Teacher's Day: पीएम ने शिक्षण बिरादरी को दी बधाई, डॉ एस राधाकृष्णन को अर्पित की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर डॉ एस राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं कोरोना काल में नई चुनौतियों का सामना करते हुए छात्रों की शिक्षा को जारी रखने में शिक्षक के योगदान के लिए उन्हें बधाई दी है।
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5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे शिक्षण बिरादरी को बधाई दी और कोरोना महामारी के दौरान सभी नई चुनौतियों का सामना करते और नई तकनीक को सीखते हुए विद्यार्थियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनकी सराहना की। इस संबंध में प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट भी किया है। पीएम अपने ट्वीट में लिखते हैं कि शिक्षक दिवस पर, संपूर्ण शिक्षण बिरादरी को बधाई। जिसने हमेशा युवा मन को पोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सराहनीय है कि शिक्षकों ने कैसे नवाचार किया है और सुनिश्चित किया है कि छात्रों की शिक्षा यात्रा कोरोना महामारी के समय में जारी रहे।
On Teachers' Day, greetings to the entire teaching fraternity, which has always played a pivotal role in nurturing young minds. It is commendable how teachers have innovated and ensured the education journey of students continues in the COVID-19 times.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2021विज्ञापन
राष्ट्रपति ने भी शिक्षकों को बधाई दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ एस राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने डॉ राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर कहा कि मैं डॉ एस राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनकी विशिष्ट छात्रवृत्ति के साथ-साथ हमारे देश में योगदान को याद करता हूं। वहीं शनिवार को, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर देश भर के शिक्षकों को बधाई दी और एक मजबूत व समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में उनके अमूल्य योगदान के लिए शिक्षण समुदाय का आभार व्यक्त किया।
शिक्षक दिवस किसकी याद में मनाया जाता है?
भारत के पहले उपराष्ट्रपति (1952-1962) और शिक्षक व दार्शनिक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को चिह्नित करने के लिए हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन बच्चों और उनके गुरुओं के बीच के बंधन का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है जो उनके जीवन को कई तरह से प्रभावित करते हैं। डॉ राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति (1962-1967) भी थे। अपनी सभी उपलब्धियों और योगदानों के बावजूद, डॉ राधाकृष्णन जीवन भर शिक्षक बने रहे। उनका मानना था कि सच्चे शिक्षक वे हैं जो हमें अपने लिए सोचने में मदद करते हैं।
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