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
जमानिया विधानसभा सीट पर 1957 में हुए पहले चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा विजयी हुए थे। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) के विश्वनाथ सिंह गहमरी को 11,319 वोटों के अंतर से हराया था।
कांग्रेस ने दोहराई जीत
इसके बाद 1962 के चुनाव में जमानिया सीट से कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा एक बार फिर विधायक चुने गए। इस बार उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी महेंद्र प्रसाद राय को 6,916 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में वशिष्ठ नारायण शर्मा को 18,936 वोट मिले, जबकि महेंद्र प्रसाद राय को 12,020 वोट मिले।
विज्ञापन
1967: जमानिया में पहली बार जीती भाकपा
गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से 1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राम सुंदर शास्त्री विजयी हुए। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा को 5,232 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में राम सुंदर शास्त्री को कुल 22,076 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वशिष्ठ नारायण शर्मा को 16,844 वोट मिले।
1967 के बाद राज्य में 1969 में फिर से चुनाव हुए, क्योंकि 1967 में बनी राज्य की पहली गैर-कांग्रेसी 'संविद सरकार' विधायकों के दल-बदल और आपसी खींचतान के कारण अल्पमत में आ गई थी। इसके चलते अप्रैल 1968 में विधानसभा भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और 1969 में दोबारा चुनाव कराने पड़े।
1969: कांग्रेस ने की वापसी
इस चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राम सुंदर शास्त्री को 5,467 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में वशिष्ठ नारायण शर्मा को 21,780 वोट मिले, जबकि राम सुंदर शास्त्री को 16,313 वोट मिले।
गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से 1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राम सुंदर शास्त्री विजयी हुए। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा को 5,232 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में राम सुंदर शास्त्री को कुल 22,076 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वशिष्ठ नारायण शर्मा को 16,844 वोट मिले।
1967 के बाद राज्य में 1969 में फिर से चुनाव हुए, क्योंकि 1967 में बनी राज्य की पहली गैर-कांग्रेसी 'संविद सरकार' विधायकों के दल-बदल और आपसी खींचतान के कारण अल्पमत में आ गई थी। इसके चलते अप्रैल 1968 में विधानसभा भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और 1969 में दोबारा चुनाव कराने पड़े।
1969: कांग्रेस ने की वापसी
इस चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राम सुंदर शास्त्री को 5,467 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में वशिष्ठ नारायण शर्मा को 21,780 वोट मिले, जबकि राम सुंदर शास्त्री को 16,313 वोट मिले।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1974: पहली बार जीता भारतीय क्रांति दल
इसके बाद राज्य में 1974 में चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय क्रांति दल के धरम राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा को 11,940 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में धरम राम को 30,933 वोट मिले, जबकि वशिष्ठ नारायण शर्मा को 18,993 वोट प्राप्त हुए। वहीं, शोषित समाज दल के राम जनम 7,927 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
इसके बाद राज्य में 1974 में चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय क्रांति दल के धरम राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा को 11,940 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में धरम राम को 30,933 वोट मिले, जबकि वशिष्ठ नारायण शर्मा को 18,993 वोट प्राप्त हुए। वहीं, शोषित समाज दल के राम जनम 7,927 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
1977: पहली बार जीती जनता पार्टी
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से जनता पार्टी के धरम राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम सूरत सिंह को 5,934 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में धरम राम को 23,363 वोट मिले, जबकि राम सूरत सिंह को 17,429 वोट मिले।
राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से जनता पार्टी के धरम राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम सूरत सिंह को 5,934 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में धरम राम को 23,363 वोट मिले, जबकि राम सूरत सिंह को 17,429 वोट मिले।
राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980 का चुनाव
इस चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के साहेब सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के धरम राम को 11,585 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में साहेब सिंह को 29,885 वोट मिले, जबकि धरम राम को 18,300 वोट मिले।
1985 में कांग्रेस ने मारी बाजी
1985 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जमानिया सीट से कांग्रेस के चौधरी ललता प्रसाद निषाद विजयी हुए। इस चुनाव में उन्होंने लोक दल के रवींद्र कुमार को 18,437 वोटों के अंतर से हराया।
1989: निर्दलीय ने जीता चुनाव
वहीं 1989 के चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी रवींद्र कुमार सिंह विजयी हुए। चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी साहब को 9,120 वोटों के अंतर से मात दी।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में जमानिया विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
इस चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के साहेब सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के धरम राम को 11,585 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में साहेब सिंह को 29,885 वोट मिले, जबकि धरम राम को 18,300 वोट मिले।
1985 में कांग्रेस ने मारी बाजी
1985 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जमानिया सीट से कांग्रेस के चौधरी ललता प्रसाद निषाद विजयी हुए। इस चुनाव में उन्होंने लोक दल के रवींद्र कुमार को 18,437 वोटों के अंतर से हराया।
1989: निर्दलीय ने जीता चुनाव
वहीं 1989 के चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी रवींद्र कुमार सिंह विजयी हुए। चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी साहब को 9,120 वोटों के अंतर से मात दी।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में जमानिया विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1991: पहली बार जीती भाजपा
