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National Mathematics Day 2020: राष्ट्रीय गणित दिवस आज, 2012 से जा रहा है मनाया

Tue, 22 Dec 2020 10:31 AM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Tue, 22 Dec 2020 10:31 AM IST
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National Mathematics Day 2020 Today: Know Why India Celebrates It On December 22
रामानुजन

National Mathematics Day 2020: आज राष्ट्रीय गणित दिवस है। हर साल 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन किया जाता है। महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। साल 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय गणित दिवस की घोषणा की थी। आगे विस्तार से पढ़ें

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1887 को हुआ था रामानुजन का जन्म
भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास अयंगर रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 में हुआ था। वह  कोयंबटूर के ईरोड गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। रामानुजन के पिता का नाम श्रीनिवास अयंगर था। रामानुजन को आधुनिक काल के देश-दुनिया के महान गणित विचारकों में गिना जाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में गणित के विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में विस्तृत योगदान दिया था। बताया जाता है कि उन्हें बचपन से ही गणित से लगाव था। उनका ज्यादातर समय गणित पढ़ने और उसका अभ्यास करने में बीतता था, जिससे अक्सर वे अन्य विषयों में कम अंक पाते थे। 

 

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महज 12 साल की उम्र में रामानुजन ने त्रिकोणमिति में महारत पा ली थी और खुद से बिना किसी की सहायता के कई प्रमेय यानी थ्योरम्स को भी विकसित किया था। रामानुजन की आरंभिक शिक्षा कुंभकोणम के प्राथमिक स्कूल में हुई। 1898 में उन्होंने टाउन हाई स्कूल में दाखिला लिया। यहीं पर उनको गणित विषय की एक पुस्तक पढ़ने का मौका मिला। इस पुस्तक से वे इतने प्रभावित हुए कि गणित उनका पसंदीदा विषय बन गया। उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी में भी अध्ययन किया। 1911 में इंडियन मैथमेटिकल सोसाइटी के जर्नल में उनका 17 पन्नों का एक पेपर पब्लिश हुआ जो बर्नूली नंबरों पर आधारित था। 

 

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बाद में 1912 में घरेलू आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्होंने मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में बतौर क्लर्क नौकरी करना शुरू कर दिया था। जहां उनके गणित कौशल के मुरीद हुए एक अंग्रेज सहकर्मी ने रामानुजन को ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएच हार्डी के पास गणित पढ़ने के लिए भेजा। प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत के कुछ माह पहले ही रामानुजन का ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला हो गया था। हार्डी ने रामानुजन को पहले मद्रास यूनिवर्सिटी में और फिर कैंब्रिज में स्कॉलरशिप दिलाने में मदद भी की थी।

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