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यूनेस्को की रिपोर्ट में दावा : 13.20 करोड़ लड़के स्कूल की पहुंच से दूर, पढ़ाई में भी लड़कियां आगे

Sun, 10 Apr 2022 10:03 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Sun, 10 Apr 2022 10:03 PM IST
सार

UNESCO Report: लीव नो चाइल्ड बिहाइंड: ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेजमेंट फ्रॉम एजुकेशन शीर्षक वाली रिपोर्ट में लड़कों में गिरते शिक्षा के स्तर को लेकर चिंता जताई गई है।

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UNESCO Leave no child behind Report 132 million boys of primary and secondary school age are out of school
UNESCO Report - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पढ़ने की उम्र वाले करीब 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल की पहुंच से दूर हैं और वे पढ़ने नहीं जा रहे हैं। यह दावा यूनेस्को की हालिया ग्लोबल एजुकेशन रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पढ़ाई के मामले में भी बेटियां, बेटों से काफी बेहतर और आगे हैं। लीव नो चाइल्ड बिहाइंड: ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेजमेंट फ्रॉम एजुकेशन शीर्षक वाली रिपोर्ट में लड़कों में गिरते शिक्षा के स्तर को लेकर चिंता जताई गई है।

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लड़कियों के मुकाबले लड़कों के कक्षाओं को रिपीट करने के चांस ज्यादा

संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षाओं में दोबारा पढ़ने की संभावना अधिक है। अर्थात लड़कियों के मुकाबले लड़कों की कक्षाओं को रिपीट करने की ज्यादा आशंका रहती हैं। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि शारीरिक तौर पर भी लड़कियों के मुकाबले लड़कों को परेशान किए जाने का खतरा अधिक होता है।  

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माध्यमिक स्तर पर भी लड़के, लड़कियों से पिछड़ रहे

रिपोर्ट में कहा गया है कि 57 देशों के आंकड़ों के अनुसार, पढ़ने की क्षमता के मामले में 10 साल की उम्र तक के लड़के, लड़कियों की तुलना में काफी पीछे हैं। माध्यमिक स्तर पर भी किशोर लड़के, लड़कियों से पीछे हैं। सामान्य धारणा से उलट, कई देशों में लड़कों के आगे की कक्षाओं में नहीं पढ़ पाने और अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाने का खतरा अधिक है। इस समय 13.20 करोड़ लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। रिपोर्ट में शिक्षा व स्कूल से लड़कों की बढ़ती दूरी के कारणों में अनुशासन, शारीरिक दंड, लैंगिक मानदंड, गरीबी और रोजगार की मजबूरी प्रमुख हैं।
 

लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार अब भी दूर 

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार का उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। काफी बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर प्राथमिक और सेकेंडरी स्कूल की पहुंच से दूर हैं। कोरोना महामारी के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या और तेजी से बढ़ाई है। 
 

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