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा की शारदा चौहान विजयी हुईं। उन्होंने जनता दल के रविंद्र कुमार सिंह यादव को 2,357 वोटों के अंतर से हराया।
1993: पहली बार जीती बसपा
1993 के चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के जयराम कुशवाहा विजयी हुए। उन्होंने भाजपा की शारदा चौहान को 29,646 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में जयराम कुशवाहा को 61,879 वोट मिले, जबकि शारदा चौहान को 32,233 वोट मिले।
1996: पहली बार जीती सपा
इस विधानसभा चुनाव में जमानिया सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के कैलाश विजयी हुए। उन्होंने भाजपा की शारदा चौहान को 6,987 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में कैलाश को 53,504 वोट मिले, जबकि शारदा चौहान को 46,517 वोट मिले।
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा की शारदा चौहान विजयी हुईं। उन्होंने जनता दल के रविंद्र कुमार सिंह यादव को 2,357 वोटों के अंतर से हराया।
1993: पहली बार जीती बसपा
1993 के चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के जयराम कुशवाहा विजयी हुए। उन्होंने भाजपा की शारदा चौहान को 29,646 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में जयराम कुशवाहा को 61,879 वोट मिले, जबकि शारदा चौहान को 32,233 वोट मिले।
1996: पहली बार जीती सपा
इस विधानसभा चुनाव में जमानिया सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के कैलाश विजयी हुए। उन्होंने भाजपा की शारदा चौहान को 6,987 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में कैलाश को 53,504 वोट मिले, जबकि शारदा चौहान को 46,517 वोट मिले।
2002: सपा ने दोहराई जीत
इसके बाद राज्य में साल 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के कैलाश विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अरुण को 8,288 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कैलाश को 50,379 वोट मिले, जबकि अरुण को 42,091 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अशोक कुमार 30,353 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2007: जमानिया में बहुजन समाज पार्टी ने की वापसी
2007 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो जमानिया विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में बहुजन समाज पार्टी के राज कुमार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के कैलाश को 968 वोटों के कम अंतर से हराया। चुनाव में राज कुमार को 42,408 वोट मिले, जबकि कैलाश को 41,440 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के अरुण 40,208 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2012: समाजवादी पार्टी ने फिर की वापसी
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उमाशंकर कुशवाहा को 29,440 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश को 83,407 वोट मिले, जबकि उमाशंकर कुशवाहा को 53,967 वोट मिले। वहीं, कौमी एकता दल के आसिफ 42,784 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इसके बाद राज्य में साल 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के कैलाश विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अरुण को 8,288 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कैलाश को 50,379 वोट मिले, जबकि अरुण को 42,091 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अशोक कुमार 30,353 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2007: जमानिया में बहुजन समाज पार्टी ने की वापसी
2007 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो जमानिया विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में बहुजन समाज पार्टी के राज कुमार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के कैलाश को 968 वोटों के कम अंतर से हराया। चुनाव में राज कुमार को 42,408 वोट मिले, जबकि कैलाश को 41,440 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के अरुण 40,208 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2012: समाजवादी पार्टी ने फिर की वापसी
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उमाशंकर कुशवाहा को 29,440 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश को 83,407 वोट मिले, जबकि उमाशंकर कुशवाहा को 53,967 वोट मिले। वहीं, कौमी एकता दल के आसिफ 42,784 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
1991 के बाद भाजपा ने 2017 में जीता चुनाव
2017 के चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट पर 1991 के बाद भाजपा की वापसी हुई। चुनाव में भाजपा की सुनीता विजयी हुईं। उन्होंने बसपा के अतुल कुमार राय को 9,264 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुनीता सिंह को 76,823 वोट मिले, जबकि अतुल कुमार राय को 67,559 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश 49,557 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 में सपा ने जीता चुनाव
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश ने वापसी करते हुए चुनाव में जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सुनीता सिंह को 22,456 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश सिंह को 94,695 वोट मिले, जबकि सुनीता सिंह को 72,239 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद यूसुफ अली खान 53,303 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017 के चुनाव में जमानिया विधानसभा सीट पर 1991 के बाद भाजपा की वापसी हुई। चुनाव में भाजपा की सुनीता विजयी हुईं। उन्होंने बसपा के अतुल कुमार राय को 9,264 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुनीता सिंह को 76,823 वोट मिले, जबकि अतुल कुमार राय को 67,559 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश 49,557 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 में सपा ने जीता चुनाव
इस चुनाव में गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश ने वापसी करते हुए चुनाव में जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सुनीता सिंह को 22,456 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश सिंह को 94,695 वोट मिले, जबकि सुनीता सिंह को 72,239 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद यूसुफ अली खान 53,303 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।