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JNUSU 2025: नवंबर में हो सकते हैं जेएनयू छात्र संघ चुनाव, तैयारियां शुरू: शिकायत निवारण प्रकोष्ठ भी बनाया गया

Sat, 04 Oct 2025 02:44 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Sat, 04 Oct 2025 02:44 PM IST
सार

JNUSU 2025: इस वर्ष जेएनयू छात्रसंघ चुनाव नवंबर में होने की संभावना है। विश्वविद्यालय ने निगरानी के लिए शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का गठन किया है। पिछली बार वामपंथी गुटों ने तीन पद जीते थे, जबकि एबीवीपी ने नौ साल बाद संयुक्त सचिव पद हासिल किया था।
 

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JNU Students’ Union Elections 2025 likely in November; grievance redressal cell constituted
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, JNU - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

JNU Students’ Union Elections 2025: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रसंघ चुनावों की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए औपचारिक रूप से ग्रिवेंस रिड्रेसल सेल (GRC) का गठन कर दिया है। संभावना जताई जा रही है कि चुनाव इस साल नवंबर के मध्य या आखिर तक आयोजित किए जाएंगे।

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छह से आठ हफ्तों में होंगे चुनाव

विश्वविद्यालय अधिकारियों के मुताबिक, पीएचडी छात्रों के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 12 सितंबर 2025 को हुई है। इसी आधार पर चुनाव सत्र शुरू होने के छह से आठ सप्ताह बाद यानी नवंबर के महीने में कराए जाने की संभावना है।

शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का गठन

डीन ऑफ स्टूडेंट्स ऑफिस की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, चुनावों से जुड़ी शिकायतों और विवादों को सुलझाने के लिए शिकायत निवारण प्रकोष्ठ (GRC) का गठन किया गया है।

  • इस प्रकोष्ठ की अध्यक्षता डीन ऑफ स्टूडेंट्स प्रोफेसर मनोराधा चौधरी कर रही हैं।
  • पैनल में 10 फैकल्टी सदस्य और 2 छात्र प्रतिनिधि शामिल हैं।
  • GRC को चुनावी विवादों में "मूल न्यायालय" (Court of Original Jurisdiction) का दर्जा दिया गया है, जबकि अपीलीय अधिकार कुलपति के पास रहेंगे।

 

GRC को मिले व्यापक अधिकार

GRC के पास निम्नलिखित अधिकार होंगे:

  • चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई।
  • उम्मीदवारों की वित्तीय रिपोर्ट की जांच।
  • सबपोना (Subpoena) जारी करने का अधिकार, यानी किसी व्यक्ति को गवाही देने या सबूत पेश करने के लिए बाध्य करना।


इसके अलावा, मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए ऑब्जर्वर सब-कमेटी भी गठित की गई है, जो विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों और हॉस्टलों में चुनाव पर नजर रखेगी।

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पिछले साल का चुनाव परिणाम

पिछले साल हुए चुनावों में वामपंथी छात्र संगठनों ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध एबीवीपी (ABVP) ने नौ साल बाद संयुक्त सचिव का पद जीतकर वापसी की थी।

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