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UPSC: 15 साल पहले दी थी परीक्षा, अब नियुक्ति के लिए आयोग ने मांगा विवरण; जाने क्या है पूरा मामला

Sat, 04 Jan 2025 02:57 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Sat, 04 Jan 2025 02:57 PM IST
सार

Supreme Court: पिछले वर्ष जुलाई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश के बाद यूपीएससी ने नियुक्ति के लिए उनके नाम पर विचार के लिए दो दृष्टिबाधित उम्मीदवारों से विवरण मांगा है। ये उम्मीदवार 2008 की सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुए थे।

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UPSC asked details from 2 visually-impaired candidates for appointment, who took 2008 civil services
UPSC, यूपीएससी - फोटो : iStock

विस्तार

UPSC: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से हाल ही में एक बयान जारी किया गया। इसमें आयोग ने 15 साल पहले सिविल सेवा परीक्षा देने वाले दो दृष्टिबाधित उम्मीदवारों से विवरण मांगा है, ताकि नियुक्ति के लिए उनके नाम पर विचार किया जा सके।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिया निर्णय
आयोग की ओर से यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उठाया गया है। पिछले वर्ष जुलाई में शीर्ष अदालत ने आयोग को निर्देश दिया था कि विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए लंबित रिक्तियों पर नियुक्ति के लिए 11 उम्मीदवारों पर विचार किया जाए।

 

यूपीएससी द्वारा जारी बयान में कहा गया है, "माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 3303/2015 (भारत संघ बनाम पंकज श्रीवास्तव) में दिनांक 08.07.2024 के अपने निर्णय में दिए गए निर्देशों के अनुसरण में, कार्यान्वयन की प्रक्रिया उम्मीदवार के आवेदन पत्र में उल्लिखित विवरण के आधार पर की जानी है।"

बयान में कहा गया है, "उम्मीदवार के साथ संवाद करना आवश्यक हो गया है ताकि प्रासंगिक विवरण प्राप्त किए जा सकें और डोजियर का पुनर्निर्माण किया जा सके।"

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इन उम्मीदवारों से मांगे विवरण
यूपीएससी ने हीरा लाल नाग और अनिल कुमार सिंह (अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय और दृष्टिबाधित (VI) श्रेणी) के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है, दोनों ने सिविल सेवा परीक्षा 2008 दी थी।

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हफ्तेभर में करना होगा आयोग से संपर्क
शीर्ष अदालत के फैसले के "लाभार्थी" उम्मीदवारों को सात दिनों के भीतर आयोग से तुरंत संपर्क करने के लिए कहा गया है, ताकि यूपीएससी और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) अनुपालन में आवश्यक कदम उठा सकें।

 

आयोग के बयान में कहा गया है कि यदि सात दिनों के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता है, तो "यह माना जा सकता है कि ये उम्मीदवार अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 08.07.2024 के फैसले के अनुसरण में सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)-2008 के आधार पर सेवाओं के आवंटन के लिए विचार किए जाने के इच्छुक नहीं हैं।"

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