Pariksha Pe Charcha: 'शिक्षा सिर्फ परीक्षा के बारे में नहीं, यह जीवन जीने का तरीका सिखाती है', सद्गरु का मंत्र
Pariksha Pe Charcha: परीक्षा पे चर्चा के पांचवें एपिसोड में सद्गुरु शामिल हुए। उन्होंने छात्रों को परीक्षा के कारण आने वाले प्रेशर को हैंडल करने के तरीके बताए। वह एक प्रसिद्ध आधात्मिक वक्ता और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक हैं।
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Sadhguru In PPC 2025: परीक्षा पे चर्चा के पांचवें एपिसोड में सद्गुरु शामिल हुए। वह एक आत्मज्ञानी, योगी, दिव्यदर्शी, कवि, लेखक, अतंर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वक्ता हैं। आधात्मिक गुरु कोयंबटूर में स्थित ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और प्रमुख हैं। उन्होंने छात्रों से बातचीत के दौरान परीक्षा के प्रेशर को हैंडल करने के गुर सिखाए।
शिक्षा सिर्फ परीक्षा के बारे में नहीं
सद्गुरू ने कहा कि शिक्षा सिर्फ परीक्षा के बारे में नहीं है, यह आपको जीवन जीने का तरीका सिखाती है। परीक्षा जीवन जीने के मौलिक गुण सिखाती है। अपनी बुद्धि को गतिशील मोड में रखें। हम अपने आस-पास जो भी चीजें देखते हैं उनके पीछे के विज्ञान को समझना चाहिए।
आज आप जिसे स्कूल, परीक्षा, शिक्षा कहते हैं यह आपके मस्तिष्क के विकास के लिए है। आप अपनी बुद्धिमता को जितना सक्रिय रखेंगे, आपका मस्तिष्क उतना अच्छे से काम करेगा।
बोर्ड परीक्षा के दौरान तनाव से कैसे निपटें?
बोर्ड परीक्षा के कारण आने वाले तनाव से निपटने के बारे में बात करते हुए सद्गुरु ने छात्रों को बताया कि पाठ्यपुस्तक बुद्धिमत्ता के लिए चुनौती नहीं है, इसलिए उन्हें मजेदार बनाएं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं और आपने परीक्षा में क्या प्रदर्शन किया है। आप इसे अनावश्यक रूप से अप्रोच करके मुश्किल बनाते है। इसलिए छात्रों को चाहिए कि वे अपनी पाठ्यपुस्तकों को प्लेफुल बनाएं, इससे वह आपके लिए चुनौतीपूर्ण नहीं रहेंगी।
#WATCH | 'Pariksha Pe Charcha' | Spiritual leader and founder of the Isha Foundation, Sadhguru Jaggi Vasudev interacts with students.
— ANI (@ANI) February 15, 2025
While speaking with the students, Sadhguru Jaggi Vasudev says, "Your textbook is not a challenge for your intelligence, no matter who you are. No… pic.twitter.com/PLLJhxBzUB
सद्गुरु ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब उनकी बोर्ड परीक्षा में केवल 15 दिन बचे थे, तो उन्होंने अपना हॉल टिकट लेने के स्थान पर आम को चुना, क्योंकि उन्हें बचपन से ही आम बहुत पसंद थे। उनके प्रधानाध्यापक ने पूछा कि आपने अभी तक अपना हॉल टिकट क्यों नहीं लिया है। सद्गुरु ने उत्तर दिया कि परीक्षाएं साल में दो बार आती हैं, लेकिन आम साल में केवल एक बार आते हैं।
अपने विचारों पर नियंत्रण मत रखो, उन्हें स्वतंत्र करो
सोचने को समझने की जरूरत है। सोचने का अर्थ विचारों की एक सचेत प्रक्रिया से है। अगर आपकी सोच सही प्रकार से काम कर रही है तो यह सही है।
ओवरथिंकिंग पर भी हुई बात
विचारों और सोच पर नियंत्रण रखने की बात करते हुए सद्गुरु ने कहा कि अक्सर लोग ओवरथिंकिंग की बात करते हैं। यह समझने की जरूरत है कि ओवरथिंकिंग क्या है। सोचने का अर्थ विचारों की एक सचेत प्रक्रिया से है। यह आप पर निर्भर करता है कि आप सोच किस दिशा में जाएगी। सोच और विचारों पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हमारे दिमाग में जो विचार आ रहे हैं, क्या हम वाकई वो सोच रहे हैं या वह खुद ही आते जा रहे हैं।
कहने का तात्पर्य है कि व्यक्ति का अपने विचारों पर नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओवरथिंकिंग जैसी कोई चीज नहीं होती है, यह मात्र हमारे दिमाग में आने वाले अनियंत्रित विचार हैं।
मोबाइल फोन और सोशल मीडिया जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजों से कैसे बचें?
सद्गुरु कहते हैं, हम किसी ऐसे व्यक्ति को स्मार्ट कहते हैं जो आपसे ज़्यादा स्मार्ट है, इसलिए अगर आप अपने से ज़्यादा स्मार्ट फोन रखते हैं तो यह बुरा है। फोन को यह तय नहीं करना चाहिए कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। इसके बजाय, आपको यह तय करना चाहिए कि आप अपने फोन का इस्तेमाल कैसे करेंगे। इसलिए यह सुनिश्चित करना चाहिए मोबाइल फोन आपके सोच को कंट्रोल न करे।
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