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कर्नाटक: हिजाब के बाद अब बाइबल पर घमासान, हिंदू संगठनों ने किया स्कूल के खिलाफ प्रदर्शन

Mon, 25 Apr 2022 08:07 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Mon, 25 Apr 2022 08:07 PM IST
सार

मोहन गौड़ा ने कहा कि यह नियम केवल किसी और धर्म का पालन करने के लिए छात्र को मजबूर करना है। यह नियम सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संविधान के अनुच्छेद 25 का खुले तौर पर उल्लंघन करता है।

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School faces ire of Hindu outfits for making Bible classes must for non-Christian students
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

कर्नाटक में एक ईसाई स्कूल की ओर से कथित तौर पर सभी छात्रों के लिए बाइबल को पढ़ना अनिवार्य करने पर विवाद खड़ा हो गया है। इसके विरोध में हिंदू संगठनों ने अपनी आवाज उठाई है। बेगलुरु में स्थित एक सदी से भी पुराने क्लेरेंस हाईस्कूल से यह घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार स्कूल ने गैर-ईसाइयों सहित सभी छात्रों को बाइबल पाठ्यक्रम की कक्षा में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। 

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हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता मोहन गौड़ा ने बताया कि क्लेरेंस हाईस्कूल ने छात्रों के अभिवावकों को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा है। इसमें अभिवावकों को स्वीकार करना है कि उनके बच्चे/छात्र को बाइबल की कक्षा में भाग लेना होगा। मोहन गौड़ा ने आगे बताया कि स्कूल के नियमानुसार केवल वही माता-पिता अपने स्कूल में अपने बच्चों का प्रवेश करा सकते हैं, जिन्हें इस नियम से आपत्ति न हो।  
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मोहन गौड़ा ने कहा कि यह नियम केवल किसी और धर्म का पालन करने के लिए छात्र को मजबूर करना है। यह नियम सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संविधान के अनुच्छेद 25 का खुले तौर पर उल्लंघन करता है। इसके साथ ही यह बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम का भी उल्लंघन है। कई अभिवावकों ने भी स्कूल के इस नियम के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया है। इस मामले को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया गया है। जल्द ही प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश से भी मुलाकात की जाएगी। पूरे मामले पर स्कूल प्रशासन की ओर से कई भी बयान सामने नहीं आया है। 

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