NTA Reform: एनटीए को खत्म नहीं, मजबूत करना जरूरी; पूर्व UGC चेयरमैन ने बताया कहां हो रही चूक, सुझाए ये रास्ते
NTA Reform: एनटीए की परीक्षा व्यवस्था में बार-बार सामने आ रही सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच पूर्व यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने एजेंसी को खत्म करने के बजाय उसमें गहरे संरचनात्मक सुधार की जरूरत बताई है। उन्होंने परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया।
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NTA Reform: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को परीक्षा सुरक्षा से जुड़ी बार-बार सामने आ रही चिंताओं से निपटने के लिए बड़े संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है। हालांकि, एजेंसी को पूरी तरह बदल देना इसका सबसे उपयोगी समाधान नहीं हो सकता। यह बात पूर्व यूजीसी चेयरमैन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की समीक्षा समिति के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने कही है।
पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को सिर्फ प्रश्नपत्र की सुरक्षा की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा से जुड़ी चुनौती है। एनटीए जिस बड़े स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है, उसे देखते हुए इसमें कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
NTA की परीक्षा व्यवस्था में चुनौती कितनी बड़ी है?
कुमार के अनुसार एनटीए हर साल एक करोड़ से अधिक उम्मीदवारों वाली परीक्षाएं आयोजित करता है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा की सुरक्षा केवल प्रश्नपत्र को सुरक्षित रखने से तय नहीं होती। इस पूरी व्यवस्था में कई पक्ष शामिल होते हैं:
- विषय विशेषज्ञ
- डिजिटल सिस्टम
- प्रश्नपत्र की छपाई
- परिवहन और भंडारण
- परीक्षा केंद्र
- निरीक्षक
- विभिन्न सेवा प्रदाता
इनमें से हर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। किसी एक स्तर पर भी कमजोरी पूरी परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
पेपर लीक को केवल प्रश्नपत्र की समस्या क्यों नहीं माना जा सकता?
कुमार ने कहा कि बार-बार सामने आने वाली पेपर लीक की घटनाओं को ‘एंड-टू-एंड परीक्षा सुरक्षा चुनौती’ के रूप में देखना चाहिए। इसका मतलब है कि प्रश्न तैयार होने से लेकर परीक्षा के बाद परिणाम तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी और सुरक्षा जरूरी है।
राधाकृष्णन समिति ने भी पूरी परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा की थी। समिति ने मजबूत मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), बेहतर डेटा सुरक्षा, जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय की सिफारिश की थी। कुमार के मुताबिक सरकार और एनटीए ने इन सिफारिशों के आधार पर कई कदम उठाए हैं।
परीक्षा सुरक्षा के लिए कौन से कदम जरूरी हैं?
कुमार ने लंबे समय के लिए लगातार जोखिम का आकलन करने और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच रखने वाले लोगों की संख्या कम करने पर जोर दिया। उनके अनुसार:
- संवेदनशील सामग्री को संभालने वाले लोगों की संख्या सीमित हो।
- हर स्तर पर डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था हो।
- हर चरण में स्वतंत्र जांच हो।
- गोपनीय सामग्री तक पहुंच सख्त नियंत्रण में हो।
- प्रश्नपत्र की हर पहुंच और बदलाव का सुरक्षित रिकॉर्ड तैयार हो।
उनका कहना है कि इन उपायों से परीक्षा में सेंध लगाना धीरे-धीरे काफी मुश्किल बनाया जा सकता है और छात्रों का भरोसा भी कायम रखा जा सकता है।
क्या NTA पर बहुत ज्यादा परीक्षाओं का बोझ है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या एनटीए बहुत ज्यादा परीक्षाएं आयोजित करने के कारण दबाव में है, तो कुमार ने कहा कि एजेंसी का कामकाज बहुत बड़ा है। लेकिन केवल परीक्षाओं की संख्या के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि एनटीए पर जरूरत से ज्यादा बोझ है। उनके मुताबिक असली चुनौती हर परीक्षा के पीछे मौजूद जटिल व्यवस्था है।
उन्होंने राधाकृष्णन समिति के उस साझेदारी मॉडल का भी जिक्र किया, जिसमें परीक्षा कराने के लिए जिम्मेदारी मांगने वाले मंत्रालय, नियामक या संस्थान को पाठ्यक्रम, विषय विशेषज्ञ, प्रश्नों की गुणवत्ता और अकादमिक सत्यापन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
वहीं एनटीए को सुरक्षित परीक्षा मंच, परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क, उम्मीदवारों का सत्यापन, परीक्षा संचालन और परिणाम तैयार करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
क्या अलग-अलग परीक्षाओं के लिए अलग एजेंसियां बननी चाहिए?
कुमार ने कहा कि केवल एनटीए का दिखाई देने वाला काम कम करने के लिए कई अलग-अलग एजेंसियां बनाना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार एक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था होने से सुरक्षा मानकों, तकनीक, उम्मीदवारों से जुड़ी सेवाओं और परिणाम प्रक्रिया में एकरूपता बनाए रखने में मदद मिलती है। कई नई एजेंसियां बनाने से लागत दोहराई जा सकती है और अलग-अलग एजेंसियों में सुरक्षा के मानक भी अलग हो सकते हैं।
परीक्षा व्यवस्था में किन सभी चरणों की समीक्षा जरूरी है?
