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यूजीसी : विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की मिलेगी अनुमति, इन दिशा-निर्देशों का करना होगा पालन

Fri, 06 Jan 2023 04:26 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडेय Updated Fri, 06 Jan 2023 04:26 PM IST
सार

यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने बताया कि जो विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर स्थापित करना चाहते हैं, उनकी वैश्विक रैंकिंग के शीर्ष 500 में होना चाहिए। 

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ugc permit foreign universities and educational institutions to set up campuses in India
UGc - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

UGC : भारत में शाखा खोलने वाले विदेशी विश्वविद्यालयों को यूजीसी के नियमों के तहत अनुमति दी जाएगी। उन्हें भारतीय विश्वविद्यालयों की ही भांति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानदडों का पालन करना होगा। इसके साथ यूजीसी ने साफ किया है कि उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति नहीं मिलेगी। यूजीसी प्रमुख एम जगदीश कुमार ने स्पष्ट किया कि विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में ऑफलाइन कक्षाओं का ही संचालन करना होगा।  इसके साथ ही भारत में परिसर स्थापित करने वाले विदेशी विश्वविद्यालयों को अपनी स्वयं की प्रवेश प्रक्रिया तैयार करने की स्वतंत्रता होगी। 
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किन  विश्वविद्यालयों को मिलेगी अनुमति 

यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने गुरुवार को समझाया कि जो विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें समग्र या विषयवार वैश्विक रैंकिंग के शीर्ष 500 में होना चाहिए।  जिन विश्वविद्यालयों ने विषयवार रैंकिंग हासिल की है, उन्हें अपने भारतीय परिसरों में समान विषयों की पेशकश करने की अनुमति दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि अमेरिका के येल, स्टैनफोर्ड, हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालय और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड किंग्स कॉलेज जैसे ब्रिटिश संस्थान भारत में कैंपस स्थापित कर सकते हैं, जिससे भारतीय छात्रों को विदेश गए बिना शीर्ष शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति मिलेगी।
 
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इन संस्थानों के लिए क्या होगी प्रवेश प्रक्रिया 

भारत आने वाले संस्थानों को ड्रॉफ्ट नियमों के अनुसार, घरेलू और विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए अपनी प्रवेश प्रक्रिया और मानदंड विकसित करने की स्वायत्तता होगी। इन सभी विश्वविद्यालयों में आवश्यकता-आधारित छात्रवृत्ति का प्रावधान होगा। मसौदा विनियम इन विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए आरक्षण मानदंडों के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं करता है - जिसका अर्थ है कि वे यह तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे कि क्या वे अपने भारतीय परिसरों में कुछ छात्रों के लिए आरक्षण देना करना चाहते हैं।
जारी विवरण के अनुसार, भारत सरकार ऐसे संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं देगी।  फैकल्टी के मामले में, इन संस्थानों को अपने भर्ती मानदंडों के अनुसार भारत और विदेश से फैकल्टी और स्टाफ की भर्ती करने की स्वायत्तता होगी। यह संकाय और कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए योग्यता, वेतन संरचना और सेवा की अन्य शर्तें तय कर सकता है। हालांकि, वे यह सुनिश्चित करेंगे कि नियुक्त संकाय की योग्यता मूल देश के मुख्य परिसर के बराबर होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि भारतीय परिसर में पढ़ाने के लिए नियुक्त विदेशी संकाय उचित अवधि के लिए भारत में परिसर में रहे।
 
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इन विषयों की होगी पढ़ाई

भारत आने वाले विदेशी संस्थानों को स्नातक, स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट, पोस्ट-डॉक्टोरल और अन्य कार्यक्रमों की पेशकश करने और सभी विषयों में डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान करने की अनुमति होगी।
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