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Hindi News ›   Education ›   Kerala Minister slams CBSE schools over pada puja, warns strict action for undemocratic ritual

Kerala: गुरु पूर्णिमा पर छात्रों ने शिक्षकों के पैर धोए, मंत्री ने जताई आपत्ति; सख्त कार्रवाई की दी चेतावनी

Sat, 12 Jul 2025 07:57 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Sat, 12 Jul 2025 07:57 PM IST
सार

Kerala: केरल के शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई स्कूलों में ‘पद पूजन’ रस्म को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। एसएफआई ने भी इसे आरएसएस एजेंडा बताते हुए विरोध जताया।
 

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Kerala Minister slams CBSE schools over pada puja, warns strict action for undemocratic ritual
केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी - फोटो : एएनआई फाइल फोटो

विस्तार

Kerala: केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने राज्य के दो सीबीएसई स्कूलों में छात्रों द्वारा सेवानिवृत्त शिक्षकों के पैर धोने की रस्म - ‘पद पूजन’ कराए जाने की रिपोर्ट पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे न केवल निंदनीय करार दिया, बल्कि कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

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मंत्री ने कहा कि इस मामले में संबंधित स्कूल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और सार्वजनिक निर्देश निदेशक (DPI) को इसकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कासरगोड और मावेलिक्करा स्थित भारतीय विद्यानीकेतन प्रबंधन के तहत संचालित दो सीबीएसई स्कूलों में ‘पद पूजन’ की रस्म करवाई गई थी।
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वी. शिवनकुट्टी ने बयान जारी कर कहा, “ऐसी प्रथाएं जो छात्रों में गुलामी की मानसिकता भरती हैं, किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हैं। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान और आत्मजागरूकता होना चाहिए।”

शिवनकुट्टी ने जताई हैरानी

वामपंथी नेता शिवनकुट्टी ने इस घटना पर हैरानी जताई और कहा कि राज्य सरकार इसे अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा, “शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक चेतना और प्रगतिशील सोच को बढ़ावा देना है। इस तरह की गतिविधियां हमारे शिक्षा तंत्र के बुनियादी उद्देश्यों को ही कमजोर करती हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा वह अधिकार है जो जाति व्यवस्था के नाम पर अशिक्षा थोपे जाने के दौर से संघर्ष करके हासिल किया गया है। उन्होंने चेताया, “इस अधिकार को किसी के पैरों तले कुचलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस प्रकार की गतिविधियों को दोबारा न होने देने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।”

शिवनकुट्टी ने यह स्पष्ट किया कि सामान्य शिक्षा विभाग को अधिकार है कि वह किसी भी सिलेबस से जुड़े स्कूल पर कार्रवाई करे, यदि वह ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ और उसके नियमों का पालन नहीं करता है।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ ने भी की आलोचना

इस बीच, सत्तारूढ़ दल माकपा की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने भी शनिवार को इस रस्म की कड़ी आलोचना की। SFI के राज्य अध्यक्ष एम. शिवप्रसाद ने बयान जारी कर कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से नियंत्रित स्कूलों में हुआ है और बच्चों से सेवानिवृत्त शिक्षकों के पैर धुलवाना न केवल निंदनीय है बल्कि अस्वीकार्य भी।

उन्होंने इसे समाज में “चातुर्वर्ण्य व्यवस्था थोपने का एजेंडा” करार दिया और कहा कि यह एक “असभ्य” कृत्य है जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की।

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