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क्या है वियना संधि, जिसके आधार पर ICJ ने कुलभूषण मामले में सुनाया फैसला

Thu, 18 Jul 2019 10:05 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया रत्नप्रिया, नई दिल्ली
रत्नप्रिया, नई दिल्ली Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Thu, 18 Jul 2019 10:05 PM IST
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What is Vienna Convention and ICJ, Know rules which will decide verdict on Kulbhushan Jadhav case
kulbhushan jadhav

पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव पर अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) का फैसला आ चुका है। बुधवार को आईसीजे ने पाकिस्तान सैन्य अदालत द्वारा जाधव को दी गई फांसी की सजा पर रोक लगा दी और पाकिस्तान को इस फैसले की समीक्षा करने का निर्देश दिया। साथ ही जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस देने का भी निर्देश दिया। आईसीजे के जजों ने माना कि पाकिस्तान ने वियना संधि (Vienna Convention) का उल्लंघन किया है। आईसीजे में पाकिस्तान पर भारत की यह एक बड़ी जीत है।


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पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव पर अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) का फैसला आ चुका है। बुधवार को आईसीजे ने पाकिस्तान सैन्य अदालत द्वारा जाधव को दी गई फांसी की सजा पर रोक लगा दी और पाकिस्तान को इस फैसले की समीक्षा करने का निर्देश दिया। साथ ही जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस देने का भी निर्देश दिया। आईसीजे के जजों ने माना कि पाकिस्तान ने वियना संधि (Vienna Convention) का उल्लंघन किया है। आईसीजे में पाकिस्तान पर भारत की यह एक बड़ी जीत है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुलभूषण जाधव का मामला जिस वियना संधि पर टिका है, वह दरअसल है क्या? इस संधि की शुरुआत क्यों हुई और इसके तहत क्या नियम बनाए गए हैं? आखिर पाकिस्तान वियना संधि के किस नियम का उल्लंघन कर रहा है? क्या आपको पता है कि जिस अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में इस मामले की सुनवाई हुई, वह क्या है? इसका काम क्या है? 



इन सभी सवालों के जवाब हम आपको बता रहे हैं...

कब और क्यों हुई वियना संधि

सबसे पहले वर्ष 1961 में आजाद और संप्रभु देशों के बीच आपसी राजनयिक संबंधों को लेकर वियना संधि हुई थी। इसके तहत ऐसी अंतरराष्ट्रीय संधि का प्रावधान किया गया, जिसमें राजनयिकों को विशेष अधिकार दिए गए। इस संधि के दो साल बाद 1963 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इससे मिलती-जुलती एक और संधि का प्रावधान किया, जिसे ‘वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस’ कहा गया। इसका ड्राफ्ट इंटरनेशनल लॉ कमीशन ने तैयार किया था। इसे 1964 में लागू किया गया और तभी वियना संधि पूरी तरह से अस्तित्व में आई।

कितने देश मानते हैं इस संधि को

फरवरी 2017 तक इस संधि पर दुनिया भर के कुल 191 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं। वहीं, ‘वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस’ पर अब तक 179 देशों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति दी है। भारत और पाकिस्तान भी इनमें शामिल हैं। इस संधि के तहत कुल 85 आर्टिकल हैं। भारत ने जाधव का मामला इसी संधि के तहत उठाया है।

क्या हैं वियना संधि के नियम

इस संधि के तहत कुल 85 अनुच्छेदों (आर्टिकल्स) का प्रावधान किया गया है। इसमें जिन प्रमुख बातों का प्रावधान है, वो हैं- 
  • इस संधि के तहत मेजबान देश अपने यहां रहने वाले दूसरे देशों के राजनयिकों को विशेष दर्जा देता है।
  • इस संधि के प्रमुख प्रावधानों के तहत कोई भी देश दूसरे देश के राजनयिकों को किसी भी कानूनी मामले में गिरफ्तार नहीं कर सकता है। न ही उन्हें किसी तरह की हिरासत में रखा जा सकता है। 
  • राजनयिक के ऊपर मेजबान देश में किसी तरह का कस्टम टैक्स नहीं लगा सकता है।
  • इस संधि के आर्टिकल 31 के मुताबिक मेजबान देश दूसरे देश के दूतावास में नहीं घुस सकता। लेकिन मेजबान देश को उस दूतावास की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी होगी। 
  • आर्टिकल 36 के अनुसार अगर कोई देश किसी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार करता है, तो संबंधित देश के दूतावास को तुरंत इसकी जानकारी देनी होगी। 
  • वियना संधि के आर्टिकल 5 में पांच कामों को लिस्ट किया गया है। इनमें मेजबान देश में अपने देश और नागरिकों के हितों की रक्षा करना। साथ ही आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक रिश्तों को दो देशों के बीच कायम रखना है।

