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SC on AIBE: पांच सदस्यीय संविधान पीठ का अहम फैसला, बीसीआई ही कराएगी अखिल भारतीय बार परीक्षा

Fri, 10 Feb 2023 01:59 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Fri, 10 Feb 2023 01:59 PM IST
सार

All India Bar Examination: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया कि अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) को आयोजित करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया पूरी तरह से सक्षम है। 17वीं एआईबीई परीक्षा का संचालन और आयोजन भी बार काउंसिल ही करेगी।

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Supreme Court affirms BCI power to hold All India Bar Examination
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

SC on All India Bar Examination: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया कि अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) को आयोजित करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया पूरी तरह से सक्षम है। 17वीं एआईबीई परीक्षा का संचालन और आयोजन भी बार काउंसिल ही करेगी। एआईबीई यानी ऑल इंडिया बार एग्जाम देश की अदालतों में कानून का अभ्यास करने के लिए वकीलों की अर्हता परीक्षा होती है। इसमें सफल रहने पर देश की अदालतों में प्रैक्टिस यानी वकालत करने का लाइसेंस मिलता है। 

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बीसीआई ही तय करे कि कब हो AIBE का आयोजन

जस्टिस एसके कौल की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) को आयोजित करने के लिए ऐसे नियमों और नियमों को तय करने हेतु उक्त अधिनियम (एडवोकेट्स एक्ट) के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के लिए ये पर्याप्त शक्तियां हैं। इसका प्रभाव यह होगा कि यह बीसीआई पर छोड़ दिया जाता है कि एआईबीई को किस स्तर पर- नामांकन से पहले या बाद में आयोजित किया जाना है।

 

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सितंबर 2022 में रखा था फैसला सुरक्षित

अदालत का आदेश उस याचिका पर आया, जिसमें एआईबीई से संबंधित कई मुद्दों की जांच की गई थी, जिसमें बीसीआई द्वारा अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत किस स्तर पर परीक्षा निर्धारित की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एसके कौल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस एएस ओका, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके माहेश्वरी भी शामिल थे। पीठ ने मामले में दलीलें सुनने के बाद पिछले साल सितंबर में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

 

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याचिका में पूछे गए थे ये सवाल

शीर्ष अदालत ने मार्च 2016 में कहा था कि निर्धारण के लिए उठाए गए प्रश्नों में से एक यह था कि क्या बीसीआई बार में अभ्यास जारी रखने के लिए योग्यता की शर्त के रूप में एक वकील के नामांकन के बाद परीक्षा निर्धारित करने के लिए सक्षम है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि निर्धारण के लिए आने वाले प्रश्न सामान्य रूप से कानूनी पेशे को प्रभावित करने वाले काफी महत्वपूर्ण हैं और संविधान पीठ द्वारा आधिकारिक रूप से उत्तर देने की आवश्यकता है। इस प्रकार उसने तीन प्रश्नों का उल्लेख किया था, जिसमें यह भी शामिल था कि क्या अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24(3)(डी) के तहत बनाए गए बार काउंसिल ऑफ इंडिया प्रशिक्षण नियम, 1995 के संदर्भ में पूर्व-नामांकन प्रशिक्षण को बीसीआई द्वारा वैध रूप से निर्धारित किया जा सकता है और यदि तो क्या सुदीर बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया और अन्य के फैसले पर पांच जजों की बेंच द्वारा विचार करने के लिए पुनर्विचार की आवश्यकता है।

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