UGC Chairman: सीयूईटी की शुरुआत, साल में दो बार एडमिशन... अपने कार्यकाल में जगदीश कुमार ने किए ये बड़े बदलाव
UGC: प्रोफेसर ममीडाला जगदीश कुमार ने यूजीसी अध्यक्ष रहते हुए उच्च शिक्षा में कई अहम बदलाव किए। उन्होंने न केवल नीति स्तर पर पहल की, बल्कि संस्थानों को अधिक लचीला और नवाचार-प्रेरित बनाने की दिशा में भी काम किया।
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UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष प्रोफेसर ममीडाला जगदीश कुमार ने हाल ही में अपने पद से सेवानिवृत्ति की घोषणा की है। फरवरी 2022 में अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा में कई अहम पहलें शुरू कीं। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही। अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट दाखिले के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) की शुरुआत। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विभिन्न प्रावधानों को लागू कराने में भी सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाई।
स्नातक छात्रों को अब डिग्री के बाद रोजगार पाने की दिक्कत नहीं होगी। छात्रों की शिक्षा और रोजगार क्षमता के अंतराल को अब प्रशिक्षु कार्यक्रम दूर करेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने जनवरी, 2025 सत्र से स्नातक प्रोग्राम के छात्रों के लिए अप्रैंटिसशिप एबेंडेड डिग्री (एईडी) प्रोग्राम को मंजूरी दे दी है।
जगदीश कुमार ने किए ये बड़े बदलाव
ईशान उदय छात्रवृत्ति
यूजीसी के अध्यक्ष प्रोफेसर ममीडाला जगदीश कुमार के नेतृत्व में ईशान उदय छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) के छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रोत्साहन देना था। इस योजना के अंतर्गत हजारों छात्रों को वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे वे स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अपनी पढ़ाई जारी रख सके।
नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया में सुधार
प्रोफेसर कुमार ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़ी नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए। उन्होंने न्यूनतम योग्यता मानदंडों को सख्त किया, ताकि केवल योग्य उम्मीदवारों को शैक्षणिक संस्थानों में स्थान मिले और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।
डुअल एंट्री सिस्टम
यूजीसी ने उच्च शिक्षा में लचीलापन लाने के लिए डुअल एंट्री सिस्टम की शुरुआत की। इसके अंतर्गत अब छात्र साल में दो बार- जनवरी/फरवरी और जुलाई/अगस्त सत्रों में दाखिला ले सकते हैं। यह पहल खासकर उन छात्रों के लिए लाभकारी साबित हुई, जो किसी कारणवश एक निर्धारित समय पर प्रवेश नहीं ले पाते थे।
अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम
प्रोफेसर कुमार के कार्यकाल में एक और अहम पहल रही अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम। इसके जरिए अंडरग्रेजुएट छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण का भी अवसर मिला। इससे छात्र न केवल अकादमिक रूप से मजबूत हुए, बल्कि उन्हें रोजगार के लिए व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ।
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