भारत और पाकिस्तान किन नियमों के आधार पर रख रहे हैं अपनी-अपनी मांगें

  • गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिक के आग्रह पर मेजबान देश की पुलिस को संबंधित दूतावास या राजनयिक को फैक्स करके इसकी सूचना भी देनी पड़ेगी। इस फैक्स में पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति का नाम, गिरफ्तारी की जगह और वजह भी बतानी होगी। (भारत ने आईसीजे में इसी आर्टिकल 36 के प्रावधानों का हवाला देते हुए जाधव का मामला उठाया। विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा करने की मांग भी इसी संधि के तहत उठाई गई थी।)
     
  • इस संधि में यह भी प्रावधान है कि राष्ट्रीय सुरक्षा (जासूसी या आतंकवाद) के मामलों में गिरफ्तार विदेशी नागरिक को राजनयिक पहुंच नहीं भी दी जा सकती है। खासकर तब जब दो देशों ने इस मसले पर कोई आपसी समझौता कर रखा हो। (बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2008 में इसी तरह का एक समझौता हुआ था। पाकिस्तान इसी समझौते का बहाना बनाकर जाधव को राजनयिक पहुंच देने से इनकार करता रहा है)

क्या है अंतराराष्ट्रीय न्याय अदालत (ICJ), क्यों हुई इसकी स्थापना

अंतरराष्ट्रीय अदालत, हेग
अंतरराष्ट्रीय अदालत, हेग - फोटो : PTI
  • अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत या अंतरराष्ट्रीय अदालत यूनाइटेड नेशंस (UN) का प्रमुख न्यायिक अंग है। 
  • अंतरराष्ट्रीय विवादों के निपटारों के लिए इस न्यायालय की स्थापना की बात हेग कन्वेंशन के दौरान 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में उठी थी। 
  • इसकी बुनियाद 1945 में पड़ी। 1946 में परमानेंट कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल जस्टिस (PCIJ) के भंग होने के आईसीजे ने इसका स्थान ले लिया। 
  • 18 अप्रैल, 1946 को आईसीजे का उद्घाटन अधिवेशन बुलाया गया।
  • दो देशों के बीच के विवाद सुलझाने वाला यह न्यायालय नीदरलैंड के हेग शहर में स्थित है। वहां पीस पैलेस में यह न्यायालय संचालित होता है।
  • आईसीजे में निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।
  • आईसीजे में सामान्य सभा द्वारा 15 न्यायाधीश चुने जाते हैं। 
  • इनका कार्यकाल नौ साल का होता है। लेकिन हर तीसरे साल इन 15 न्यायाधीशों में से पांच चुने जा सकते हैं। 
  • कोई भी दो न्यायाधीश एक ही राष्ट्र के नहीं हो सकते हैं। 
  • किसी न्यायाधीश की मृत्यु हो जाने पर उनकी जगह किसी समदेशी को दी जाती है। 
  • किसी एक न्यायाधीश को हटाने के लिए बाकी न्यायाधीशों का सर्वसम्मत निर्णय जरूरी है। 

क्या है कुलभूषण जाधव का मामला 

कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं। पाकिस्तान की सैनिक अदालत ने उन्हें जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है। पाकिस्तान का आरोप है कि कुलभूषण जासूस हैं। वहीं,  भारत कहता है कि पाकिस्तान ने जाधव का ईरान से अपहरण किया। भारत ने पाकिस्तान के इस एकतरफा फैसले को आईसीजे में चुनौती दी थी।
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