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Hindi News ›   Election ›   Kerala: RSS-BJP's decades old wish fulfilled; Strong possibility of third force between UDF-LDF

Kerala: कामयाब रही पीएम मोदी की योजना, RSS-BJP की दशकों पुरानी मुराद पूरी; UDF-LDF के बीच तीसरी ताकत के संकेत

Thu, 06 Jun 2024 05:58 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, तिरुवनंतपुरम।
अमर उजाला नेटवर्क, तिरुवनंतपुरम। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 06 Jun 2024 05:58 AM IST
सार

Kerala: केरल में भाजपा का मत प्रतिशत ही नहीं बढ़ा है, बल्कि पार्टी ने त्रिशूर में जीत के साथ दो अन्य सीटों पर अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर भी दी है। तिरुअनंतपुरम सीट पर केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर कांग्रेस के शशि थरूर से करीब 16 हजार मतों के अंतर से चूक गए।

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Kerala: RSS-BJP's decades old wish fulfilled; Strong possibility of third force between UDF-LDF
सुरेश गोपी - फोटो : एएनआई

विस्तार

केरल की पथरीली जमीन पर कमल खिलाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना कामयाब रही। त्रिशूर से सुरेश गोपी के जीतते ही भाजपा के साथ संघ की दशकों पुरानी मुराद भी पूरी हो गई। अहम राज्य की इस इकलौती सफलता आम चुनाव में कई राज्यों से मिले गहरे घाव से जूझ रही भाजपा के लिए मरहम की तरह है। इस जीत ने राज्य में दशकों से संघर्षरत संघ की कमल न खिलाने की टीस को भी कम किया है।

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केरल में भाजपा का मत प्रतिशत ही नहीं बढ़ा है, बल्कि पार्टी ने त्रिशूर में जीत के साथ दो अन्य सीटों पर अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर भी दी है। तिरुअनंतपुरम सीट पर केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर कांग्रेस के शशि थरूर से करीब 16 हजार मतों के अंतर से चूक गए। वहीं, अंतिगल सीट पर केंद्रीय मंत्री के मुरलीधरन तीन लाख से अधिक वोट पाने में कामयाब रहे। इस सूबे में बेहतर प्रदर्शन के लिए भाजपा ने इस बार सारी ताकत झोंकी। राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले मोदी ने राज्य के कई मंदिरों का दौरा किया। ईसाई मिशनरियों के साधने की कवायद हुई। चुनाव में मोदी ने चार रैलियों को संबोधित करने के अलावा पलक्कड़ में रोड शो भी किया।
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मोदी की रणनीति से बदली फिजा
2014 से पूर्व तक भाजपा की कमजोर स्थिति के कारण संघ के कार्यकर्ता वाम दलों के खिलाफ कांग्रेस के पाले में जाने पर मजबूर थे। पीएम बनने के बाद मोदी ने राज्य में पार्टी को अपने दम पर खड़ा करने की योजना बनाई। पार्टी नई रणनीति और नए चेहरों के साथ मैदान में उतरी। संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। इसके कारण पहली बार 2016 में विधानसभा में भाजपा का खाता खुला था।
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इसलिए अहम
सदियों पुराने प्राचीन हिंदू मंदिरों वाले इस राज्य में संघ दशकों से हिंदुत्व के लिए धर्मांतरण, मिशनरियों और आतंकी विचारधारा के खिलाफ संघर्ष करता रहा है। वाम दलों से संघर्ष में अब तक संघ और भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता भेंट चढ़े हैं। दक्षिण का यह राज्य सदियों से सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के एक होने का संदेश देता है। भाजपा भी अपने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा के लिए इस सूबे को अहम मानती है।

मजबूत संदेश
भले ही भाजपा को राज्य की 20 में से एक ही सीट पर जीत हासिल हुई है, लेकिन इस जीत ने वाम दलों की अगुवाई वाले एलडीएफ और कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ को तीसरी ताकत की उदय का मजबूत संदेश दिया है। केंद्र में अपने दम पर 2014 में बहुमत हासिल करने के बाद राज्य में भाजपा की ताकत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 10 वर्षों में वोट प्रतिशत में छह फीसदी की बढ़ोतरी इसके संकेत हैं।

आगे अभी चुनौतियां बाकी
राज्य में हिंदू आबादी 55 फीसदी है। इनमें एझावा और नायर समुदाय की हिस्सेदारी क्रमश: 23 और 14 फीसदी है, जबकि दलित नौ फीसदी हैं। पार्टी को बहुसंख्यक हिंदू आबादी में प्रभाव बढ़ाने वाले इन्हीं बिरादरी के नेताओं को खड़ा करना होगा। इसके अलावा धर्मांतरण से त्रस्त ईसाई समुदाय को अपने पक्ष में करने की मुहिम भी चलानी होगी।

कांग्रेस ने खोया वाम दलों से अधिक वोट शेयर
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने दावा किया है कि इस आम चुनाव में 2019 के मुकाबले केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को महज एक फीसदी वोट शेयर का नुकसान झेलना पड़ा है। माकपा के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने बुधवार को कहा कि एलडीएफ के मुकाबले राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने वोटों का पांच प्रतिशत गंवाया है। उन्होंने जीत और हार होती रहेंगी कहते हुए इस दक्षिणी राज्य में वाम सरकार संकट में होने की बात पूरी तरह से नकार दी। गोविंदन ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि आप गणित लगा लीजिए। त्रिशूर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने 80,000 से अधिक वोट गंवा दिए और यहां भाजपा को खाता खोलने का मौका मिला। केरल की 20 सीटों में से कांग्रेस ने 14, आईयूएमएल ने 2, माकपा, भाजपा, आरएसपी और केरल कांग्रेस ने एक-एक सीट जीती हैं।

आत्मनिरीक्षण कर जांचेंगे हार की वजह : राज्य में पार्टी को एक सीट मिलने पर गोविंदन ने कहा कि पार्टी और एलडीएफ आत्मनिरीक्षण कर जांचेंगे कि उन्हें हार का सामना क्यों करना पड़ा और केरल में फिर से पकड़ बनाने के लिए सही कदम उठाएंगे। गोविंदन ने कहा कि एलडीएफ यह भी जांचेगा कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा का वोट शेयर कैसे बढ़ा।


सुरेश गोपी से मुरलीधरन की हार के बाद कांग्रेस में कलह
त्रिशूर सीट पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता के मुरलीधरन की करारी हार के कारण पार्टी की राज्य इकाई में विवाद शुरू हो गया। उनकी अप्रत्याशित हार के लिए बुधवार को जिला नेतृत्व की आलोचना करते हुए पोस्टर लगाए गए। मुरलीधरन ने मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे और कुछ समय के लिए सार्वजनिक जीवन से दूर रहेंगे। केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर और पीके कुन्हालीकुट्टी सहित यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के कई वरिष्ठ नेताओं ने मुरलीधरन से अपील करते हुए कहा कि इस हार से निराश न हों। मंगलवार को घोषित परिणामों में भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी ने जीत हासिल की। भाकपा के सुनील कुमार दूसरे स्थान पर रहे, जबकि मुरलीधरन तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 3,28,124 वोट मिले। 

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