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यूपीएससी सिविल सेवा: अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका देने के पक्ष में नहीं है केंद्र सरकार

Tue, 09 Feb 2021 09:21 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Tue, 09 Feb 2021 09:21 PM IST
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UPSC Civil Services: Central Government is not in favor of giving additional opportunity to candidates
upsc - फोटो : file photo

केंद्र सरकार कोविड-19 महामारी के कारण यूपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा में शामिल न हो पाने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा मौका देने के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर  मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि वह पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण आखिरी प्रयास में परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने वाले छात्रों समेत यूपीएससी सिविल सेवा के अभ्यर्थियों को उम्र सीमा पर एक बार छूट दिए जाने के खिलाफ है। 

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केंद्र की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि शुरुआत में सरकार अतिरिक्त मौका देने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन उसने पीठ के सुझाव पर विचार कर यह फैसला लिया।उन्होंने पीठ से कहा, ‘‘यह ऐसी परीक्षा नहीं है, जिसमें आप अंतिम समय में तैयारी करते हैं। लोग वर्षों तक इसके लिए तैयारी करते हैं।’’
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केंद्र की तरफ से न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर के नेतृत्व वाली पीठ को तर्क दिया गया कि ऐसे छात्रों को इस साल एक और मौका देने से दूसरे उम्मीदवारों के साथ भेदभाव होगा। याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 
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बता दें, याचिका में महामारी के कारण 2020 में अपने आखिरी प्रयास में परीक्षा में नहीं बैठ पाने वाले छात्रों को एक और अवसर दिए जाने का अनुरोध किया गया है। केंद्र ने पांच फरवरी को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह यूपीएससी सिविल सेवा के ऐसे अभ्यर्थियों को एक बार की राहत के तौर पर अतिरिक्त मौका देने पर सहमत है, जिनका कोविड-19 महामारी के बीच 2020 की परीक्षा में अंतिम प्रयास था और उनकी आयु समाप्त नहीं हुई है।

केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में पांच फरवरी को दाखिल दस्तावेज में कहा था कि सीएसई-2021 के दौरान ऐसे अभ्यर्थियों को राहत प्रदान नहीं की जाएगी, जिनका अंतिम प्रयास समाप्त नहीं हुआ है या ऐसे उम्मीदवार जो कि विभिन्न श्रेणियों में निर्धारित आयु सीमा को पार कर चुके हैं। इसके अलावा, अन्य कारणों से परीक्षा में शामिल होने के लिए अयोग्य अभ्यर्थियों को भी सीएसई-2021 में राहत नहीं मिलेगी।

केंद्र ने पीठ से यह भी कहा कि यह राहत केवल एक बार के अवसर के तौर पर सीएसई-2021 के लिए ही लागू रहेगी और इसे मिसाल के तौर पर नहीं देखा जाएगा। केंद्र ने कहा था कि भविष्य में इस राहत को आधार बनाकर किसी तरह के निहित अधिकार का दावा पेश नहीं किया जाएगा।

पीठ ने एस वी राजू से इस दस्तावेज को वितरित करने को कहा था और साथ ही याचिकाकर्ताओं को इस बारे में अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। वहीं, केंद्र ने एक फरवरी को न्यायालय से कहा था कि वह यूपीएससी परीक्षा 2020 में कोविड-19 के कारण शामिल नहीं हो सके या ठीक से तैयारी नहीं कर पाने वाले ऐसे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका नहीं देगा। सरकार ने कहा था कि 2020 में अंतिम मौका गंवा चुके अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर देना अन्य के साथ भेदभाव होगा।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने देश में सिविल सेवा परीक्षा शुरू होने के बाद से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा दी गई छूट के संबंध में विस्तृत जानकारी न्यायालय को दी और बताया कि वर्ष 1979, 1992 और 2015 में परीक्षा पैटर्न में बदलाव के कारण अभ्यर्थियों को छूट दी गई थी।


उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने पिछले साल 30 सितंबर को देश के कई इलाकों में बाढ़ और कोविड-19 महामारी की वजह से यूपीएससी सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा टालने के अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

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