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Hindi News ›   Education ›   Supreme Court refuses to stay Delhi High Court's decision on annual and development fee

उच्चतम न्यायालय : निजी स्कूलों के वार्षिक शुल्क लेने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से एससी का इंकार

Mon, 28 Jun 2021 12:28 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Mon, 28 Jun 2021 12:28 PM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के वार्षिक शुल्क और विकास शुल्क वाले एक फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।

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Supreme Court refuses to stay Delhi High Court's decision on annual and development fee
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को निजी और गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के विद्यार्थियों से वार्षिक एवं विकास शुल्क लेने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। दरअसल, अदालत दिल्ली सरकार की उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दो याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय ने 31 मई को अपना फैसला सुनाया था जिसे केजरीवाल सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एकलपीठ के फैसले के खिलाफ अपील दिल्ली हाईकोर्ट में एक खंडपीठ के सामने लंबित है और दिल्ली सरकार ने वहां अपनी आपत्ति दर्ज कराई है ऐसे में अंतरिम आदेश देने का कोई कारण नहीं है। अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा है कि  सभी दलीलों को उच्च न्यायालय के समक्ष उठाए।  31 मई को कोरोना के दौरान निजी स्कूलों के छात्रों से वार्षिक और विकास शुल्क वसूलने पर रोक लगाने के दिल्ली सरकार के दो अलग-अलग आदेशें को उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था।
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एससी ने अब मामले को खारिज कर दिया है और सरकार से 12 जुला को उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष सभी मुद्दों को उठाने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में न्यायमूर्ति खानविकर ने कहा कि यह देखते हुए कि खंडपीठ 12 जुलाई को मामले की सुनवाई कर रही है, सभी तर्क खुले रहते हैं और खंडपीठ के समक्ष याचिका को खारिज करना मामले की योग्यता पर प्रतिबिंबित नहीं करता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपील का खारिज होना मामले के गुण-दोष की अभिव्यक्ति नहीं है।

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