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Hindi News ›   Education ›   Panel Working on 'Correcting' History in Textbooks, emergency and Pokhran Nuclear Tests can get representation in textbooks

व्यवस्था: समिति पुस्तकों में दर्ज इतिहास में कर रही है सुधार, 1975 की आपातकाल को जोड़ने का सुझाव

Fri, 02 Jul 2021 10:42 AM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Fri, 02 Jul 2021 10:42 AM IST
सार

पाठ्यपुस्तकों में बदलाव किया जा रहा है। 1975 में हुए आपातकाल और 1998 में हुए पोखरण परमाणु परीक्षणों को भी भारतीय शिक्षा में विधिवत प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।

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Panel Working on 'Correcting' History in Textbooks, emergency and Pokhran Nuclear Tests can get representation in textbooks
पाठ्यपुस्तकों में बदलाव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक संसदीय समिति भारत भर की पाठ्यपुस्तकों में 'अनैतिहासिक संदर्भों (अनहिस्टॉरिकल रेफरेन्सेस)' की पहचान करने और 'भारतीय इतिहास का अनुपातहीन प्रतिनिधित्व (डिस अप्रोप्रिएट रीप्रेजेंटेशन)' को ठीक करने पर काम कर रही है। भाजपा सांसद और संसद में शिक्षा मंत्रालय समिति के अध्यक्ष, विनय सहस्रबुद्धे ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया था कि भारत में स्कूली पाठ्य पुस्तकों में देश को सबसे पहले रखना चाहिए। इसके साथ ही 1975 में हुए आपातकाल और 1998 में हुए पोखरण परमाणु परीक्षणों को भी भारतीय शिक्षा में विधिवत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

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15 जुलाई तक भेजने होंगे सुझाव
विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति अब इस मुद्दे पर हितधारकों और आम लोगों से सुझाव मांग रही है। विषय में रुचि रखने वाले शिक्षकों, छात्रों और अन्य लोगों को 30 जून तक अपने सुझाव भेजने के लिए कहा गया है। हालांकि, कोविड -19 दूसरी लहर के कारण, कुछ विशेषज्ञ अपने सुझाव देने में असमर्थ थे। इसे देखते हुए हाउस पैनल ने सुझाव देने की समय सीमा बढ़ाकर 15 जुलाई करने का फैसला किया है।

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इस वजह से बढ़ाई समय सीमा

हाउस पैनल के सूत्र ने कहा है कि रिपोर्ट लगभग अंतिम चरण पर थी, लेकिन बाद में कुछ लोगों ने सुझाव देने की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। दरअसल, दूसरी लहर के कारण कई लोग प्रभावित हुए और इसमें अपना योगदान नहीं दे पाए। इसलिए हाउस पैनल ने समय सीमा बढ़ाकर 15 जुलाई कर दी है। हम नहीं चाहते कि कोई भी इस महत्व की कवायद में हिस्सा लेने से वंचित रहे।

इन बदलावों का किया था जिक्र

राज्य सभा सचिवालय (समिति अनुभाग) द्वारा पहले जारी एक नोट में यह उल्लेख किया गया था कि स्कूली पाठ्य पुस्तकों में से हमारे राष्ट्रीय नायकों के बारे में अनैतिहासिक तथ्यों और विकृतियों के संदर्भों को हटाना", "भारतीय इतिहास की सभी अवधियों के समान या आनुपातिक संदर्भ" सुनिश्चित करना और "गार्गी, मैत्रेयी या शासक जैसे झांसी की रानी, राम चन्नम्मा, चांद बीबी और ज़लकारी बाई सहित महान ऐतिहासिक महिला नायकों की भूमिका पर प्रकाश डालना शामिल है।

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