श्रेणी-1 वाले स्वायत्त संस्थानों का निरीक्षण नहीं, अनुदान भी मिलेगा
डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी की तर्ज पर श्रेणी एक वाले स्टैंडअलोन संस्थानों का अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) निरीक्षण नहीं करेगी। श्रेणी एक वाले संस्थानों को मंजूरी के तहत अब शोध कार्यों के लिए अनुदान भी मिलेगा।
स्टैंडअलोन संस्थान, ऐसे संस्थानों को कहा जाता है कि जो किसी भी विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त नहीं होते हैं। एआईसीटीई से मंजूरी के तहत ऐसे संस्थान पीजी मैनेजमेंट और कंप्यूटर आधारित डिप्लोमा की पढ़ाई करवाते हैं।
एआईसीटीई अधिकारियों के मुताबिक, स्टैंडअलोन रेगुलेशन- 2019 के चलते देश के सभी सात सौ से अधिक ऐसे संस्थानों को ओर अधिक स्वायत्तता मिलेगी। स्वायत्तता देने के मकसद से रेगुलेशन- 2019 में संस्थानों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ऐसे संस्थानों को अब छात्रों के आंकड़े एआईसीटीई से सांझा करना होगा।
इसके अलावा नेशनल अकेडमिक डिपोजॅटरी में रजिस्टर्ड करना भी अनिवार्य रहेगा। बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट से संस्थान को श्रेणी एक या दो मिलने के 30 दिनों के भीतर ऐसे संस्थानों को श्रेणी के विभाजन के तहत वर्ग आवंटन जरूरी होगा। एआईसीटीई साल में एक बार स्टैंडअलोन संस्थानों की रिपोर्ट जांचेगी। यदि कोई संस्थान श्रेणी मिलने के बाद ढंग सेे काम नहीं करता है तो उससे श्रेणी वापस ले ली जाएगी।
श्रेणी एक और दो संस्थान डिस्टेंस में करवा सकेंगे पढ़ाई
रेगुलेशन के तहत श्रेणी एक वाले संस्थान अब शोध कार्यों के लिए कैंपस में रिसर्च पार्क भी खोल सकेंगे। इसके अलावा श्रेणी एक व दो वाले संस्थान ओपन एंड डिस्टेंस मोड से पढ़ाई करवा सकेंगे।
ओपन एंड डिस्टेंस की पढ़ाई शुरू करवाने के लिए उन्हें एआईसीटीई की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। श्रेणी एक व दो वाले संस्थान अपने कैंपस में स्किल कोर्स भी शुरू कर पाएंगे। इसके अलावा अब पीजी डिप्लोमा के साथ सर्टिफिकेट प्रोग्राम की पढ़ाई भी करवा सकेंगे।
उक्त दोनों श्रेणियों के संस्थानों को अपनी कुल सीटों में से 20 फीसदी पर विदेशी छात्रों को दाखिला देने की आजादी होगी। वे विदेशी छात्रों से स्वयं तय फीस ले सकेंगे। इसके अलावा विदेशी शिक्षकों का वेतन भी स्वयं तय कर सकते हैं।
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