JNUSU 2025: जेएनयू में प्रेसिडेंशियल डिबेट आज, इस बार अध्यक्ष पद पर सबसे अधिक उम्मीदवार मैदान में
JNUSU 2025: जेएनयू छात्र संघ चुनाव में प्रेसिडेंशियल डिबेट सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहती है। इसमें प्रेसिडेंट पद के उम्मीदवार छात्रों के समक्ष अपने मुद्दों को रखते हैं।
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव 2025-26 को लेकर रविवार रात को प्रेसिडेंशियल डिबेट होगी। इस बार सेंट्रल पैनल में सबसे ज्यादा प्रेसिडेंट की पोस्ट पर सात उम्मीदवार हैं, जबकि चारों पदों पर कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें 30 फीसदी महिला उम्मीदवार शामिल हैं।
जेएनयू छात्र संघ चुनाव में प्रेसिडेंशियल डिबेट सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहती है। इसमें प्रेसिडेंट पद के उम्मीदवार छात्रों के समक्ष अपने मुद्दों को रखते हैं। इसको लेकर चुनाव समिति ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। रात आठ बजे का समय प्रेसिडेंशियल डिबेट के लिए निर्धारित किया गया है।
इसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से प्रेसिडेंट पद के लिए विकास पटेल, वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) से संयुक्त तौर पर आदिती मिश्रा, बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) से राज रत्न राजोरिया, एनएसयूआई से विकास, प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन से शिंदे विजयलक्ष्मी प्रेसिडेंशियल डिबेट में शामिल होंगी। इसके अलावा दूसरे छात्र संगठनों से अंगद सिंह और शिरसावा इंदू भी अपनी बात रखेंगे।
इसके बाद छात्र संगठनों का प्रचार खत्म हो जाएगा। एक नवंबर को यूनिवर्सिटी जीबीएम का भी समापन हो गया। इसमें सेंट्रल पैनल के उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के उम्मीदवारों ने अपनी बात रखी।
चार नवंबर को मतदान
बता दें कि चार नवंबर को दो पाली में सुबह नौ बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक और दोपहर ढाई बजे से लेकर शाम साढ़े पांच बजे तक चुनाव का आयोजन होगा। मतगणना उसी दिन रात नौ बजे से शुरू होगी और अंतिम परिणाम छह नवंबर को घोषित किया जाएगा।
जेएनयू में प्रशासनिक पारदर्शिता की स्थिति चिंताजनकः एबीवीपी
जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव को लेकर एबीवीपी के महासचिव और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवारों ने अपना एजेंडा प्रस्तुत किया। महासचिव पद के उम्मीदवार राजेश्वर कांत दुबे ने कहा कि जेएनयू में छात्र अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता की स्थिति चिंताजनक है। एबीवीपी मानती है कि किसी भी लोकतांत्रिक परिसर में संवाद और जवाबदेही सबसे आवश्यक है। प्रशासनिक निर्णयों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करना और सीपीओ मैनुअल जैसे असंवेदनशील प्रावधानों की समीक्षा कराना हमारी प्राथमिकता रहेगी।
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