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Karnataka Hijab Row: सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल का बड़ा दावा, बोले- हिजाब विवाद के पीछे था इस संगठन का हाथ

Tue, 20 Sep 2022 04:12 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Tue, 20 Sep 2022 04:12 PM IST
सार

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में पोशाक का सर्कुलर धर्म-तटस्थ है। इसका पालन सभी धर्मों के छात्रों द्वारा किया जाना चाहिए।

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Karnataka Hijab Row Solicitor General Tushar Mehta said movement started by Popular Front of India
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक हिजाब विवाद पर सुनवाई आज मंगलवार को भी जारी है। सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्य सरकार के संस्थानों में हिजाब प्रतिबंध को चुनौती देने वाले छात्र याचिकाकर्ता एक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से प्रभावित थी। कर्नाटक सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आज अपनी दलीलें कोर्ट के सामने रखी हैं। 

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पीएफआई ने शुरू किया आंदोलन 
कर्नाटक सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की पीठ को बताया कि हिजाब को लेकर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नामक संगठन द्वारा सोशल मीडिया पर एक आंदोलन शुरू किया गया था। सोशल मीडिया पर लगातार हिजाब पहनना शुरू करने को लेकर मैसेज किए जा रहे थे। यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि एस बड़ी साजिश का हिस्सा है। 

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संस्थानों में पोशाक का सर्कुलर धर्म-तटस्थ
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में पोशाक का सर्कुलर धर्म-तटस्थ है। इसका पालन सभी धर्मों के छात्रों द्वारा किया जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने कर्नाटक सरकार के उस आदेश सबमिट किया जिसमें सभी छात्रों से निर्धारित पोशाक पहनने की अपील की गई है। 

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क्या है पूरा विवाद?
कर्नाटक में हिजाब पर विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब उडुपी के एक सरकारी स्कूल में कुछ छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसे लेकर देश के कई हिस्सों में काफी प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान आठ फरवरी को मांड्या में पीईएस कॉलेज के अंदर छात्रों ने भी प्रवेश किया था और नारेबाजी की थी। इसके बाद यह विवाद और बढ़ गया। जय श्री राम के नारे लगाती भीड़ के सामने 19 साल की मुस्कान खान ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए थे। इसके बाद मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि हिजाब इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को इसे स्कूलों के अंदर यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। इसी फैसले के खिलाफ कई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। 
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