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Supreme Court: जिपमर की तर्ज पर सभी एम्स को रोस्टर आधारित आरक्षण अपनाने का निर्देश

Fri, 13 May 2022 10:09 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Fri, 13 May 2022 10:09 PM IST
सार

एम्स, नई दिल्ली की ओर से पेश वकील दुष्यंत पाराशर को एम्स, भुवनेश्वर और जोधपुर से निर्देश प्राप्त करने के लिए कहा गया ताकि अदालत सुनवाई की अगली तारीख पर उचित आदेश पारित कर सके।

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Supreme Court directs AIIMS to adopt roster based reservations in all its institutes
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) को जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एडुकेशन एंड रिसर्च(जिपमर), पुडुचेरी  की तर्ज पर रोस्टर आधारित आरक्षण अपनाने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि जिपमर द्वारा उम्मीदवारों के लिए अपनाए जाने वाले रोस्टर प्वाइंट आधारित आरक्षण सभी एम्स में लागू किया जाए। हालांकि, रोस्टर प्वाइंट जिपमर के समान नहीं होना चाहिए।

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सुनवाई की अंतिम तिथि पर सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया गया था कि एम्स( भुवनेश्वर) और एम्स(जोधपुर) के अलावा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अन्य आए सभी एम्स ने अपने संस्थागत वरीयता वाले उम्मीदवारों के लिए जिपमर के तर्ज पर रोस्टर-आधारित आरक्षण प्रणाली को लागू करने पर सहमति व्यक्त की है। एम्स, नई दिल्ली की ओर से पेश वकील दुष्यंत पाराशर को एम्स, भुवनेश्वर और जोधपुर से निर्देश प्राप्त करने के लिए कहा गया ताकि अदालत सुनवाई की अगली तारीख पर उचित आदेश पारित कर सके। शुक्रवार को याचिकाकर्ता की ओर से जस्टिस एल नागेश्वर राव और और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ के समक्ष कहा गया कि आदेश में यह रिकॉर्ड किया जाना चाहिए कि इस साल से रोस्टर सिस्टम लागू हो जाएगा।
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पाराशर ने बताया कि काउंसिलिंग के लिए नया साफ्टवेयर तैयार किया जाना है, इसमें कुछ विलंब हो सकता है। जिसके बाद पीठ ने कहा, हम कहेंगे कि यह इस साल के लिए लागू होगा लेकिन आप (एम्स) देरी होने की स्थिति बाद में हमारे पास आ सकते हैं। पीठ ने पराशर से कहा, अगर सभी एम्स मान गए हैं तो आपको क्या परेशानी है?

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