कुमार ने कहा कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की समग्र समीक्षा होनी चाहिए। इसमें केवल प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि कई चरण शामिल होने चाहिए।
- प्रश्न तैयार करना
- अनुवाद
- प्रश्नों की समीक्षा
- डिजिटल भंडारण
- प्रश्नपत्र की छपाई या डिजिटल माध्यम से भेजना
- परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना
- परीक्षा केंद्रों पर निगरानी
उन्होंने कहा कि हर बार जब जिम्मेदारी या सामग्री एक व्यक्ति या व्यवस्था से दूसरी जगह जाती है, तो उसकी पूरी ट्रैकिंग और सख्त पहुंच नियंत्रण होना चाहिए।
एनटीए को खत्म करने के बजाय मजबूत करने की बात क्यों?
कुमार के मुताबिक एनटीए के पास पहले से परीक्षा आयोजन का अनुभव, तकनीक, पुराने परीक्षा रिकॉर्ड और देशभर में परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क मौजूद है। इसलिए इस व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इसमें सुधार करना ज्यादा उपयोगी होगा।
उन्होंने साफ कहा कि एनटीए को गहरे संरचनात्मक सुधार की जरूरत है, लेकिन पूरी संस्था को बदल देना सबसे उपयोगी समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने बताया कि करीब 600 विशेषज्ञों के नए सिरे से चयन, नए विशेषज्ञों को जोड़ने और चार स्तरों वाली प्रश्नपत्र जांच व्यवस्था की शुरुआत महत्वपूर्ण कदम हैं।
उनके अनुसार विशेषज्ञ पैनल में बदलाव एक मजबूत सुधारात्मक कदम है। हालांकि, केवल एक उपाय से पूरी संस्था में सुधार नहीं किया जा सकता। इसके लिए व्यापक सुधार कार्यक्रम जरूरी है और यह प्रक्रिया चल रही है।
एनटीए को किस तरह की संस्था बनाने पर जोर?
कुमार ने कहा कि सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य एनटीए को एक ‘मिशन-क्रिटिकल प्रोफेशनल संस्था’ के रूप में विकसित करना होना चाहिए।
राधाकृष्णन समिति ने एनटीए को मजबूत करने, जिम्मेदारियां स्पष्ट करने, राज्यों के साथ संस्थागत संबंध बनाने और परीक्षा कराने वाले संस्थानों को सक्रिय ज्ञान भागीदार बनाने की सिफारिश की थी।
कुमार के अनुसार ये सिफारिशें आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत रोडमैप देती हैं। सरकार ने वरिष्ठ नियुक्तियों, विशेषज्ञ नेतृत्व वाली जिम्मेदारियों, प्रमाणीकरण व्यवस्था और राज्यों के साथ समन्वय के जरिए इन पर काम शुरू किया है।
क्या एनटीए का मौजूदा बुनियादी ढांचा पर्याप्त है?
कुमार ने कहा कि केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि एनटीए के पास बुनियादी ढांचा मौजूद है या नहीं। असली सवाल यह है कि बदलती जरूरतों के साथ इसे लगातार कैसे मजबूत किया जाए।
इसके लिए बुनियादी ढांचे का नियमित परीक्षण और अपग्रेड जरूरी है। उन्होंने अधिक मान्यता प्राप्त परीक्षा केंद्र बनाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार भरोसेमंद सरकारी संस्थानों को ऐसे केंद्रों के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि एनटीए की क्षमता मजबूत है, लेकिन बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ इसे लगातार बढ़ाने की जरूरत है।
परीक्षा सुधार में इन तीन क्षेत्रों को मिले तत्काल प्राथमिकता
कुमार ने तत्काल ध्यान देने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की।
1. पूरी परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा: प्रश्न चयन, अनुवाद और समीक्षा से लेकर भंडारण, छपाई या डिजिटल डिलीवरी और परीक्षा केंद्र तक हर चरण का सुरक्षित रिकॉर्ड होना चाहिए।
2. स्थायी विशेषज्ञ क्षमता का निर्माण: टेस्ट डिजाइन, साइबर सुरक्षा, भाषाओं, गुणवत्ता विश्लेषण, लॉजिस्टिक्स और उम्मीदवारों से संवाद जैसे क्षेत्रों में स्थायी विशेषज्ञ तैयार किए जाने चाहिए। विशेषज्ञों के चयन, हितों के टकराव की घोषणा, प्रशिक्षण और प्रदर्शन की समीक्षा को नियमित प्रक्रिया बनाया जाना चाहिए।
3. भरोसेमंद परीक्षा केंद्र और उम्मीदवार सेवाएं: मान्यता प्राप्त परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, भरोसेमंद बिजली और इंटरनेट, दिव्यांगों के लिए सुविधाएं और प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था होनी चाहिए।
राधाकृष्णन समिति की कितनी सिफारिशें लागू हुईं?
कुमार ने बताया कि सरकार ने जुलाई में जानकारी दी थी कि राधाकृष्णन समिति की 46 प्रमुख कार्रवाई योग्य सिफारिशों में से 35 लागू की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा सुरक्षा से लेकर विशेषज्ञ क्षमता और परीक्षा केंद्रों तक कई क्षेत्रों में काम शुरू हो चुका है। लेकिन एनटीए को मजबूत और भरोसेमंद परीक्षा संस्था बनाने के लिए यह सुधार लगातार जारी रखने होंगे।
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