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Hindi News ›   Education ›   Sahasrabuddhe spoke on reskilling, relearning in Amar Ujala Samvad; Said degrees should have an expiry date

Samvad: दवाईयों की तरह डिग्रियों पर भी होनी चाहिए एक्सपायरी डेट, संवाद में ऐसा क्यों बोले अनिल सहस्रबुद्धे?

Tue, 03 Sep 2024 08:16 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 03 Sep 2024 08:16 PM IST
सार

Amar Ujala Samvad: आज के युग में तकनीक सबसे तेजी से बदल रही है। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में इसी मुद्दे पर बात करते हुए एनईटीएफ के अध्यक्ष, डॉ अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि दवाईयों की तरह डिग्रियों पर भी एक्सपायरी डेट होनी चाहिए।
 

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Sahasrabuddhe spoke on reskilling, relearning in Amar Ujala Samvad; Said degrees should have an expiry date
संवाद के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि डिग्रियों की भी एक्सपायरी डेट हो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

Amar Ujala Samvad: दिल्ली में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में एनईटीएफ के अध्यक्ष, डॉ अनिल सहस्रबुद्धे भी पहुंचे। शिक्षा जगत से जुड़े मुद्दों पर बात करने के लिए उनके साथ एक लंबे सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, रोजगार सहित इन क्षेत्रों में तकनीक की भूमिका, नई शिक्षा नीति, भारतीय शिक्षा प्रणाली जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की।

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शशिधर पाठक नाम के दर्शक ने सवाल किया कि हर दो-ढ़ाई साल में नई चीजें आ जाती हैं और तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। अगर हम पीछे मुड़कर देखें तो हमारे स्कूलों में, स्कूलिंग सिस्टम में, शिक्षक और उनके प्रशिक्षण में बहुत गैप है। ऐसे में इस गैप को कम करने के लिए क्या किया जाए।

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ये दिया सवाल का जवाब

इस सवाल के जवाब में डॉ अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि सबसे पहले हमें अपने दिमाग से यह निकालना पड़ेगा कि 10, 12, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन या कोई भी अन्य पढ़ाई करने के बाद हमारी पढ़ाई पूरी हो चुकी है। जिस प्रकार से तकनीक तेजी से बदल रही है, ऐसे में हमें लाइफ लॉन्ग लर्नर बनना पड़ेगा। छात्रों सहित शिक्षकों, प्रिसिपल, डायरेक्टर सहित सबको लाइफ लॉन्ग लर्नर बनना होगा। क्योंकि यदि ये लोग ही नहीं पढ़ेंगे-सीखेंगे तो वे छात्रों को कैसे सिखाएंगे।

5 और 10 साल में एक्सपायर हो जानी चाहिए डिग्री

डॉ अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा, "जैसे दवाओं के ऊपर डेट ऑफ मैन्यूफैक्चर, डेट ऑफ एक्सपायरी होती है वैसे ही डिग्रियों पर भी 5 या 10 साल के बाद डेट ऑफ एक्सपायरी तय कर देनी चाहिए। इसको आप जब तक रिन्यू नहीं करोगे, तब तक आपकी डिग्री खारिज रहेगी।

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कंपनियों को भी देना चाहिए रि-स्किलिंग को बढ़ावा

आज के समय में ऑनलाइन माध्यमों से भी रि-स्किलिंग और री-लर्निंग सीख सकते हैं। यह बात नियोक्ता कंपनियों को भी सोचनी चाहिए कि यदि उनके कर्मचारियों को रि-स्किलिंग का मौका नहीं दिया गया, तो इसका असर प्रोडक्टिविटी पर पड़ेगा, वह कम हो जाएगी। इसलिए खुद कंपनियों को भी इसके लिए बढ़ावा देना चाहिए।

डॉ अनिल सहस्रबुद्धे ने बताया कि इस दिशा में बहुत सारी यूनिवर्सिटीज ने 4 वर्षीय प्रोगाम, मल्टीपल एंट्री, मल्टीपल एग्जिट, मल्टी-डिसिप्लीनरी, इंट्रोड्यूजिंग स्किल्स इन करिकुलम, रिविजन, इंडस्ट्री के साथ पार्टनर्शिप को अपनाना शुरू कर दिया है। अगर सभी पहलुओं को ध्यान में रखें तो 1100 यूनिवर्सिटीज में से करीब 400-500 ने इसे लागू करना शुरू भी कर दिया। बाकि की यूनिवर्सिटीज भी जल्दी ही इसे अपनाना शुर कर देंगी।
 

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