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दिल्ली पुलिस के वो अधिकारी जिनके ऊपर पूरे देश को गर्व है

Mon, 17 Aug 2020 02:38 PM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Jaya Tripathi Updated Mon, 17 Aug 2020 02:38 PM IST
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Sarkari Naukri Delhi Police Recruitment: Officers of Delhi Police on whom the whole country is proud

पुलिस में काम करना बाहत सम्मान की बात होती है। उसपर से अगर आप देश राजधानी में तैनात हैं तो आपके ऊपर सबकी निगाहें बानी होती हैं। देश की राजधानी दिल्ली में तैनात पुलिसकर्मियों को वीआईपी की सुरक्षा से लेकर आतंकियों से निपटने तक का जोखिम होता है। ऐसे में अपने कर्तव्य को पवित्र मानते हुए दिल्ली पुलिस जी जान लगा कर मेहनत करती है। लेकिन आये दिन कुछ असामाजिक तत्वों के कारण दिल्ली पुलिस को लज्जित होना पड़ता है।

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दिल्ली में पुलिसिंग सिस्टम का एक अलग ही इतिहास है। यहां पुलिसिंग का काम कोतवाली प्रणाली के रूप में शुरू हुआ था। , जिसकी पहली कोतवाल सन 1237 में स्थापित की गई थी। इसके बाद में 1857 की क्रांति के वक़्त यह प्रणाली समाप्त हो गई। बाद में भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के तहत संगठित रूप से इसे अपनाया गया। तब से दिल्ली पुलिस मे समय-समय पर कुछ न कुछ बदलाव होते रहे हैं। लेकिन एक बात जो पूरे देश में एक ही रही, वह थी कड़ी मेहनत और समर्पण की भावना। दिल्ली पुलिस ने कई ऐसे अधिकारी दिए हैं जिनके ऊपर पूरे देश को गर्व है।

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आज हम इस ब्लॉग में दिल्ली पुलिस के ऐसे ही कुछ कीर्तिमान स्थापित करने वाले ऑफिसर्स के बारे में जानेंगे।

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संजीव कुमार यादव:

संजीव कुमार यादव को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। संजीव यादव ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में DCP के पद पर काम किया है। संजीव आतंकी गतिविधियों से संबंधित मामलों में काम करने के लिए मशहूर थे। संजीव का नाम आतंकियों को सजा दिलवाने वाले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों में सबसे ऊपर आता है। अपने करियर में उन्होंने 2005 और 2008 के दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े कई मामलों पर काम किया है। इनके अलावा उन्होंने 2010 में जामा मस्जिद और 2012 में इजरायल के राजनयिकों पर हमले के मामलों पर भी काम किया है।

 
आतंक से संबंधित मामलों की जांच करना आसान काम नहीं है क्योंकि ऐसे मामलों में सबूत इकट्ठा करना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन संजीव यादव को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की रीढ़ तोड़ने के लिए भी जाना जाता है। संजीव को अपने कार्यकाल में कई धमकियां मिलीं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा और बिना किसी डर के निभाया। काम के प्रति समर्पण के कारण उनके पास देश में सबसे अधिक 9 बार वीरता पुरस्कार प्राप्त करने का भी रिकॉर्ड है।

मैक्सवेल परेरा:

मैक्सवेल परेरा ने अपने 35 साल की दिल्ली पुलिस की सेवा में बहुत से महान काम किये हैं। वह 1970 में एक आईपीएस अधिकारी के रूप में पुलिस में शामिल हुए थे। परेरा को 1995 में राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए भी सम्मानित किया गया है।   परेरा को 1984 के सिख विरोधी दंगों को संभालने के लिए भी जाना जाता है। अपने करियर के दौरान वह कभी किसी राजनीतिक नेता या राजनीतिक दल से प्रभावित नहीं थे। यही प्रमुख कारण है कि वह कांग्रेस के विधायक सुशील शर्मा से संबंधित कुख्यात तंदूर मामले में मुख्य अधिकारी के तौर पार काम किये थे।

नीरज कुमार:

नीरज कुमार ने 1976 में IPS अधिकारी के रूप में दिल्ली पुलिस बल में होने करियर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में भी कार्य किया। नीरज कुमार ने सीबीआई में भी काम किया है। जहां उन्हें 1993 के बॉम्बे ब्लास्ट जैसे मामलों पर काम करने का अवसर मिला था। इसके तहत उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ बातचीत करने का मौका मिला।

अपने करियर के दौरान उन्होंने लपका गिरोह जैसे कई गिरोहों का भंडाफोड़ किया। लेकिन सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण और परेशान करने वाला मामला था 2012 में हुआ निर्भया बलात्कार का मामला।
एक पुलिस अधिकारी के रूप में उन्हें सौंपे गए कर्तव्यों को पूरा करने के अलावा, उन्होंने “जन संपर्क योजना” जैसी योजनाएँ बनाईं। जहां उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर एक बेहतर पुलिस-इन-पीपुल कनेक्शन स्थापित करने का काम किया था।

