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NEET Hearing: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को दौरान क्यों हुआ ई-रिक्शा का जिक्र? जानिए क्या है इससे जुड़ा मामला

Thu, 18 Jul 2024 04:52 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Thu, 18 Jul 2024 04:52 PM IST
सार

NEET SC hearing: नीट विवाद को लेकर 40 से अधिक याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। कोर्ट में इसी बीच  ई-रिक्शा का जिक्र भी हुआ है। कोर्ट में ई-रिक्शा का जिक्र क्यों हुआ और क्या कारण रहे? यहां विस्तार से जानें... 

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NEET Hearing: Why was the e-rickshaw mentioned during the hearing in the Supreme Court? Read the whole matter
NEET SC Hearing - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक

विस्तार

NEET SC Hearing: नीट में अनियमितताओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। याचिकाकर्ताओं ने NEET पेपर लीक पर रिपोर्ट और सीबीआई के निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं और तर्क दिया है कि प्रश्नपत्र परीक्षा तिथि से पहले साझा किया गया था। हालांकि, NTA ने दावा किया कि “कोई पेपर लीक नहीं हुआ”। इसी बीच ई-रिक्शा का जिक्र भी हुआ है।

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क्यों हुआ ई-रिक्शा का जिक्र?
सुप्रीम कोर्ट में 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना है कि एक बक्से को खुले ई-रिक्शा पर रखकर हजारीबाग के ओएसिस स्कूल ले जाया गया, जहां स्कूल के प्रिंसिपल ने यह बक्सा लिया। सीलबंद बक्सा उन्हें दिया गया, किसी बैंक को नहीं। एनटीए द्वारा नीट-यूजी परीक्षा आयोजित करने में व्यवस्थागत विफलता है, यह विफलता बहुआयामी है।

वकील ने आगे कहा कि प्रश्नपत्रों के परिवहन में तब समझौता हुआ जब छह दिनों तक पेपर एक निजी कूरियर कंपनी के हाथों में थे और पेपर को हजारीबाग में ई-रिक्शा में ले जाया जा रहा था। बैंक ले जाने के बजाय ड्राइवर इसे ओएसिस स्कूल ले गया।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी के ऐसा करने का उद्देश्य नीट परीक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर तमाशा बनाना नहीं है। लोग पैसे के लिए ऐसा कर रहे थे। इसलिए, यह परीक्षा को बदनाम करने के लिए नहीं था और कोई व्यक्ति पैसे कमाने के लिए ऐसा कर रहा था, जो अब स्पष्ट है। पेपर के बड़े पैमाने पर लीक होने के लिए उस स्तर पर संपर्कों की भी आवश्यकता होती है ताकि आप विभिन्न शहरों आदि में ऐसे सभी प्रमुख संपर्कों से जुड़ सकें। जो कोई भी इससे पैसा कमा रहा है, वह इसे बड़े पैमाने पर प्रसारित नहीं करेगा।

सीजेआई ने कहा कि आपके अनुसार छात्रों को सुबह 10.15 बजे पेपर बांटे गए। इसमें 180 प्रश्न थे। क्या ऐसा हो सकता है कि सुबह 9.30 से 10.15 बजे के बीच पेपर के सभी सवाल हल कर लिए गए हों? इसके बाद अगले 45 मिनट में छात्रों को यह जवाब बांट दिए गए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुल 7 पेपर सॉल्वर थे और हर सॉल्वर को 25-25 प्रश्न दिए गए थे। सीजेआई ने कहा कि 45 मिनट के अंदर सारी गड़बड़ी को अंजाम दिया गया। पूरा पेपर हल करके छात्रों को दे दिया गया। यह बहुत दूर की कौड़ी लगती है।

एसजी ने तर्क दिया, "छात्रों को प्रश्नों को याद करने के लिए केवल 2 घंटे मिले। इसीलिए 18 छात्रों में से केवल एक छात्र को प्रवेश मिल रहा है, लेकिन उसे प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा।" 

क्या कोई 45 मिनट के लिए 75,000 रुपये का भुगतान करता है? 
"सीजेआई ने टिप्पणी की, यह परिकल्पना कि पूरा पेपर 45 मिनट में हल कर दिया गया और छात्रों को दे दिया गया, बहुत दूर की कौड़ी है।"

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