Delhi University: अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलीं जेएनयू की वीसी, सीता और द्रौपदी को बताया फेमिनिस्ट
DU Seminar: स्वराज से न्यू इंडिया तक भारत के विचार का पुनर्रावलोकन (Revisiting Ideas of India from 'Swaraj' to 'New India) विषयक तीन दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया था।
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दिल्ली विश्वविद्यालय में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए जेएनयू की वाइस चासंलर प्रोफेसर पंडित ने प्राचीन विरासत, संस्कृति, सभ्यता और संविधान को लेकर बात की। स्वराज से न्यू इंडिया तक भारत के विचार का पुनर्रावलोकन (Revisiting Ideas of India from 'Swaraj' to 'New India) विषयक तीन दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया था।
सीता पहली सिंगल मदर और द्रौपदी पहली नारीवादी महिला
संगोष्ठी के दूसरे दिन एक सत्र को संबोधित करते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने विरासत और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बारे में बात की। संगोष्ठी में प्रोफेसर पंडित ने अपने वक्तव्य के दौरान सीता को पहली सिंगल मदर और द्रौपदी को दुनिया पहली नारीवादी महिला करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को संविधान से चलने वाले एक सिविलाइज्ड नेशन के तौर पर बताना या बदल देना इसके इतिहास, प्राचीन विरासत, संस्कृति और सभ्यता की उपेक्षा करना है। पंडित ने कहा कि भारत एक सभ्यता आधारित राज्य है और धर्म-मजहब से परे उठकर हमारे लिए भारतीय सांस्कृतिक इतिहास पर गर्व करना बहुत महत्वपूर्ण है।
चीन धर्मनिरपेक्ष कहलाता है, लेकिन भारत सांप्रदायिक
उन्होंने कहा कि भारत और चीन दो ऐसे देश हैं जो सभ्यता और आधुनिकता के आधार पर अपने को लगातार बदल रहे हैं। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बात करने वाला चीन धर्मनिरपेक्ष कहलाता है, लेकिन भारत में अगर ऐसी बात की जाए जो उसे सांप्रदायिक कहा जाता है। अपने संबोधन के दौरान जेएनयू की कुलपति ने आजादी के आंदोलन का जिक्र भी किया तो उन्होंने प्राचीन भारत के राजवंशों का भी उल्लेख किया। कुलपति ने स्वतंत्रता आंदोलन के भूले हुए क्रांतिकारियों से लेकर महात्मा गांधी तक, चोल वंश से लेकर मुगल सल्तनत तक के कई मुद्दों पर भी बात की।
इतिहास 'उसकी' कहानी है, लेकिन 'उसकी' भी कहानी है
प्रोफेसर पंडित ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि इतिहास 'उसकी' कहानी है, लेकिन 'उसकी' भी कहानी है। उन्होंने ब्रिटिश इतिहासकार ईएच कैर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि तथ्य पवित्र हैं और व्याख्या भिन्न हो सकती है। प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा कि यही दुर्भाग्य है कि जिस संस्थान से मेरा नाता है वहां इस कथन को बदलकर व्याख्या पवित्र है और तथ्य भिन्न हो सकते हैं कर दिया गया।
समापन 21 मई को होगा, राज्यपाल खान होंगे मुख्य अतिथि
बता दें कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शनिवार, 21 मई को होगा। समापन सत्र में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि रहेंगे। साथ ही आईसीसीआर के अध्यक्ष डॉ विनय सहस्रबुद्धे बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।
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