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Math-ish Thinking: सवालों को हल करने के लिए केवल फॉर्मूलों पर निर्भर न रहें, व्यावहारिक तरीके से करें सॉल्व
Thu, 23 Jan 2025 09:43 AM IST
शिवम गर्ग
जो बोआलर, प्रोफेसर, स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन
जो बोआलर, प्रोफेसर, स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 23 Jan 2025 09:43 AM IST
सार
Math-ish Thinking: गणित का विषय अक्सर सूत्रों और जटिल समाधानों को याद करने पर केंद्रित होता है, जिससे संख्याओं का भय तो पैदा होता ही है। यही कारण है कि अधिकतर छात्र गणित विषय से घबराते हैं। अगर आपको भी मैथ्स फोबिया (गणित से डर) है, तो आपको 'मैथ-ईश थिंकिंग' पर जोर देना चाहिए।
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Math-ish Thinking
- फोटो : freepik
विस्तार
Math-ish Thinking: गणित का विषय अक्सर सूत्रों और जटिल समाधानों को याद करने पर केंद्रित होता है, जिससे संख्याओं का भय तो पैदा होता ही है। वास्तविक दुनिया के उनके अनुप्रयोगों की समझ भी सीमित होती है। यही कारण है कि अधिकतर छात्र गणित विषय से घबराते हैं। अगर आपको भी मैथ्स फोबिया (गणित से डर) है, तो आपको 'मैथ-ईश थिंकिंग' पर जोर देना चाहिए। इसमें गणित के किसी सवाल को सूत्रों और जटिल समाधानों से परे जाकर व्यावहारिक रूप से सीखने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, न कि केवल सही उत्तर प्राप्त करने पर। इस अवधारणा से गणित के प्रति आपकी रुचि तो बढ़ेगी ही, साथ ही आप बेहद मजेदार तरीके से उसे अपने रोजमर्रा के कामों में भी आजमा सकेंगे।
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मैथ-ईश की अवधारणा
जहां पारंपरिक रूप से कक्षाओं में गणित के प्रश्नों का सटीक उत्तर खोजने पर जोर दिया जाता है, वहीं मैथ-ईश की अवधारणा अनुमानों पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए, आप कितने साल के हैं? या एयरपोर्ट पहुंचने में कितना समय लगता है? जैसे सवालों का जवाब देते समय आप आम तौर पर अनुमान के आधार पर उत्तर देते हैं, न कि एकदम सटीक।
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