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LS Polls: TMC ने चुनाव आयोग से की पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की शिकायत, चुनाव में हस्तक्षेप करने का लगाया आरोप
Thu, 18 Apr 2024 01:07 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा झा
Updated Thu, 18 Apr 2024 01:07 PM IST
सार
चुनाव प्रचार थमने के बाद राज्यपाल के चुनाव क्षेत्र कूच बिहार के दौरे के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है।
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चुनाव आयोग
- फोटो : ANI
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विस्तार
19 अप्रैल को पहले चरण का लोकसभा चुनाव होना है। चुनाव से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार थम गया है। लेकिन चुनाव प्रचार थमने के बाद राज्यपाल के चुनाव क्षेत्र कूच बिहार के दौरे के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लेकर चुनाव आयोग पहुंचे। टीएमसी का कहना है कि राज्यपाल आगामी लोकसभा चुनाव में बार-बार हस्तक्षेप कर रहे हैं। मौन अवधि के दौरान और मतदान के दिन चुनाव क्षेत्रों का दौरा करने का प्रयास कर रहे हैं। टीएमसी ने इस बात पर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
बता दें बंगाल में 19 अप्रैल को कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी सीटों पर चुनाव होना है। इन सीटों पर चुनाव के 48 घंटे पहले बुधवार शाम 6 बजे से प्रचार थम गया है।
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18-19 अप्रैल को राज्यपाल का कूचबिहार का दौरा था प्रस्तावित
पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में राज्यपाल सीवी आनंद बोस का 18 और 19 अप्रैल का दौरा प्रस्तावित था। लेकिन चुनाव प्रचार थमने के बाद उनके इस प्रस्तावित दौरे का रद्द करने के लिए चुनाव आयोग ने सलाह दी थी। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग का मानना है कि ऐसे में यह प्रस्तावित दौरा नहीं किया जा सकता है। आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के तहत राज्यपाल के लिए कोई भी स्थानीय कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता है।
चुनाव प्रबंधन होगा प्रभावित: चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि 18 और 19 अप्रैल के दौरान पूरा जिला प्रशासन और पुलिस बल चुनाव प्रबंधन में व्यस्त रहेगा। इस दौरान राज्यपाल की यात्रा से जिला प्रशासन और पुलिस बल भी प्रभावित हो जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत कूच बिहार के लिए चुनावी शोर 17 अप्रैल शाम 6 बजे से थमने का नियम लागू हो गया है। अब यहां चुनाव अधिकारियों की ओर से कई प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।
निष्पक्ष मतदान के लिए आवश्यक
चुनाव आयोग द्वारा समस्त जिला चुनाव अधिकारी और जिला पुलिस प्रमुख को यह स्पष्ट आदेश दिए हैं कि सभी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति, प्रचारक और राजनीतिक कार्यकर्ता, जो उस चुनाव क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं, चुनाव प्रचार थमने के साथ ही वहां तुरंत बाहर निकल जाएं। इसको सुनिश्चित करें। चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष तौर पर संपन्न कराने के लिए यह आवश्यक है।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लेकर चुनाव आयोग पहुंचे। टीएमसी का कहना है कि राज्यपाल आगामी लोकसभा चुनाव में बार-बार हस्तक्षेप कर रहे हैं। मौन अवधि के दौरान और मतदान के दिन चुनाव क्षेत्रों का दौरा करने का प्रयास कर रहे हैं। टीएमसी ने इस बात पर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
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बता दें बंगाल में 19 अप्रैल को कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी सीटों पर चुनाव होना है। इन सीटों पर चुनाव के 48 घंटे पहले बुधवार शाम 6 बजे से प्रचार थम गया है।
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18-19 अप्रैल को राज्यपाल का कूचबिहार का दौरा था प्रस्तावित
पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में राज्यपाल सीवी आनंद बोस का 18 और 19 अप्रैल का दौरा प्रस्तावित था। लेकिन चुनाव प्रचार थमने के बाद उनके इस प्रस्तावित दौरे का रद्द करने के लिए चुनाव आयोग ने सलाह दी थी। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग का मानना है कि ऐसे में यह प्रस्तावित दौरा नहीं किया जा सकता है। आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के तहत राज्यपाल के लिए कोई भी स्थानीय कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता है।
चुनाव प्रबंधन होगा प्रभावित: चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि 18 और 19 अप्रैल के दौरान पूरा जिला प्रशासन और पुलिस बल चुनाव प्रबंधन में व्यस्त रहेगा। इस दौरान राज्यपाल की यात्रा से जिला प्रशासन और पुलिस बल भी प्रभावित हो जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत कूच बिहार के लिए चुनावी शोर 17 अप्रैल शाम 6 बजे से थमने का नियम लागू हो गया है। अब यहां चुनाव अधिकारियों की ओर से कई प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।
निष्पक्ष मतदान के लिए आवश्यक
चुनाव आयोग द्वारा समस्त जिला चुनाव अधिकारी और जिला पुलिस प्रमुख को यह स्पष्ट आदेश दिए हैं कि सभी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति, प्रचारक और राजनीतिक कार्यकर्ता, जो उस चुनाव क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं, चुनाव प्रचार थमने के साथ ही वहां तुरंत बाहर निकल जाएं। इसको सुनिश्चित करें। चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष तौर पर संपन्न कराने के लिए यह आवश्यक है।