बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डालता है सीसे वाला पेंट, क्या भारत में भी होता है इस्तेमाल
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सीसा (Lead) स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इससे होने वाले स्वास्थ्य खतरों पर दुनिया भर में चिंता व्याप्त है। बच्चों पर इसका जहरीला असर विशेष रूप से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इससे बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित होता है और उनके सोचने-समझने की क्षमता भी। सीसा युक्त पेंट के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 20 से 26 अक्तूबर तक कार्रवाई सप्ताह का आयोजन किया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सीसे का जहरीला असर वर्ष 2017 में दस लाख लोगों की मौत का कारण बना।
सीसे से स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से ही संयुक्त राष्ट्र एजेंसी और साझेदार संगठन देशों से सीसे के इस्तेमाल वाले पेंट पर पाबंदी लगाने का अनुरोध कर रहे हैं।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी 20 से 26 अक्टूबर तक “International Lead Poisoning Prevention Week of Action” मना रही है। इसका उद्देश्य जहरीले सीसे की रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई को बढ़ावा देना है।
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इस सप्ताह के जरिए कानूनों, नियमों और मानकों को रेखांकित किया जा रहा है, ताकि सीसे के इस्तेमाल वाले पेंट का उत्पादन, आयात और बिक्री को रोका जा सके।
कैसे होता है बच्चों पर जिंदगी भर का असर, आगे पढ़ें
विश्व स्वास्थ्य संगठन में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में निदेशक डॉक्टर मारिया नेयरा ने बताया कि, “सीसे से स्वास्थ्य और खासतौर पर बच्चों के स्वास्थ्य पर हानिकारक असर पड़ता है, जिससे जीवनपर्यंत उनके सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है।”
डॉक्टर नेयरा का कहना है कि नवजात शिशुओं और बच्चों को सीसे से होने दुष्प्रभाव के लिए पेंट में सीसे का इस्तेमाल व्यापक रूप से जिम्मेदार है। इसके बावजूद घरों, स्कूलों और खिलौनों में सीसा पेंट का इस्तेमाल अब भी जारी है।
खराब होते पेंट से सीसे के कण मिट्टी और धूल में मिल जाते हैं और बच्चे जमीन पर खेलते समय उन्हें निगल सकते हैं।
समय बीतने के साथ सीसा दांतों और हड्डियों में एकत्र हो जाता है, जिससे शारीरिक प्रणाली विभिन्न स्तरों पर प्रभावित होती है।
बचपन में बच्चों का नर्वस सिस्टम विकसित हो रहा होता है और वयस्कों की तुलना में वे पांच गुना ज्यादा सीसा सोख सकते हैं।
आईक्यू पर होता है असर
डॉक्टर नेयरा ने बताया कि बचपन में सीसे के प्रभाव में आने के कारण मस्तिष्क का विकास अवरूद्ध होता है जिससे आईक्यू पर असर पड़ता है।
“इससे व्यवहारिक स्तर पर भी बदलाव आएंगे जैसे एकाग्रता के अंतराल का घटना, समाज-विरोधी व्यवहार का बढ़ना, या फिर पूर्ण रूप से शिक्षा हासिल ना कर पाना।” डॉक्टर नेयरा का कहना है कि इनमें से कुछ दुष्प्रभाव बालिग होने के बाद भी जारी रह सकते हैं।
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कई देश अब पेंट में सीसे के इस्तेमाल को घटाने और उसका स्तर 90 पार्ट्स पर मिलियन (PPM) से नीचे रखने के लिए कानून लागू कर रहे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से सीसे के इस्तेमाल को इस मात्रा तक सीमित रखना सही माना जाता है।
क्या भारत में भी इस्तेमाल होता है सीसे वाला पेंट
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अब तक महज 73 देशों में ही सीसा पेंट के इस्तेमाल पर नियंत्रण कानूनी रूप से पाबंदी है। लेकिन भारत इनमें शामिल नहीं है। भारत में सीसा युक्त पेंट (Lead Paint) के इस्तेमाल को रोकने के लिए कोई कानून नहीं है।
It's International Lead Poison Prevention Week.
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2015 के एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में 31 फीसदी से ज्यादा घरों में 10 हजार पीपीएम से ज्यादा सांद्रता वाले सीसा युक्त पेंट इस्तेमाल किया गया है। यह तय सीमा 90 पीपीएम से कहीं ज्यादा है। इतना ही नहीं कला, ड्रॉइंग्स के लिए प्रयोग होने वाले ऑयल पेंट्स में भी सीसे का इस्तेमाल किया जाता है।
Lead exposure is dangerous to children’s development & can result in:
- reduced IQ & attention span
- impaired learning ability
- increased risk of behavioural problemshttps://t.co/sepXV70Yf9 via @WHO pic.twitter.com/qftUsgqb8l
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