NEET 2021: नीट परीक्षा में कथित कदाचार मामला, सुप्रीम कोर्ट का रिपोर्ट तलब करने से इनकार
NEET 2021: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में कथित कदाचार को लेकर विभिन्न राज्यों में दर्ज प्राथमिकी में जांच पर रिपोर्ट मांगने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने चार अक्तूबर को भी इसी तरह की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा था कि परीक्षा रद्द करना लाखों छात्रों की कीमत पर नहीं हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में कथित कदाचार को लेकर विभिन्न राज्यों में दर्ज प्राथमिकी में जांच पर रिपोर्ट मांगने के लिए एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप बड़ी संख्या में छात्रों के लिए हानिकारक होगा। शीर्ष अदालत विश्वनाथ कुमार और अन्य द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि नीट यूजी परीक्षा की तारीख पर, सीबीआई ने चार आरोपी व्यक्तियों और अज्ञात अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें कहा गया था कि प्रॉक्सी उम्मीदवारों का उपयोग करके परीक्षा की प्रक्रिया में हेरफेर किया गया था।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह याचिकाकर्ता द्वारा उजागर की गई समस्याओं को जानते हैं लेकिन वह इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है।वहीं, न्यायमूर्ति राव और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने कहा, हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते। हम समझते हैं कि आप क्या कहना चाहते हैं लेकिन यह बहुत भ्रम पैदा करेगा। हमारे हाथों से कोई भी हस्तक्षेप बड़ी संख्या में छात्रों के लिए हानिकारक होगा।
शुरुआत में, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह इस तथ्य के मद्देनजर परीक्षा रद्द करने और नई परीक्षा आयोजित करने के आग्रह पर दबाव नहीं डाल रहे क्योंकि पहले ही ऐसी समान याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया गया था। उन्होंने प्रस्तुत किया कि विभिन्न स्थानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और इस मुद्दे पर एक तथ्य-खोज रिपोर्ट तलब करनी चाहिए, इसके लिए शीर्ष अदालत को निर्देश देने की आवश्यकता है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि परिणामों की घोषणा नहीं की गई है और पूछा कि क्या राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के मन में कोई संदेह है। मामले पर विचार करने के लिए पीठ के अनिच्छा को भांपते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता ने याचिका वापस ले ली और मामले को वापस लेने के रूप में खारिज कर दिया गया। इससे पहले चार अक्तूबर को, शीर्ष अदालत ने इसी तरह की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा था कि परीक्षा रद्द करना लाखों छात्रों की कीमत पर नहीं हो सकता है।
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