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Success Story: परीक्षा में नंबर ही सब कुछ नहीं होते... 12वीं में कम अंक होने के बाद भी आईपीएस बने दिनेश कुमार
Wed, 19 Mar 2025 08:22 AM IST
शिवम गर्ग
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शिवम गर्ग
Updated Wed, 19 Mar 2025 08:22 AM IST
सार
Success Story: आईपीएस दिनेश कुमार गुप्ता ने कहा कि हताश हुए बिना नई दिशा की खोज में लग जाएंगे। जीवन में गिर जाएं तो उठकर आगे निकाला जा सकता है। मुझे खुद को साबित करना था और मैंने किया, रिजल्ट की चिंता करे बिना सोचें कि वह क्या-क्या कर सकते हैं।
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परीक्षा टिप्स
- फोटो : freepik
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विस्तार
IPS Dinesh Kumar Success Story: यदि किसी कक्षा में अंक खराब आएं तो जीवन खत्म नहीं होता। अंक सब कुछ नहीं हैं। रिजल्ट एक पड़ाव है, इसे अंत नहीं माना जा सकता, बल्कि हताशा को पीछे छोड़कर नए सिरे से उठकर नई दिशा तलाशनी चाहिए। मेरे बारहवीं में केवल 58 फीसदी अंक थे, लगा कि अब क्या करूंगा, लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी और आईपीएस ऑफिसर बन गया। यह कहानी है दिल्ली पुलिस की ट्रैफिक यूनिट में तैनात अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (आईपीएस) दिनेश कुमार गुप्ता की, जिन्होंने कम अंकों से हुई हताशा को अपना हथियार बनाया और पहले बीएससी, फिर एमबीए और फिर यूपीएससी की तैयारी कर अपना मुकाम बनाया।
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12वीं में आए केवल 58 फीसदी अंक
स्कूलों में परीक्षाएं लगभग खत्म हो गई हैं और रिजल्ट आने वाले हैं। दसवीं व बारहवीं की परीक्षाओं के नतीजे मई तक जारी होने हैं, लेकिन उससे पहले ही छात्रों व अभिभावकों को रिजल्ट की चिंता सताने लगी है। खासकर छात्रों के मन में डर है कि कम अंक आने पर वह जीवन में क्या करेंगे। आईपीएस अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता कहते हैं कि बीमार पड़ने पर मेरे 12वीं में केवल 58 फीसदी अंक थे। लगा कि मैं अब इंजीनियर या डॉक्टर नहीं बन पाऊंगा। डर सताने लगा था कि समाज में भी कहा जाने लगेगा कि अब कम अंकों के साथ क्या करोगे। वह कहते हैं ऐसा सामना सबको करना पड़ सकता है लेकिन अंकों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए। हताश हुए बिना नई दिशा की खोज में लग जाएंगे। जीवन में गिर जाएं तो उठकर आगे निकाला जा सकता है। मुझे खुद को साबित करना था और मैंने किया, रिजल्ट की चिंता करे बिना सोचें कि वह क्या-क्या कर सकते हैं।
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तीन घंटे की परीक्षा से बच्चे की प्रतिभा को नहीं माप सकते
सीबीएसई की काउंसलिंग प्रोग्राम की पूर्व प्रोजेक्ट प्रमुख रमा शर्मा ने कहा कि रिजल्ट बस एक पड़ाव है, इसे अंत नहीं माना जा सकता है। यह ध्यान रखना चाहिए कि तीन घंटे की परीक्षा से बच्चे की प्रतिभा को नहीं माप सकते हैं। परीक्षा और रिजल्ट एक मूल्यांकन है बस, यह तुलना के लिए नहीं हैं। रिजल्ट खराब आने या कम अंक आने पर छात्रों को निराश नहीं होना चाहिए। परीक्षाएं आपकी कमजोरियों को जानने का तरीका भर है। रमा शर्मा कहती हैं कि न ही छात्र और न ही अभिभावक बच्चे की तुलना किसी से करें। यदि कम अंक आ भी जाएं तो सबसे पहले माता-पिता, शिक्षकों से बातचीत करें। अपने आत्मविश्वास को किसी भी तरह से कम न होने दें। यह ध्यान रखें कि अब करियर में विकल्पों की कमी नहीं है। बस आपको अपने लिए करियर के विकल्प का पता होना चाहिए। रिजल्ट आने के बाद अपनी रूचि पर फोकस करें।
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