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कानपुर यूनिवर्सिटी में कामकाज ठप, स्टूडेंट परेशान
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 25 Oct 2016 07:51 PM IST
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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर
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मेडिकल रिम्बर्समेन्ट पेमेन्ट की फाइल रोके जाने से नाराज कानपुर यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर दिया। दोपहर दो बजे तक कोई काम नहीं हुआ। इसका खामियाजा स्टूडेंटों को भुगतना पड़ा। एग्जाम फीस जमा करने, मार्कशीट बनवाने या फिर त्रुटि दूर कराने, प्रोविजनल सर्टिफिकेट लेने और डिग्री बनवाने पहुंचे स्टूडेंटों को बैरंग लौटना पड़ा।
कानपुर यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को सालाना सात हजार रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति मिलती है। इसका भुगतान दिवाली से पहले होता है। ऑडिट आब्जेक्शन का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भुगतान की फाइल रोक दी। इसके बाद कानपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश सिंह, महामंत्री सत्यप्रिय सावंत और कर्मचारी परिषद के सियाराम, द्वारिका यादव ने आपात मीटिंग बुलाई। चर्चा के बाद कामकाज ठप करने का फैसला कर लिया। आंदोलन की सूचना पर कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाया। बातचीत की और कहा कि मामले का निराकरण जल्द होगा। इसी वजह से कर्मचारी दोपहर दो बजे के बाद काम पर लौट आए। एसोसिएशन का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ा जाएगा। नाराज कानपुर यूनिवर्सिटी कर्मचारी एसोसिएशन ने कहा कि कॉपी री-चेक करने वालों को 27 लाख 60 हजार रुपये का भुगतान किया गया। यह अनुचित है। कॉपी री-चेक होने के बाद भी मूल्यांकन प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। चैलेंज इवैल्यूएशन में तमाम स्टूडेंटों के मार्क्स बढ़ रहे हैं। यह मामला हाईकोर्ट भी गया है।
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कानपुर यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को सालाना सात हजार रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति मिलती है। इसका भुगतान दिवाली से पहले होता है। ऑडिट आब्जेक्शन का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भुगतान की फाइल रोक दी। इसके बाद कानपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश सिंह, महामंत्री सत्यप्रिय सावंत और कर्मचारी परिषद के सियाराम, द्वारिका यादव ने आपात मीटिंग बुलाई। चर्चा के बाद कामकाज ठप करने का फैसला कर लिया। आंदोलन की सूचना पर कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाया। बातचीत की और कहा कि मामले का निराकरण जल्द होगा। इसी वजह से कर्मचारी दोपहर दो बजे के बाद काम पर लौट आए। एसोसिएशन का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ा जाएगा। नाराज कानपुर यूनिवर्सिटी कर्मचारी एसोसिएशन ने कहा कि कॉपी री-चेक करने वालों को 27 लाख 60 हजार रुपये का भुगतान किया गया। यह अनुचित है। कॉपी री-चेक होने के बाद भी मूल्यांकन प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। चैलेंज इवैल्यूएशन में तमाम स्टूडेंटों के मार्क्स बढ़ रहे हैं। यह मामला हाईकोर्ट भी गया है।
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