कक्षा 9वीं व 11वीं के लिए बोर्ड का ऐसा फैसला, जिसके विरोध में उतर आए देश भर के पैरेंट्स-टीचर्स
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कक्षा 9वीं और 11वीं की परीक्षा के लिए अब तक स्कूल खुद ही प्रश्न पत्र बनाते आए हैं। लेकिन अब 10वीं और 12वीं परीक्षाओं की तरह ही 9वीं व 11वीं कक्षा के लिए भी बोर्ड ही प्रश्न पत्र तैयार करेगा। काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) की ओर से यह फैसला लिया गया है। लेकिन बोर्ड के इस फैसले का पैरेंट्स से लेकर टीचर्स तक विरोध कर रहे हैं।
इस संबंध में सीआईएससीई ने एक सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर में कहा गया है कि कक्षा 9वीं और 11वीं के लिए इंग्लिश, मैथ्स, साइंस समेत सभी मुख्य विषयों का प्रश्न पत्र अब स्कूल नहीं बोर्ड तैयार करेगा। ये प्रश्न पत्र सभी स्कूलों को वितरित किए जाएंगे। हालांकि स्टूडेंट्स की आंसर शीट्स स्कूलों के शिक्षकों द्वारा ही जांची जाएंगी।
बोर्ड ने क्यों लिया ये फैसला?
सीआईएससीई का कहना है कि बोर्ड ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि स्टूडेंट्स को पहले से ही बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सके।
सीआईएससीई चेयरपर्सन गैरी आराथून ने कहा है, 'इस केंद्रीकृत प्रणाली को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह स्टूडेंट्स को आने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार करेगी। किसी भी स्टूडेंट को बोर्ड परीक्षा के दौरान ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वो किसी नई तरह की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। एक तरह के प्रश्न पत्र से शिक्षकों को भी पैटर्न समझने में मदद मिलेगी। बोर्ड में बैठने से पहले स्टूडेंट्स इसके पैटर्न से वाकिफ हो जाएंगे।'
क्या है पैरेंट्स और टीचर्स का कहना?
लेकिन पैरेंट्स और टीचर्स का कहना है कि इससे बच्चों का मानसिक तनाव बढ़ेगा। इस संबंध में ऑल इंडिया पैरेंट एसोसिएशन के प्रमुख अशोक अग्रवाल ने कहा, 'आखिर काउंसिल कितनी बोर्ड परीक्षाएं कराना चाहती है? ऐसा करने से सिर्फ स्टूडेंट्स और पैरेंट्स का मानसिक तनाव ही बढ़ेगा। 10वीं व 12वीं के अलावा बोर्ड जैसी और कोई परीक्षा नहीं होनी चाहिए।'
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बता दें कि इस मामले में मुंबई पैरेंट एसोसिएशन ने एक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत भी कर दी है। 19 अगस्त तक 13 हजार से ज्यादा पैरेंट्स बोर्ड द्वारा फैसला वापस लिए जाने संबंधी याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
वहीं स्कूल टीचर्स भी बोर्ड के फैसले से नाखुश हैं। उनका कहना है कि इससे स्कूल का पाठ्यक्रम प्रभावित होगा। कई सीआईएससीई स्कूल पहले से ही स्टूडेंट्स को बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयार करना शुरू कर देते हैं। 9वीं व 11वीं में सवाल भी उसी तरह पूछे जाते हैं। 60 फीसदी सवाल 9वीं या 11वीं और 40 फीसदी सवाल क्रमशः 10वीं या 12वीं से पूछे जाते हैं।
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