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Amethi: अमेठी में कांग्रेस की जातिगत समीकरण और जनता के सहारे चोट देने की तैयारी, गांधी परिवार ने संभाला मोर्चा

Tue, 07 May 2024 09:48 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 07 May 2024 09:48 PM IST
सार

प्रियंका गांधी ने अमेठी और रायबरेली दोनों क्षेत्र में हाई प्रोफाइल प्रचार की योजना बनाई है। इस प्रचार अभियान में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भी जाने की योजना है।

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Amethi Congress to attack with the help of caste equations and public support Gandhi family takes charge
LS Polls - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजनीति में शह-मात न हो तो फिर क्या हो? कुछ यही अमेठी लोकसभा सीट की किस्मत में है। 2019 के चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनाव हराया था। इस बार राहुल गांधी अमेठी की बजाय रायबरेली से प्रत्याशी हैं। अमेठी से नेहरू-गांधी परिवार के करीबी और रायबरेली में सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा प्रत्याशी हैं। किशोरी लाल शर्मा के बहाने अमेठी में 'चिड़िया से बाज लड़ाने' की तैयारी कर रही है। इसका जिम्मा खुद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने संभाला है। प्रियंका गांधी की टीम ने अमेठी में डेरा डाल दिया है और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत अन्य ने प्रचार अभियान में जान फूंकने की मंजूरी दे दी है।

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प्रियंका गांधी ने अमेठी और रायबरेली दोनों क्षेत्र में हाई प्रोफाइल प्रचार की योजना बनाई है। इस प्रचार अभियान में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भी जाने की योजना है। अमेठी और राय बरेली में प्रचार की रणनीति तैयार करने में खुद अनुभवी किशोरी लाल शर्मा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। शर्मा अमेठी में 1980 के दशक से सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने अभी से क्षेत्र में डेरा डाल दिया है। विवेक पाठक कहते हैं कि रायबरेली में बड़े अंतर से जीतेंगे और अमेठी में विशेष तौर से जीतेंगे।
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क्यों है कांग्रेस को इतना बड़ा भरोसा?
कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख रणनीतिकार ने इस भरोसे का कारण अमेठी की जनता को बताया। सूत्र का कहना है कि अमेठी में इस बार का चुनाव वहां की जनता लड़ रही है। यह जनता विधानसभा चुनाव में सपा या भाजपा को वोट देती है, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी का चयन सोच-समझकर करती है। इस बार जनता से मुकाबले में भाजपा की उम्मीदवार स्मृति ईरानी हैं।
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कांग्रेस नेता शैलेंद्र शुक्ला कहते हैं कि पिछले पांच साल तक स्मृति ईरानी लगातार एक खास वर्ग की मंडली से घिरी रहीं। इस मंडली के कारण स्मृति ईरानी का फोकस कामकाज पर कम ही रहा। इसका अमेठी के एक वर्ग विशेष ने लाभ उठाया। इसलिए ईरानी के खिलाफ इस बार सांसद विरोधी लहर है।

राकेश मौर्या का कहना है कि तिलोई या आसपास के क्षेत्र में स्मृति ईरानी हर कार्यक्रम में गजाधर सिंह और उनके पुत्र विवेक विक्रम सिंह के साथ मंच साझा करती थीं। स्मृति ईरानी के स्नेह और छाया में ही विवेक विक्रम सिंह निर्विरोध जिला को-ऑपरेटिव बैंक का अध्यक्ष बन पाए थे। लेकिन अभी हाल में एक कार्यक्रम में स्मृति ईरानी ने सार्वजनिक रूप से पिता और पुत्र दोनों को मंच से उतरकर नीचे जाने के लिए कह दिया था। बताते हैं, कही न कहीं स्मति ईरानी भी जमीन पर जनता की नाराजगी को समझ रही है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।  

क्या है प्रियंका गांधी का प्लान?
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार के लिए 10 दिन से अधिक समय तक वहां रहने का निर्णय लिया है। करीब 300 कार्यकर्ताओं की टीम ने अमेठी, तो 350 के करीब कार्यकर्ताओं की रायबरेली में टोली बनी है। हर दिन 20-22 नुक्कड़ सभाएं, जनता तक कांग्रेस का प्रचार, जनसभा, रोड-शो सब करने की योजना है। चुनाव प्रचार की रणनीतिक के लिए हर दिन मीटिंग प्रत्सावित है। राहुल गांधी भी अमेठी में प्रचार करने जाएंगे। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी पार्टी प्रत्याशियों के लिए के बीच में जाएंगी। संदीप सिंह समेत प्रियंका गांधी की टीम के तमाम सदस्यों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी हैं। 


कांग्रेस नेता विवेक पाठक कहते हैं कि यहां 34 फीसदी से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग हैं और मुकाबला दिलचस्प होगा। राजेश कुमार सरोज अमेठी से हैं। राजेश कहते हैं कि स्मृति ईरानी के साथ जिले के बड़े ठाकुर नेता हैं। ब्राह्मणों की जगह कम है। इसलिए अगर यह लड़ाई ब्राह्मण बनाम ठाकुर में बदली, तो स्मृति ईरानी को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। क्योंकि अमेठी में 20 फीसदी अल्पसंख्यक मतदाता हैं। 18 फीसदी ब्राह्मण, 12 फीसदी क्षत्रिय हैं। सबसे अधिक 34 फीसदी ओबीसी, 26 फीसदी दलित हैं। जातियों का यह खेल इस बार भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है, क्योंकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रही हैं।

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