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विश्व भारती : प्राचार्य के चौकीदारी वाले फरमान के बाद विभागाध्यक्षों का इस्तीफा
Sat, 03 Jul 2021 10:32 PM IST
देवेश शर्मा
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: देवेश शर्मा
Updated Sat, 03 Jul 2021 10:32 PM IST
सार
शिक्षा भवन के प्राचार्य प्रोफेसर ताराप्रसाद चट्टोपाध्याय ने सभी विभागाध्यक्षों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विभागाध्यक्षों को अपने - अपने विभाग में लोगों की पहुंच को नियंत्रित करने को कहा गया था।
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विश्व भारती विश्वविद्यालय
- फोटो : विश्व भारती यूनिवर्सिटी
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के शिक्षा भवन में विज्ञान विभाग के प्रमुखों ने इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा अपने - अपने परिसर में आगंतुकों पर नजर रखने के लिए कहे जाने के बाद नाराजगी स्वरूप यह इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
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सूत्रों ने बताया कि हाल ही में रसायन विज्ञान विभाग से नल के पाइप चोरी हो गए थे। इसके बाद शिक्षा भवन के प्राचार्य प्रोफेसर ताराप्रसाद चट्टोपाध्याय ने सभी विभागाध्यक्षों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विभागाध्यक्षों को अपने - अपने विभाग में लोगों की पहुंच को नियंत्रित करने को कहा गया था। साथ ही विज्ञान विभागों के विभागाध्यक्षों को भी नियमित रूप से आगंतुकों के विवरण से रजिस्ट्रार को अवगत कराने के लिए निर्देशित किया गया था।
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प्राध्यापकों को नागवार गुजरी बात
बस यही बात प्राध्यापकों को नागवार गुजरी। विश्वभारती फैकल्टी एसोसिएशन के सूत्रों ने बताया कि प्रोफेसर ताराप्रसाद द्वारा इस मुद्दे को उठाने और अधिकारियों को निगरानी करने के निर्देश देने से प्राध्यापकों में नाराजगी थी। हालांकि, योजना के बारे में विस्तार से पता चलने के बाद कई विभागों के प्रमुखों ने इस निर्देश का पालन करने में असमर्थता जताई और विरोध स्वरूप प्राचार्य को त्याग पत्र भेज दिया।
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चौकीदार नहीं बन सकते
वहीं, विश्व भारती विश्वविद्यालय की फैकल्टी एसोसिएशन के एक सूत्र ने बताया कि विभाग प्रमुखों ने इस आदेश से खुद को अपमानित महसूस किया और सामूहिक रूप से कहा कि वे चौकीदार नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त सुरक्षा कर्मियों को इसकी चिंता करनी चाहिए। उधर, शिक्षा भवन के प्राचार्य ने भी इस बीच इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।
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