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CBSE: इको क्लब के माध्यम से जागरूकता फैलाने के निर्देश, प्राकृतिक सामग्री से बनी कलाकृतियों के उपयोग पर जोर

Sun, 09 Nov 2025 10:34 AM IST
शाहीन परवीन अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शाहीन परवीन Updated Sun, 09 Nov 2025 10:34 AM IST
सार

Eco Club: सीबीएसई ने इको क्लब के माध्यम से छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य प्राकृतिक सामग्री से बनी कलाकृतियों का उपयोग बढ़ावा देकर रचनात्मक तरीके से स्थिरता और पर्यावरण प्रेम का संदेश फैलाना है।

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Spreading Awareness Through Eco Club, Promoting Art from Natural Materials
CBSE Board - फोटो : Official Website

विस्तार

Environmental Protection: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कहा है कि स्कूलों बच्चों को प्राकृतिक सामग्री से बनी कलाकृतियों का उपयोग करने के लिए जागरूक करें। बोर्ड की ओर से स्कूलों को कहा गया है कि वे अपने ईको क्लब के माध्यम से बच्चों में जागरूकता फैलाएं।

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छात्रों को अपनी छोटी प्राकृतिक सामग्री से बनी मूर्तियां और कलाकृतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। बोर्ड ने स्कूलों को कक्षाओं के स्तर के हिसाव से अलग-अलग गतिविधियां भी सुझाई हैं।
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सीबीएसई के अनुसार, विभिन्न आयोजनों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) कलाकृतियों का उपयोग किया जा रहा है। पीओपी मूर्तियां गैर-जैव निम्नीकरणीय और जल में अघुलनशील होती हैं। 

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स्वच्छ जल के लिए इको आर्ट

विसर्जन के समय ये जिप्सम और रासायनिक पेंट से विषाक्त भारी धातुओं जैसे हानिकारक पदार्थों को जल निकायों में छोड़ती हैं। इससे जल में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। जलीय जीवन खतरे में पड़ जाता है, पेयजल स्त्रोत दूषित हो  जाते हैं और अक्सर आस-पास रहने वाले लोगों में त्वचा और श्वसन संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।


इस समस्या के समाधान के लिए प्राकृतिक सामग्रियों से बनी कलाकृतियों का उपयोग किया जा सकता है, जो जल में आसानी से घुल जाती हैं और प्रदूषण नहीं फैलाती हैं।


बोर्ड ने इस संबंध में स्कूलों को कहा है कि वह चर्चाएं, वाद-विवाद, पोस्टर बनाने की प्रतियोगितएं, सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम, व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित करें। इनमें छात्रों को अपनी छोटी प्राकृतिक सामग्री से बनी मूर्तियां और कलाकृतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। ताकि विद्यार्थियों को लाभ मिल सके।

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