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Music Class: ब्रिटेन में कीर्तन को सिख पवित्र संगीत की मान्यता, पाठ्यक्रम में पांच भारतीय वाद्य यंत्र भी शामिल

Fri, 20 Sep 2024 10:12 AM IST
मेघा झा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा झा Updated Fri, 20 Sep 2024 10:12 AM IST
सार

कीर्तन को ब्रिटेन में सिख पवित्र संगीत के रूप में मान्यता दे दी गई है। संगीत परीक्षा बोर्ड की दी गई मान्यता के बाद अब आठवीं कक्षा के संगीत परीक्षा में सिख पवित्र संगीत भी शामिल होगा। इसके पाठ्यक्रम में पांच भारतीय वाद्य यंत्रों को भी शामिल किया गया है।

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Music Class: Kirtan recognized as Sikh sacred music in Britain, five Indian musical instruments included
कीर्तन प्रतीकात्मक फोटो

विस्तार

कीर्तन, पवित्र 'गुरु ग्रंथ साहिब' से शबद या शास्त्रों का गायन, सिख धर्म में भक्ति और प्रशंसा का एक मौलिक तरीका है। कीर्तन को ग्रेडेड संगीत परीक्षा प्रणाली का हिस्सा मानते हुए ब्रिटेन ने उसे मान्यता दे दी है। ग्रेडेड संगीत परीक्षा प्रणाली के तहत अबसे छात्र "सिख पवित्र संगीत" के लिए औपचारिक पाठ्यक्रम और पाठ्य सामग्री प्राप्त कर सकेंगे। बर्मिंघम स्थित संगीतकार और शिक्षाविद हरजिंदर लाली ने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ कीर्तन को अपना उचित स्थान दिलाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए पारंपरिक संगीत कौशल को संरक्षित रखने के लिए वर्षों समर्पित किए हैं।
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लंदन स्थित संगीत शिक्षक बोर्ड (एमटीबी) अबसे अपने विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त आठवीं कक्षा की संगीत परीक्षाओं में सिख पवित्र संगीत की पेशकश करेगा। जिससे विद्यार्थी उच्च ग्रेड 6-8 के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रवेश सेवा (यूसीएएस) अंक अर्जित कर सकेंगे। इसको बाद में विश्वविद्यालय प्रवेश के लिए मान्यता दी जाएगी।
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वहीं यू.के. में गुरमत संगीत अकादमी के शिक्षक डॉ. लाली ने कहते हैं कि, "हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी विरासत को सुरक्षित रखें।" "पाठ्यक्रम को स्वीकार करने और लॉन्च करने में 10 साल की कड़ी मेहनत लगी है। यह बहुत ही विनम्र करने वाला है, लेकिन फिर भी मुझे गर्व से भर देता है कि अब वह सारी मेहनत रंग लाई है। पश्चिमी दर्शक हमारे काम पर बहुत ध्यान दे रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे इस बात की सराहना कर सकते हैं कि सिख कीर्तन वायलिन, पियानो या किसी अन्य पश्चिमी समकालीन संगीत शैली से कम नहीं है," उन्होंने कहा।
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पांच भारतीय वाद्ययंत्र भी हैं शामिल
संगीत परीक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त करने वाले सिख पवित्र संगीत पाठ्यक्रम में पांच भारतीय तार वाले वाद्ययंत्रों - दिलरुबा, ताऊस, इसराज, सारंगी और सारंडा को मान्यता दी गई है। यू.के. में गुरमत संगीत अकादमी के शिक्षक डॉ. लाली बताते हैं कि 550 साल पहले कीर्तन तांती साज़ या तार वाले वाद्ययंत्रों के साथ किया होता था। हालांकि पिछले 150 वर्षों में, तार वाले वाद्ययंत्रों का स्थान हारमोनियम ले चुका है। वे बताते हैं कि "हमने इस दौरान अपनी बहुत सी विरासत खो दी। पिछले 25 वर्षों में, यूके में गुरमत संगीत अकादमी जैसे समूहों द्वारा पारंपरिक वाद्ययंत्रों को वापस लाने के लिए एक बहुत बड़ा अभियान चलाया गया है। इस परीक्षा प्रणाली में उम्मीदवार को पारंपरिक तार वाले वाद्ययंत्रों पर कीर्तन करना होता है, न कि हारमोनियम पर। ऐसा करके, हम ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।”
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