NEP 2020: अब मराठी में भी होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई, AICTE ने लॉन्च कीं पुस्तकें
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार और महाराष्ट्र सरकार के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ चंद्रकांत पाटिल ने मुंबई विश्वविद्यालय कलिना कैंपस में एआईसीटीई इंजीनियरिंग की किताबें जारी कीं।
विस्तार
Engineering books in Marathi language: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने 14 नवंबर को मराठी भाषा में डिप्लोमा और अंडर ग्रेजुएट इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए परिणाम आधारित शैक्षिक पुस्तकें लॉन्च कीं। एआईसीटीई के साथ मिलकर डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, लोनेरे, महाराष्ट्र के कुलपति, समन्वयकों, अनुवादकों और समीक्षकों के समन्वय से मराठी भाषा में डिप्लोमा और स्नातक इंजीनियरिंग पुस्तकें तैयार की गईं हैं।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार और महाराष्ट्र सरकार के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ चंद्रकांत पाटिल ने मुंबई विश्वविद्यालय कलिना कैंपस में एआईसीटीई इंजीनियरिंग की किताबें जारी कीं। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. सरकार, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि AICTE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निहित दिशा-निर्देशों के अनुरूप भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की किताबें उपलब्ध कराने की पहल की है। NEP मैनिफेस्ट में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देना सभी क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता। हम भारतीय भाषाओं को भारतीयता की आत्मा और बेहतर भविष्य की कड़ी मानते हैं।
MoS (Education) Dr. Subhas Sarkar releases AICTE Engineering books in Marathi languagehttps://t.co/05QC1FqyIA pic.twitter.com/42kAnvGyDX
— Mamidala Jagadesh Kumar (@mamidala90) November 14, 2022
इस पहल की सराहना करते हुए एमओएस (शिक्षा) ने कहा कि भाषा हमें संवाद करने की अनुमति देने वाले एक उपकरण से कहीं अधिक है। यह संस्कृति, समाज, विश्वासों और परंपराओं की अभिव्यक्ति है। मैं महाराष्ट्र के सभी विश्वविद्यालयों को इसके लिए बधाई देना चाहता हूं। अनुवाद और अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए सभी कदम उठा रहे हैं। तकनीकी रूप से उन्नत देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और अन्य ने काफी हद तक दिखाया है कि हम अपनी मातृभाषाओं में वैश्विक मानकों को प्राप्त कर सकते हैं।
वहीं, यूजीसी और एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने कहा कि जब आचार्य जगदीश चंद्र बोस को उनके पिता ने एक बंगाली माध्यम के स्कूल में भर्ती कराया था। हम जानते हैं कि बोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया गया था जो अपने समकालीनों से 16 साल आगे थे। आप इसे इस लेख में पाएंगे। जिन देशों में महान पुरस्कार जीते जाते हैं, वहां स्कूल से लेकर पीएचडी तक की शिक्षा स्थानीय भाषाओं में प्रदान की जाती है।
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