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मध्यप्रदेश बोर्ड: सड़क पर जूते बेचने वाले की बेटी बारहवीं के टॉपरों में शामिल, कहा- डॉक्टर बनने का है सपना
Tue, 28 Jul 2020 06:22 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, श्योपुर
अमर उजाला नेटवर्क, श्योपुर
Published by: अवधेश कुमार
Updated Tue, 28 Jul 2020 06:22 AM IST
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Madhu Arya
- फोटो : ANI
मध्यप्रदेश 12वीं के नतीजों श्योपुर के एक बेहद गरीब परिवार की बच्ची ने अपनी प्रतिभा से सबको गौरवान्वित किया। सड़क पटरी पर जूते बेचने वाले कन्हैया लाल की बेटी मधु टॉपरों में शामिल हुई है। जीव विज्ञान पढ़ने वाली मधु ने 500 में 485 अंक हासिल किए।
मधु ने कहा, वह डॉक्टर बनना चाहती है। हम पांच भाई बहन हैं और हमारे पिता बस अड्डे के पास सड़क पर पटरी बिछाकर जूते बेचते हैं। उन्होंने कहा कि मैं कड़ी मेहनत की। मैं रोज सुबह चार बजे उठती थी और दिन में आठ से 10 घंटे पढ़ाई करती थी।
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मधु ने बताया कि मेरा सपना डॉक्टर बनने का है। मैं नीट की तैयारी कर रही हूं। मेरे माता-पिता और पूरा परिवार बहुत खुश है। मेरी सरकार से गुजारिश है कि मुझे उच्च शिक्षा के लिए मदद की जाए, क्योंकि मेरे पिता आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है।
परिवार के सामने गरीबी सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर सरकार मदद करे तो उसका यह सपना जरूर पूरा होगा। आठ सदस्यों वाला उसका पूरा परिवार हरिजन बस्ती के दो कमरे के घर में रहता है। मधु मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कर रही है। मधु ने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर पढ़ती थी। दिन का पूरा समय पढ़ाई में जाता था।
कोरोना लॉकडाउन के दौरान उसे पढ़ने के लिए खूब समय मिला और इसका परिणाम आज सामने है। बेटी की सफलता से गौरवान्वित पिता कन्हैयालाल ने कहा, मैं चाहता हूं कि बेटी का सपना साकार हो लेकिन डर है कि कहीं गरीबी इसमें बाधा न बने।
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मधु ने कहा, वह डॉक्टर बनना चाहती है। हम पांच भाई बहन हैं और हमारे पिता बस अड्डे के पास सड़क पर पटरी बिछाकर जूते बेचते हैं। उन्होंने कहा कि मैं कड़ी मेहनत की। मैं रोज सुबह चार बजे उठती थी और दिन में आठ से 10 घंटे पढ़ाई करती थी।
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मधु ने बताया कि मेरा सपना डॉक्टर बनने का है। मैं नीट की तैयारी कर रही हूं। मेरे माता-पिता और पूरा परिवार बहुत खुश है। मेरी सरकार से गुजारिश है कि मुझे उच्च शिक्षा के लिए मदद की जाए, क्योंकि मेरे पिता आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है।
परिवार के सामने गरीबी सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर सरकार मदद करे तो उसका यह सपना जरूर पूरा होगा। आठ सदस्यों वाला उसका पूरा परिवार हरिजन बस्ती के दो कमरे के घर में रहता है। मधु मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कर रही है। मधु ने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर पढ़ती थी। दिन का पूरा समय पढ़ाई में जाता था।
कोरोना लॉकडाउन के दौरान उसे पढ़ने के लिए खूब समय मिला और इसका परिणाम आज सामने है। बेटी की सफलता से गौरवान्वित पिता कन्हैयालाल ने कहा, मैं चाहता हूं कि बेटी का सपना साकार हो लेकिन डर है कि कहीं गरीबी इसमें बाधा न बने।
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