अमेरिका: कॉलेज छात्रों की देखभाल के लिए मिल रही किराये की मां, 1.5 लाख रुपये सालाना में पेरेंटिंग पैकेज
अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
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सेंट लुइस (मिसौरी)/न्यूयॉर्क। अमेरिका के बड़े कॉलेजों में आजकल एक नया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें अमीर बच्चों के माता-पिता किराये की मांओं की सेवाएं ले रहे हैं। ताकि हॉस्टल में रहने वाले उनके बच्चों को कोई दिक्कत न हो। माइंडीनोज, बामा मामा और कैंपस मॉम जैसी सेवाएं सालाना 1.5 लाख रुपये के पैकेज तक में उपलब्ध हैं। इसमें स्थानीय महिलाएं बच्चों का कमरा साफ करने, कपड़े धोने, जरूरत पड़ने पर उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने जैसी सुविधाएं देकर कॉलेज छात्रों को मां की कमी महसूस नहीं होने देतीं।
किराये पर बच्चों पर लाड़-प्यार लुटाने वाली मांएं उपलब्ध कराने वाले स्टार्टअप्स अमेरिका के दर्जनों बड़े कैंपस तक फैल चुके हैं। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ माइंडीनोज अब यूसीएलए, नॉर्थवेस्टर्न और फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी जैसे बड़े संस्थानों में सेवाएं दे रहा है। इन सेवाओं का सालाना खर्च 525 डॉलर (लगभग 50,000 रुपये) से शुरू होकर व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से 1,600 डॉलर (करीब 1.52 लाख रुपये) तक होता है। हालांकि, समाजशास्त्री इस नए ट्रेंड पर चिंता जताते हुए कह रहे हैं कि जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार बच्चों को अपंग बना रहा है।
हर छोटा-बड़ा काम संभाल रहीं माता-पिता को बताती हैं हाल
- बीमारी में देखभाल: बीमार छात्र के लिए घर का बना गर्म चिकन सूप ले जाना, दवाइयां लाना और अस्पताल के इमरजेंसी रूम में साथ बैठना।
- लॉन्ड्री व सफाई: गंदे कपड़े धुलवाना कमरे की सफाई कराना और पेस्ट कंट्रोल टीमों के साथ तालमेल बनाना।
- सरप्राइज उपहार: जन्मदिन पर कमरे को सजाना और अच्छा प्रदर्शन करने पर कुकीज या आइसक्रीम बास्केट पहुंचाना।
- माता-पिता को अपडेट: छात्र दो दिन तक घर फोन न करे, तो कमरे पर जाकर जायजा लेना और परिजनों को फोटो-मैसेज भेजना।
सीखने और समझने में बाधक बन रहा दुलार
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया की समाजशास्त्री डॉ. एनेट लारेउ के अनुसार, इस मॉडल से छात्र खुद पर भरोसा करना और साथी दोस्तों से रिश्ते बनाना नहीं सीख पाते। प्रोफेसर लैरी नेल्सन का कहना है, माता-पिता का कभी-कभार केयर पैकेज भेजना समझ आता है, लेकिन जब आप बच्चे के कपड़े धोने और सफाई जैसे बुनियादी काम भी दूसरों से कराने लगते हैं, तो आप उन्हें व्यावहारिक रूप से पंगु बना रहे हैं। वे कभी वयस्क नहीं बन पाएंगे।
पेरेंटिंग का तरीका पूरी तरह बदला
कैंपस मॉम की सह-संस्थापक मोंटेने लॉन्ग का कहना है कि आज के अभिभावक अपने बच्चों से 24 घंटे जुड़े रहना चाहते हैं। 1998 में कॉलेज जाने वाले छात्र पूरी तरह आत्मनिर्भर होते थे, वहीं आज माता-पिता अपने प्रतिनिधि के रूप में इन लोकल मॉम्स को तैनात कर रहे हैं।
यह खाना डिलीवर करने जैसी सामान्य सेवा नहीं है। यह मुझे तसल्ली देती है कि दूर रहने के बावजूद कोई मेरे बच्चे की देखभाल कर रहा है। यह भावनात्मक सरोगेसी है।
-हामिद हैदरी, सेवा का उपयोग कर रहे एक अभिभावक
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