दिल्ली पुलिस ने देश को बहादुर दिलों की अग्रणी कई महिला पुलिस अधिकारी भी दिए हैं। दिल्ली पुलिस की बात की जाए और इन महिला पुलिस अधिकारियों को याद ना किया जाए ऐसा हो ही नहीं सकता।  देश की सुरक्षा की बात करें तो महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। दो ऐसे ही महिला पुलिस अधिकारियों की बात करेंगे जिन्होंने देश का नाम रौशन किया है।

किरण बेदी:

महिला पुलिस अधिकारियों की बात करें तो सबसे पहला नाम आता है किरण बेदी का। किरण बेदी 1972 में IPS अधिकारी के रूप में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने पुलिस विभाग में 35 वर्षों तक सेवा किया। उसने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों पर काम किया है। लेकिन इसमें सबसे यादगार दौर था जब वह दिल्ली जेल में हेड जेलर के रूप में तैनात थी। इस दौरान वह तिहाड़ जेल में कई सुधार लाए जिन्हें दुनिया भर में प्रशंसा मिली। जिसके लिए उन्हें 1994 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी मिला।

किरण बेदी के नाम से जुड़ी उपलब्धियों की एक लंबी सूची है। 2003 में किरण बेदी को यूएन के महासचिव के पुलिस सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। इस पद पर कायम होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। संन्यास लेने के बाद, उन्होंने कई किताबें लिखीं और आज वह पुडुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में कार्य कर रहीं हैं।

विमला मेहरा:

दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब कोई महिला आईपीएस कमिश्नर के बाद नंबर-2 यानी स्पेशल कमिश्नर (प्रशासन) का पदभार संभालेंगी। अभी तक इन दोनों पदों पर कोई भी महिला अफसर नहीं पहुंच सकी हैं।

गोल्फ-2 की इस कुर्सी पर बैठने वाली महिला तिहाड़ जेल की डीजी विमला मेहरा होंगी। इस पद पर रहते हुए उन्हें विदेशी भाषाओं को सीखने का अवसर मिला। विमला ने महिला कैदियों के कल्याण की दिशा में काम किया। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने में मदद करने के लिए एक महिला हेल्पलाइन नंबर भी पेश किया।

अगर ये सभी लोग इतिहास रच सकते हैं आप भी रच सकते हैं।  इतिहास असाधारण लोगों द्वारा नहीं बनाया जाता है बल्कि सामान्य लोगों द्वारा बनाया जाता है जो पूरी ईमानदारी से प्रयास करते हैं। इसलिए, अगर आपको लगता है कि आप किसी दिन उस जगह पर रहना चाहते हैं और देश की सेवा करना चाहते हैं, तो आज ही अपना प्रयास करना शुरू कर दें।

पुलिस में काम करना सम्मान की बात होती है और अगर आप देश की राजधानी में तैनात हैं तो आपके ऊपर सबकी निगाहें होती हैं। देश की राजधानी दिल्ली में तैनात पुलिसकर्मियों को वीआईपी की सुरक्षा से लेकर आतंकियों से निपटने तक का कार्य करना होता है। ऐसे में अपने कर्तव्य को पवित्र मानते हुए दिल्ली पुलिस जी जान लगा कर मेहनत करती है।

 दिल्ली में पुलिसिंग सिस्टम का एक अलग ही इतिहास है। यहां पुलिसिंग का काम कोतवाली प्रणाली के रूप में शुरू हुआ था। जिसकी पहली कोतवाली सन् 1237 में स्थापित की गई थी। इसके बाद में 1857 की क्रांति के वक्त यह प्रणाली समाप्त हो गई। बाद में भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के तहत संगठित रूप से इसे अपनाया गया। तब से दिल्ली पुलिस मे समय-समय पर कुछ न कुछ बदलाव होते रहे हैं। लेकिन एक बात जो पूरे देश में एक ही रही, वह थी कड़ी मेहनत और समर्पण की भावना। दिल्ली पुलिस ने कई ऐसे अधिकारी दिए हैं जिनके ऊपर पूरे देश को गर्व है। आज हम इस ब्लॉग में दिल्ली पुलिस के ऐसे ही कुछ ऐसे ऑफिसर्स के बारे में जानेंगे जिन्होंने आपने काम के दम पर एक कीर्तिमान स्थापित किया है।



करें दिल्ली पुलिस कॉन्सटेबल परीक्षा 2020 की पक्की तैयारी
आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस में कॉन्सटेबल के 5846 पदों के लिए अधिसूचना जारी की गई है, जिसके लिए देश के किसी भी राज्य के रहने वाले व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि आप दिल्ली के ही निवासी हों। इसके अलावा Safalta.com लेकर आया है दिल्ली पुलिस कॉन्सटेबल परीक्षा के लिए खास कोर्स, जिसमें आप घर पर रहते हुए देश की बेहतरीन फैकल्टी के साथ कर सकते हैं अपनी तैयारी। इस कोर्स में आपको विशेषज्ञों द्वारा तैयार स्टडी मैटेरियल उपलब्ध कराए जाएंगे, साथ ही ढेरों मॉक टेस्ट भी कराए जाएंगे।

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