SFI: एसएफआई का ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ तेज करने का फैसला, बंद सरकारी विद्यालयों को फिर खोलने की मांग
SFI Campaign: एसएफआई ने देशभर में ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ को तेज करने का फैसला किया है। संगठन ने बंद पड़े सरकारी स्कूलों को दोबारा खोलने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठाई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Government Schools: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने शुक्रवार को कहा कि वह अगले तीन महीनों में देशभर में ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ को तेज करेगा। इस अभियान के जरिए संगठन सरकारी स्कूलों की खराब होती स्थिति को सामने लाएगा और स्कूली शिक्षा पर सरकार से ज्यादा खर्च करने की मांग करेगा।
SFI ने यह घोषणा दिल्ली के एचकेएस सुरजीत भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पदाधिकारियों ने देशभर में अभियान, प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित करने की योजना की जानकारी दी।
एक दशक में कितने सरकारी स्कूल हुए बंद?
SFI ने कहा है कि उसका कैंपेन अगस्त, सितंबर और अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें कार्यकर्ता स्कूलों का दौरा करेंगे और उनकी हालत का ब्योरा तैयार करेंगे।
छात्र संगठन का दावा है कि पिछले दशक में 94,000 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों की संख्या में 40,000 की बढ़ोतरी हुई है। संगठन का यह भी दावा है कि इस दौरान सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में 85.86 लाख की कमी आई है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 88.27 लाख छात्र बढ़े हैं।
SFI के मुताबिक, 1,00,843 स्कूलों में सिर्फ एक टीचर है जो लगभग 29 लाख छात्रों को पढ़ाते हैं, और देश भर के सरकारी स्कूलों में स्टाफ की भारी कमी है।
GDP का छह फीसदी शिक्षा पर खर्च करने की उठाई मांग
SFI ने एक बयान में कहा, "73% छात्र 12वीं कक्षा पूरी करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। स्कूल बंद होने से सबसे ज्यादा असर लड़कियों और दलित, आदिवासी व अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों पर पड़ रहा है।"
संगठन ने मांग की है कि सरकार शिक्षा में पब्लिक इन्वेस्टमेंट को GDP का छह प्रतिशत करे और सालाना बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा के लिए तय करे, जिसमें स्कूली शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जाए।
इसने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को रद्द करने की भी मांग की है और आरोप लगाया है कि यह सरकारी स्कूलों को बंद करने और उनके विलय को बढ़ावा देती है।
SFI ने सभी बंद सरकारी स्कूलों को फिर से खोलने, स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और सभी विषयों के लिए ट्रेंड टीचरों की भर्ती करने की मांग की है, जिसमें स्टूडेंट-टीचर का अनुपात 1:20 हो।
‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ में SFI की ये योजनाएं
- स्कूल छोड़ने वाले बच्चों पर फोकस: बच्चों को स्कूल छोड़ने से रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के प्रयास होंगे।
- बेहतर मिड-डे मील की मांग: सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की मांग की गई है। इसमें प्रोटीन और विटामिन से भरपूर भोजन शामिल करने पर जोर दिया गया है।
- स्कूलों की स्थिति की रिपोर्ट: SFI हर राज्य में सरकारी स्कूलों की पहचान कर उनकी स्थिति की जानकारी जुटाएगा और रिपोर्ट तैयार करेगा।
- प्रभावित छात्रों को एकजुट करना: स्कूल बंद होने या दूसरे स्कूल में विलय होने से प्रभावित छात्रों को संगठन के साथ जोड़ा जाएगा।
- स्थानीय लोगों के साथ काम: स्कूलों को दोबारा खोलने और उनकी सुविधाएं बेहतर करने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
- 10 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य: अभियान के तहत SFI 10 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर जुटाने की योजना बना रहा है। इसमें जाने-माने लोगों और विपक्षी समूहों को भी शामिल किया जाएगा।
- अधिकारियों को ज्ञापन: ब्लॉक, उपखंड और जिला स्तर के अधिकारियों को स्कूलों से जुड़ी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
- जनसभाएं और रैलियां: राज्य स्तर पर जनसभाएं और रैलियां आयोजित की जाएंगी।
- 8 सितंबर को पहला सम्मेलन: पहला ‘स्कूल बचाओ’ सम्मेलन 8 सितंबर को दिल्ली के HKS सुरजीत भवन में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर आयोजित किया जाएगा। इसके बाद राज्य की राजधानियों में छात्र रैलियां होंगी।
- अन्य संगठनों से अपील: SFI ने दूसरे सामाजिक और छात्र संगठनों से भी सरकारी स्कूलों को बचाने और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के अभियान में शामिल होने की अपील की है।
कमेंट
कमेंट X