परीक्षा सुधार: एबीवीपी ने नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स को दिए सुझाव, नीट को लेकर रखा क्या प्रस्ताव?
ABVP Exam Reforms: एबीवीपी ने परीक्षा सुधारों को लेकर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स को सुझाव सौंपे हैं। संगठन ने बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में कराने और नीट साल में दो बार कराने की संभावना तलाशने की मांग की है।
विस्तार
ABVP Exam Reforms: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स को सुझाव सौंपे हैं। संगठन ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में कराने का प्रस्ताव दिया है।
एबीवीपी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसके सुझाव विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के साथ हुए विचार-विमर्श के आधार पर तैयार किए गए हैं। इसके लिए पुणे, नागपुर, भोपाल, दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण बिहार में गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए गए थे।
संगठन के अनुसार, उसके सुझावों में तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सुधार शामिल हैं। इनका उद्देश्य नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाना है।
बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में कराने का प्रस्ताव
एबीवीपी ने बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में कराने का सुझाव दिया है।
- पहले चरण का इस्तेमाल अभ्यर्थियों की छंटनी के लिए किया जाएगा।
- दूसरे चरण का इस्तेमाल अंतिम चयन के लिए किया जा सकता है।
संगठन का कहना है कि इससे चयन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। साथ ही एक ही महत्वपूर्ण परीक्षा से जुड़े दबाव को भी कम किया जा सकता है।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, "दो चरणों वाली परीक्षा व्यवस्था चयन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बना सकती है और एक ही महत्वपूर्ण परीक्षा से जुड़े दबाव को कम कर सकती है।"
नीट को लेकर क्या सुझाव दिया?
एबीवीपी ने नीट को साल में दो बार कराने की संभावना तलाशने का भी सुझाव दिया है। संगठन ने कहा है कि दोनों परीक्षाओं में से बेहतर अंक को मान्य करने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। संगठन का कहना है कि इससे विद्यार्थियों की एक ही महत्वपूर्ण परीक्षा पर निर्भरता कम हो सकती है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा बढ़ाने पर जोर
एबीवीपी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कंप्यूटर आधारित परीक्षा के इस्तेमाल को बढ़ाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।
संगठन ने परीक्षा केंद्रों के लिए पूरे देश में एक समान मानक तय करने की बात कही है। अभ्यर्थियों के मजबूत सत्यापन और आंकड़ों की सुरक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने का भी प्रस्ताव दिया गया है।
उत्तर कुंजी और सामान्यीकरण में पारदर्शिता की मांग
एबीवीपी ने उत्तर कुंजी, सामान्यीकरण और बराबर अंक आने की स्थिति में चयन के नियमों को पारदर्शी बनाने की मांग की है। संगठन ने तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों से निपटने के लिए स्पष्ट नियम बनाने का सुझाव दिया है। जरूरत पड़ने पर दोबारा परीक्षा कराने की व्यवस्था रखने की बात भी कही गई है।
राष्ट्रीय प्रश्न बैंक और डिजिटल मूल्यांकन का प्रस्ताव
- परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एबीवीपी ने स्वतंत्र सुरक्षा और प्रक्रिया ऑडिट कराने की सिफारिश की है।
- इसके अलावा संगठन ने राष्ट्रीय प्रश्न बैंक, डिजिटल मूल्यांकन, एकीकृत परीक्षा प्रबंधन प्रणाली और केंद्रीय परीक्षा डैशबोर्ड बनाने का सुझाव दिया है।
पाठ्यक्रम और प्रवेश परीक्षाओं के बीच बेहतर तालमेल की मांग
दीर्घकालिक सुधारों के तहत एबीवीपी ने पाठ्यक्रम, शिक्षण, मूल्यांकन और प्रवेश परीक्षाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की बात कही है। संगठन ने संस्थानों में सीखने की व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया है, ताकि विद्यार्थियों की कोचिंग पर निर्भरता कम हो सके। इसके साथ ही करियर परामर्श और योग्यता आधारित मूल्यांकन शुरू करने की सिफारिश की गई है।
एबीवीपी ने बड़े सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का सुझाव दिया है। इसके लिए पहले पायलट परियोजनाएं चलाने, उनकी समीक्षा करने और स्वतंत्र ऑडिट कराने की बात कही गई है।
'विद्यार्थियों को परीक्षा प्रणाली की कमियों का खामियाजा न भुगतना पड़े'
एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, "विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और मेहनत के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होना चाहिए, न कि उन्हें परीक्षा प्रणाली की कमियों का खामियाजा भुगतना पड़े।"
उन्होंने कहा कि इन सुझावों का उद्देश्य पंजीकरण और परीक्षा से लेकर मूल्यांकन और चयन तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है।
सोलंकी ने कहा कि संगठन ने टास्क फोर्स के सामने तत्काल समाधान और दीर्घकालिक सुधार दोनों रखे हैं। यदि आगे चर्चा के लिए बुलाया जाता है तो एबीवीपी इनके क्रियान्वयन के व्यावहारिक मॉडल भी पेश करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, "व्यापक उद्देश्य स्पष्ट है: हर विद्यार्थी को निष्पक्ष और समान अवसर मिलना चाहिए और परीक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों तथा समाज का विश्वास हासिल कर उसे बनाए रखना चाहिए।"
जुलाई में सरकार ने गठित की थी टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई में घोषणा की थी कि सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है।
यह घोषणा नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर 37 दिनों से चल रहे आंदोलन को समाप्त किए जाने के एक दिन बाद हुई थी।
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